{"_id":"673c29dd07b1ba21e804047b","slug":"recently-the-aim-was-to-create-mistrust-against-government-by-spreading-rumors-of-loan-waiver-in-gorakhpur-2024-11-19","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ऋणमाफी की साजिश: सरकार के खिलाफ फैल जाए असंतोष, इसलिए फैलाई गई थी कर्जमाफी की अफवाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऋणमाफी की साजिश: सरकार के खिलाफ फैल जाए असंतोष, इसलिए फैलाई गई थी कर्जमाफी की अफवाह
Tue, 19 Nov 2024 11:32 AM IST
रोहित सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Tue, 19 Nov 2024 11:32 AM IST
सार
एजेंसियों की जांच में पता चला है कि केस दर्ज होने के पहले तीन अक्तूबर को आंबेडकर जनमोर्चा के बैनर तले पहले 24 माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के नाम से पंफलेट वितरित किए गए थे। राष्ट्रपति के नाम से छपवाए गए इस पंफलेट के जरिये महिलाओं के बीच ऋण कंपनियों के प्रति अविश्वास बनाने की मंशा थी।इसी के बाद पहली बार 13 अक्तूबर को कुछ महिलाएं गोरखनाथ मंदिर पहुंची थीं।
विज्ञापन
ऋणमाफी की फर्जी सूचना पर महिलाएं मंदिर के गेट तक पहुंच गईं थी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरकार और उसकी योजनाओं के खिलाफ आमजन में असंतोष पैदा कराने के लिए कर्जमाफी की अफवाह फैलाई गई थी। एजेंसियों की जांच में ये तथ्य सामने आया है। इस अफवाह के चलते स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं कई महिलाएं गोरखनाथ मंदिर पहुंच गई थीं। इस मामले में गिरफ्तार आंबेडकर जनमोर्चा के संयोजक श्रवण कुमार निराला और सहयोगियों पर महिलाओं को उकसाने का आरोप है।
विज्ञापन
जांच में पता चला है कि केस दर्ज होने के पहले तीन अक्तूबर को आंबेडकर जनमोर्चा के बैनर तले पहले 24 माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के नाम से पंफलेट वितरित किए गए थे। राष्ट्रपति के नाम से छपवाए गए इस पंफलेट के जरिये महिलाओं के बीच ऋण कंपनियों के प्रति अविश्वास बनाने की मंशा थी। इसी के बाद पहली बार 13 अक्तूबर को कुछ महिलाएं गोरखनाथ मंदिर पहुंची थीं।
विज्ञापन
उन्हें पुलिस ने यह बताकर लौटा दिया कि कर्जमाफी की कोई योजना नहीं है। एक दिन बाद ही महराजगंज, संतकबीरनगर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में महिलाएं फिर मंदिर के गेट पर पहुंच गईं।एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि कर्जमाफी की अफवाह व्हाट्सएप मैसेज या किसी प्रचार-प्रसार के जरिये नहीं फैलाई गई थीं।
विज्ञापन
ऐसा पूरी सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था। दुष्प्रचार के केंद्र बिंदु को गोरखपुर से दूर रखा गया ताकि अगर मामला खुले भी तो आसानी से सच का पता न चले। सूत्रों ने बताया कि इसी वजह से श्रवण कुमार निराला के गृह क्षेत्र चौरीचौरा से बहुत कम संख्या में ही महिलाएं गोरखनाथ मंदिर पहुंचीं।
एजेंसियों ने इस बिंदु को भी जांच के दायरे में रखा है।दरअसल, दर्ज केस के मुताबिक, महिलाओं से पांच-पांच सौ रुपये लेकर श्रवण कुमार निराला ने कागज पर हस्ताक्षर करवाए थे। थाने की मुहर लगवाकर उन्हें ऋणमाफी की फर्जी सूचना दी थी। हालांकि जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपियों की मंशा धन कमाने की नहीं थी।
उनकी मंशा थी कि कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को उकसा कर उनसे सरकार का विरोध करवाकर पूरे प्रदेश में माहौल बिगाड़ने की थी। इसीलिए महिलाओं को गोरक्षनाथ मंदिर भेजा, ताकि मठ भी चर्चा में आए।
तीन अक्तूबर से केस दर्ज होने वाले दिन 16 अक्तूबर तक का पूरा घटनाक्रम एजेंसियों की जांच के दायरे में है। इन तथ्यों के साथ लखनऊ और दिल्ली आईबी दफ्तर में भी एक रिपोर्ट दाखिल की गई है। हालांकि पुलिस की पूछताछ में श्रवण ने घटना में किसी तरह की संलिप्तता से इंकार कर दिया है।