डीडीयू में बिना टेंडर फर्म दे रही आउटसोर्सिंग कर्मचारी, राजभवन ने दिए जांच के आदेश
- आरटीआई कार्यकर्ता ने राज्यपाल से की थी शिकायत
- विश्वविद्यालय में 2015 से तैनात है सेवा प्रदाता फर्म
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में बिना टेंडर एक ही फर्म को पांच साल से आउटसोर्सिंग कर्मचारी मुहैया कराने का ठेका देने के मामले की जांच होगी। आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत पर राज्यपाल के विशेष कार्य अधिकारी ने कुलपति को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई करने को कहा है।
जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय में वर्ष 2015 में जेजेजे इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मुहैया कराने के नाम पर एंट्री की। फर्म से एक वर्ष का अनुबंध हुआ। इसके बाद टेंडर निकलना था, लेकिन अनुबंध समाप्त होने के बाद टेंडर नहीं निकाला गया।
करीब पांच साल तक अनुबंध की मियाद बढ़ाई जाती रही गई। वहीं इस साल कोरोना की आड़ में अनुबंध की समय सीमा फिर बढ़ा दी गई। इसकी मंजूरी एक निवर्तमान अधिकारी ने दी थी, जबकि फर्म का वर्तमान अनुबंध जून-जुलाई में खत्म हो रहा था।
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पीएफ घोटाले का भी आरोप लगाया
आरटीआई कार्यकर्ता उग्रसेन सिंह ने राजभवन को भेजे पत्र में सेवा प्रदाता फर्म पर कर्मचारियों के पीएफ अंशदान जमा कराने में भी घोटाले का आरोप लगाया है। बताया है कि कर्मचारियों के पीएफ के अंशदान को फर्म जमा नहीं कर रही है। हर महीने 40 से 50 कर्मचारियों की पीएफ की रकम गायब हो रही है।
राजभवन ने लिया संज्ञान, कार्रवाई के निर्देश
आरटीआई कार्यकर्ता ने मामले की शिकायत 15 जून को राजभवन में की थी। शिकायत को आधार बनाते हुए राजभवन ने जांच कराने का फैसला किया है। राज्यपाल के विशेष कार्यअधिकारी केयूर सी. संपत ने कुलपति को भेजे पत्र में मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा सीएम पोर्टल पर भी मामले की शिकायत हुई है। आरोप लगाया है कि मई 2019 में फर्म ने विवि से 248 कर्मचारियों के वेतन का भुगतान लिया और पीएफ अंशदान सिर्फ 191 कर्मचारियों का जमा कराया।
गोरखपुर विवि के कुलपति प्रो विजय कृष्ण सिंह ने बताया कि राजभवन से पत्र मिला है। मामले की जांच कर कार्रवाई के निर्देश मिले हैं। नियमानुसार मामले का निस्तारण किया जाएगा।