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रेलवे घूसकांड: गलतियों से नहीं लिया सबक, अब जांच से अटकी हैं सांस

Wed, 20 Dec 2023 11:45 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 20 Dec 2023 11:45 AM IST
सार

जीएम सौम्या माथुर ने पूर्वोत्तर रेलवे का कार्य संभालते ही विभागवार समीक्षा बैठक शुरू की। हर बैठक में उनका पूरा जोर अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य व्यवहार पर होता है। फाइलें लंबित नहीं रखने का निर्देश भी जारी होता है। लेकिन, इनका कोई असर नहीं है।

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Railway bribery scandal No lessons learned from mistakes now investigation holding breath
सीबीआई ने रेलवे में प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक केसी गिरफ्तार। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

एनई रेलवे के कर्मचारियों ने 13 सिंतबर को हुई प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक की गिरफ्तारी से सबक नहीं लिया। इसी कारण दूसरी बार 14 दिसंबर को चीफ ओएस भी रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार हो गए। इसके बाद अब जब एक साथ 66 कर्मचारियों का तबादला हुआ है। अब कर्मचारियों को इन मामलों से अधिक कार्रवाई का डर सता रहा है।

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रेलवे में सामान खरीद का अधिकार प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक कार्यालय को है। इससे संबंधित भुगतान लेखा विभाग में होता है। लेखा विभाग के चीफ ओएस की गिरफ्तारी के बाद चर्चा शुरू हो गई कि इस मामले में जल्दी ही कुछ और लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है। कहा जा रहा है कि खरीद मामले में सीबीआई की एंटी करप्शन टीम ने कई फाइलों को खंगाला है। कुछ फाइलें टीम अपने साथ भी ले गई हैं।
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बता दें कि वाराणसी की फर्म निर्मल इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर अभिनव चौबे की शिकायत पर इस बार कार्रवाई हुई है। फर्म को अप्रैल, 2023 में ट्रांसफार्मर की आपूर्ति का ठेका मिला था। कार्य के बदले करीब 17 लाख रुपये के भुगतान के लिए ऑनलाइन बिल फर्म की तरफ से दिया गया था। लेखा अनुभाग में बिल को पास कराने के लिए ओएस अशोक चौधरी ने एक बिचौलिए के माध्यम से रुपये मांगे थे। इससे पहले सितंबर में भी बिल भुगतान के लिए ही प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक ने ठेकेदार प्रणव त्रिपाठी की फाइल रोकी थी।
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इसे भी पढ़ें: रेलवे में रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार चीफ ओएस निलंबित, 66 कर्मचारियों का तबादला

जीएम की मीटिंग के बाद भी नहीं सुधरे कर्मचारी
जीएम सौम्या माथुर ने पूर्वोत्तर रेलवे का कार्य संभालते ही विभागवार समीक्षा बैठक शुरू की। हर बैठक में उनका पूरा जोर अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य व्यवहार पर होता है। फाइलें लंबित नहीं रखने का निर्देश भी जारी होता है। लेकिन, इनका कोई असर नहीं है। चर्चा है कि लेखा विभाग में ठेकेदारों की जो फाइल 10 दिन में निस्तारित हो जानी चाहिए, उसे दो से तीन महीने तक लटकाए रखा जाता है। कई बार परेशान होने पर ठेकेदार भी चुपचाप मांग पूरी कर देते हैं।
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