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हनुमान ने जलाई लंका, मचा हाहाकार, कलाकारों ने जीता दर्शकों का दिल

Fri, 23 Oct 2020 10:10 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 23 Oct 2020 10:10 AM IST
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Ramlila celebration celebrated arya nagar gorakhpur see latest ramlila photos
आर्यनगर रामलीला। - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के आर्यनगर रामलीला समिति की ओर से मानसरोवर में हो रही रामलीला के सातवें दिन बृहस्पतिवार को राम की हनुमान से भेंट, सुग्रीव से मित्रता, बाली वध, माता जानकी की खोज एवं लंका दहन का मंचन किया गया। हनुमान ने जैसे ही लंका में आग लगाई, वैसे ही जयघोष होने लगा। जय श्रीराम के साथ ही जय हनुमान के जयकारे लगे। जयघोष से मानसरोवर मैदान गूंज उठा।

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अयोध्या की प्रसिद्ध मां सरयू आदर्श रामलीला मंडल के कलाकारों ने रामलीला में दिखाया कि शबरी का उद्धार कर श्रीराम व लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत के समीप पहुंचे। वहां सुग्रीव अपने मंत्रियों सहित बैठे थे। सुग्रीव अत्यंत भयभीत होकर हनुमान से बोले हे हनुमान, ये दोनों पुरुष बल और रूप के निधान हैं। तुम ब्रह्मचारी का रूप धारण करके जाकर देखो। यदि वे बाली के भेजे हुए हों तो मैं, तुरंत ही इस पर्वत को छोड़कर भाग जाऊं। यह सुनकर हनुमानजी ब्राह्मण का रूप धरकर भगवान राम के पास जाते हैं।
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हनुमान ने मस्तक नवाकर पूछा कि आप दोनों कौन हैं? श्रीराम ने कहा कि हम अयोध्या के महाराज दशरथ के पुत्र हैं और पिता के वचन का पालन करते हुए 14 वर्षों के वनवास पर निकले हैं। हमारे नाम राम-लक्ष्मण हैं। हम दोनों भाई हैं। हमारे साथ जानकी भी थीं, जिसका दुष्ट राक्षस ने  हरण कर लिया है। हे, ब्राह्मण, हम उसे ही खोजते फिर रहे हैं। हमने तो अपना चरित्र कह सुनाया। अब हे ब्राह्मण अपना परिचय दीजिए? प्रभु को पहचानकर हनुमान जी उनके चरण पकड़कर पृथ्वी पर गिर पड़े। उन्हें दंडवत प्रणाम किया और वानरराज सुग्रीव के पास लेकर गए। सुग्रीव भगवान को देखते ही शरणागत हो जाते हैं।

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भगवान राम ने किया बाली का वध

भगवान राम से मित्रता के बाद सुग्रीव ने राम से अपनी आपबीती बताई कि किस प्रकार भाई बाली ने संपत्ति हड़प ली, फिर राज्य से निष्कासित कर दिया। सुग्रीव ने कहा कि अगर आप बाली का वध कर देते हैं तो मैं, वहां का राजा बन जाउंगा। इसके बाद पूरी वानर सेना के साथ मिलकर माता जानकी को खोज निकालेंगे। इसके बाद भगवान राम बाली के वध के लिए तैयार हो जाते हैं।

राम के कहने पर ही सुग्रीव ने बाली को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों की शक्ल एक समान होने के कारण राम दोनों में अंतर नहीं कर पाते हैं जिससे सुग्रीव को युद्ध छोड़कर भागना पड़ता है। श्रीराम के कहने पर एक बार फिर सुग्रीव बाली को युद्ध के लिए ललकारते हैं। इस बार सुग्रीव के गले में फूलों की माला डालकर युद्ध के लिए भेजा जाता है। भगवान वृक्ष की आड़ से बाण चलाते हैं। बाण लगते ही बाली पृथ्वी पर गिरता है और मृत्यु को प्राप्त करता है।

हनुमान ने किया लंका दहन
लीला मंचन में कलाकारों ने दिखाया कि माता जानकी की खोज में वानर, भालू सब निकल पड़ते हैं। जामवंत के कहने पर हनुमान विशालकाय रूप धारण कर समुद्र पार कर लंका जाते हैं। वहां महल, मंदिरों में सीता की खोज करते हुए अशोक वाटिका पहुंचते हैं, जहां जानकी रहती हैं। हनुमान माता जानकी के पास पहुंचकर उन्हें राम की दी हुई अंगूठी दिखाते हैं।

जानकी हनुमान को आर्शीवाद देती हैं और कहती हैं कि मेरा श्रीराम को संदेशा देना की वह उनका इंतजार कर रही हैं। जल्दी आकर अपनी जानकी को ले जाएं। इसके बाद हनुमान सीता से आज्ञा लेकर फल खाने जाते हैं, जहां वह पूरी वाटिका तहस-नहस कर देते हैं। रावण का पुत्र मेघनाद वाटिका में आता है, फिर हनुमान को पकड़कर रावण के पास ले जाता है। जहां हनुमान की पूंछ में आग लगा दी जाती है।

हनुमान जलती हुई पूंछ के साथ महल से बाहर निकल पूरी लंका में आग लगा देते हैं। आग लगने से पूरी लंका में हाहाकार मच जाता है। यह दृश्य देखकर दर्शक जय हनुमान का जयघोष करने लगते हैं। इसी के साथ सातवें दिन के मंचन का विश्राम होता है।

ये रहे उपस्थित

पूर्व मेयर डॉ. सत्या पांडेय, समाज सेविका त्रिशला सिंह, कंचन सोनी, ऋचा चौधरी, मनीष अग्रवाल सराफ, कीर्ति रमन दास, राजीव रंजन अग्रवाल, विकास जालान, जितेंद्र नाथ अग्रवाल, नवोदित त्रिपाठी, गोवर्धन सिंह आदि मौजूद रहे।
आज के मंचन

आर्यनगर रामलीला समिति के प्रवक्ता विकास जालान ने बताया कि शुक्रवार को विभीषण शरणागत, अंगद रावण संवाद, रामेश्वर स्थापना का मंचन किया जाएगा। वहीं बर्डघाट रामलीला समिति के मीडिया प्रभारी अनुराग मझवार ने कहा कि शुक्रवार को रामेश्वर स्थापना एवं विभीषण को लंका से निकाले जाने का मंचन किया जाएगा।
 
लंका दहन का किया मंचन
गोरखपुर। श्री रामलीला कमेटी बर्डघाट की ओर से सर्राफा भवन में आयोजित रामलीला में शुक्रवार को लंका दहन का मंचन किया गया। श्री आदर्श रामलीला मंडल मानस उत्थान समिति जनकपुर के कलाकारों ने मंचन के माध्यम से दिखाया कि हनुमान समुद्र को पार कर लंका पहुंचते हैं। अशोक वाटिका पहुंच हनुमान माता जानकी से मिलते हैं और प्रभु श्रीराम की दी हुई अंगूठी उन्हें देते हैं।

माता जानकी की आज्ञा पाकर हनुमान भूख मिटाने के लिए अशोक वाटिका पहुंचते हैं जहां वह वाटिका को तहस-नहस कर देते हैं। इस पर मेघनाद पहुंचता है और हनुमान को पकड़ कर रावण के दरबार में ले जाता है। रावण और हनुमान से वार्तालाप होती है तब रावण हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश देता है। पूंछ की आग से हनुमान जी पूरे लंका को जला देते हैं। इस अवसर पर अध्यक्ष पंकज गोयल, महामंत्री अनूप अग्निहोत्री, दिनेश सर्राफ, चंद्र कुमार, गोपाल वर्मा, कन्हैया वर्मा, अमरनाथ, बलवंत आर्य, मृणाल, हर्ष बर्नवाल आदि मौजूद रहे।
 
इस लिंक पर ऑनलाइन देखें आर्यनगर की रामलीला
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