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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Recognize gender-based violence not just by physical injuries, but also by the mental suffering it causes.

Gorakhpur News: लैंगिक हिंसा को चोटों के निशान से नहीं, मानसिक पीड़ा से भी पहचानें

Sat, 31 Oct 2026 02:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Sat, 31 Oct 2026 02:58 AM IST
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Recognize gender-based violence not just by physical injuries, but also by the mental suffering it causes.
- गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की राष्ट्रीय संगोष्ठी में महिलाओं के प्रति हिंसा, दिव्यांग महिलाओं की उपेक्षा और सामाजिक भेदभाव पर हुई चर्चा
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। लैंगिक हिंसा केवल शारीरिक चोटों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक भेदभाव भी हिंसा के रूप हैं। महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा को समझने के लिए उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों को भी देखना होगा। यह बातें दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की प्रो. चारु गुप्ता ने शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में कहीं। ''''''''दक्षिण एशिया में लैंगिक हिंसा : साहित्य, संस्कृति और मीडिया'''''''' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में प्रो. चारु गुप्ता ने औपनिवेशिक काल से पहले महिलाओं के स्वास्थ्य और प्रसव संबंधी देखभाल में दलित दाइयों की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उस दौर में गर्भावस्था और प्रसव की जिम्मेदारी मुख्य रूप से दाइयां संभालती थीं लेकिन सामाजिक पूर्वाग्रहों के कारण उनके ज्ञान और कार्यपद्धति को कमतर आंका गया। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की अंग्रेजी विभाग की प्रो. धृति रे ने दिव्यांग महिलाओं के प्रति सामाजिक और संस्थागत उपेक्षा को लैंगिक हिंसा का गंभीर पहलू बताया। कहा कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था, देखभाल में उदासीनता, संरचनात्मक उपेक्षा उन्हें हाशिए पर धकेलती है। संगोष्ठी के साथ ''''''''मीट द ऑथर'''''''' कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें प्रो. विकास शर्मा ने अपनी साहित्यिक रचनाओं के बारे में विचार साझा किए। देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. कृष्ण पाल सिंह के संरक्षण में हुआ। विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता मुर्मू संयोजक, डॉ. बृजेश कुमार सह संयोजक और डॉ. संजीव कुमार विश्वकर्मा आयोजक रहे। इस अवसर पर प्रो. गौरहरि बेहरा, प्रो. अजय कुमार चौबे, डॉ. पंकज कुमार सिंह, डॉ. कल्पना दिवाकर, दर्शनशास्त्र विभाग के डॉ. संजय कुमार राम, हिंदी विभाग के डॉ. राम नरेश राम सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक और शोधार्थी मौजूद रहे।
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