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बंगले पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं रख सकेंगे रेलवे अफसर
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बंगले पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं रख सकेंगे रेलवे अफसर
गोरखपुर। रेलवे में अफसर अब अपने बंगले पर टीएडीके (टेलीफोन एंड डाक अटेंडेंट) यानी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं रख सकेंगे। रेलवे बोर्ड ने नई तैनाती पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए एक जुलाई के बाद की तैनाती की समीक्षा के लिए भी निर्देशित कर दिया है। बोर्ड ने बृहस्पतिवार को सभी महाप्रबंधकों को दिशा-निर्देश जारी कर दिया है।
दरअसल, रेलवे में बहुत सारे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को अफसर अपने बंगले पर रख लेेते थे। नियमानुसार क्लास वन के रेल अधिकारियों को अपने बंगले पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रखने का अधिकार था। बंगले पर तीन साल तक कार्य करने के बाद तैनाती रेलवे कर्मचारी के रूप में हो जाती थी। रेलकर्मी बनने के बाद अफसर फिर से नई तैनाती कर लेते थे। इससे रेलवे का कामकाज प्रभावित होता था लेकिन अब चतुर्थ श्रेणी की तैनाती बंगले पर नहीं हो पाएगी। पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ (पीआरकेएस) ने रेलवे बोर्ड के इस निर्णय का स्वागत किया है। संघ के प्रवक्ता एके सिंह ने कहा है कि संघ लगातार इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग करता रहा है। यह व्यवस्था पारदर्शी नहीं रह गई थी। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा था। पूर्व में धनउगाही की भी शिकायतें आई थीं।
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गोरखपुर। रेलवे में अफसर अब अपने बंगले पर टीएडीके (टेलीफोन एंड डाक अटेंडेंट) यानी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं रख सकेंगे। रेलवे बोर्ड ने नई तैनाती पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए एक जुलाई के बाद की तैनाती की समीक्षा के लिए भी निर्देशित कर दिया है। बोर्ड ने बृहस्पतिवार को सभी महाप्रबंधकों को दिशा-निर्देश जारी कर दिया है।
दरअसल, रेलवे में बहुत सारे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को अफसर अपने बंगले पर रख लेेते थे। नियमानुसार क्लास वन के रेल अधिकारियों को अपने बंगले पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रखने का अधिकार था। बंगले पर तीन साल तक कार्य करने के बाद तैनाती रेलवे कर्मचारी के रूप में हो जाती थी। रेलकर्मी बनने के बाद अफसर फिर से नई तैनाती कर लेते थे। इससे रेलवे का कामकाज प्रभावित होता था लेकिन अब चतुर्थ श्रेणी की तैनाती बंगले पर नहीं हो पाएगी। पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ (पीआरकेएस) ने रेलवे बोर्ड के इस निर्णय का स्वागत किया है। संघ के प्रवक्ता एके सिंह ने कहा है कि संघ लगातार इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग करता रहा है। यह व्यवस्था पारदर्शी नहीं रह गई थी। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा था। पूर्व में धनउगाही की भी शिकायतें आई थीं।
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