इलाज को है दरकार: रामानंद को मिले कोई खेवनहार तो हो जाए उपचार
मानंद का आयुष्मान कार्ड बना है, लेकिन कोई भी अस्पताल उससे इलाज करने के लिए तैयार नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि यह गंभीर बीमारी है। इसमें आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं हो पाएगा। डॉक्टर ने बताया कि आयुष्मान कार्ड से एक दिन में 1500 रुपये मिलते हैं। इससे अधिक जो खर्च आएगा वह मरीज या उसके परिजन को वहन करना होता है।
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गोरखपुर जिले के सहजनवां क्षेत्र के ग्राम टड़वा माफी निवासी सुदामा उर्फ लाला गोंड के बेटे रामानंद गोंड (21) की दोनों किडनी खराब है। डॉक्टरों का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट कराना पड़ेगा, लेकिन आर्थिक स्थित ठीक नहीं होने के कारण सुदामा अपने बेटे रामानंद का इलाज कराने में असमर्थ हैं। उन्हें सरकार या किसी अन्य से मदद की दरकार है।
सुदामा खुद पांच साल से पैरालाइसिस के मरीज हैं। उनकी पत्नी गृहिणि हैं। आर्थिक हालात ठीक नहीं होने की वजह से बेटे का इलाज नहीं करा पा रहे हैं। बताते हैं कि रामानंद के इलाज के लिए पत्नी के सारे गहने बेच दिए। कर्ज भी काफी हो गया है। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। जल्द इलाज नहीं मिला तो रामानंद का जीवन नहीं बचेगा।
सुदामा ने बताया कि छह माह पहले रामानंद की आंखों से धुंधला दिखाई देने लगा था। परिजनों ने आंख की जांच कराई तो कुछ नहीं निकला। कुछ सप्ताह बाद कुछ और जांचें हुईं तो पता चला कि रामानंद की दोनों किडनी खराब हैं। परिजन प्राइवेट हास्पिटल में इलाज कराने गए तो डॉक्टर ने बताया कि डायलिसिस करवाना पड़ेगा। कुछ दिन डायलिसिस हुआ, लेकिन सफलता नहीं मिली। डॉक्टरों ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट करवाना पड़ेग।
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आयुष्मान कार्ड है, पर नहीं हो पा रहा इलाज
सुदामा बताते हैं कि रामानंद का आयुष्मान कार्ड बना है, लेकिन कोई भी अस्पताल उससे इलाज करने के लिए तैयार नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि यह गंभीर बीमारी है। इसमें आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं हो पाएगा। डॉक्टर ने बताया कि आयुष्मान कार्ड से एक दिन में 1500 रुपये मिलते हैं। इससे अधिक जो खर्च आएगा वह मरीज या उसके परिजन को वहन करना होता है।
वहीं, सुदामा की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह इलाज पर आने वाले अतिरिक्त खर्च का बोझ उठा सकें। डायलिसिस कराने में भी दिक्कत आ रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में निशुल्क डायलिसिस की सुविधा है, लेकिन नंबर जल्दी नहीं आता है। निजी अस्पताल का खर्च सुदामा उठा नहीं सकते।
मेडिकल कॉलेज से लौटना पड़ा
तीन दिन पहले रामानंद की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। इस दौरान कुछ लोग बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले गए। डॉक्टरों ने दवा लिखकर घर जाने के लिए बोल दिया।
लखनऊ से भी निराश लौटना पड़ा था
कुछ दिन पहले रामानंद को लेकर परिजन राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ लेकर गए थे। वहां बताया गया कि नंबर लगाकर आइये और ओपीडी में दिखाइये तब इलाज किया जाएगा।
बेटे को देख मां नहीं संभाल पाती है आंसू
पाई-पाई की मोहताज रामानंद की मां दुर्गावती बेटे और पति की हालत देखकर टूट चुकी हैं। लोगों से कर्ज लिया और गहने बेचकर किसी तरह अब तक इलाज कराया, लेकिन बेटा स्वस्थ नहीं हुआ। बेटे को देखकर वह रोने लगती हैं। पति का भी स्वास्थ्य ठीक नहीं है। लगातार इलाज चल रहा है।
बड़े भाई शिवानंद को सता रहा लोगों का कर्ज
रामानंद का बड़ा भाई शिवानंद बताते हैं कि पिता के इलाज के लिए पहले से ही कर्ज था। इधर भाई की किडनी खराब होने पर काफी कर्ज हो चुका है। लोगों का कर्ज कैसे चुकाऊंगा। परिवार में एकमात्र कमाने वाला शिवानंद काफी परेशान है। भविष्य में बहन की शादी और घर के अन्य खर्च कैसे चलेंगे यह सोचकर वह काफी परेशान है। रामानंद के तीन भाई एक बहन है, जिसमें रामानंद दूसरे नंबर पर है।