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रेलवे बोर्ड ने लिया ये खास फैसला, अब इस खास श्रेणी में ही होंगी भर्तियां, वजह जान लें
Thu, 26 Nov 2020 01:06 PM IST
vivek shukla
राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 26 Nov 2020 01:06 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : pixabay
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रेलवे में अब सिर्फ संरक्षा श्रेणी में ही नए पद सृजित होंगे और भर्तियां की जाएंगी। अन्य श्रेणियों के 50 प्रतिशत पदों को सरेंडर कर दिया जाएगा। यानी ये पद समाप्त हो जाएंगे। यही नहीं, दो वर्ष के सृजित पदों पर कोई भी भर्ती अब नहीं की जाएगी, ये पद फ्रीज कर दिए जाएंगे।
रेलवे बोर्ड के ज्वाइंट डायरेक्टर (मेन पॉवर प्लानिंग) अजय झा ने 24 नवंबर को सभी क्षेत्रीय रेलवे एवं सभी प्रोडेक्शन यूनिट के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर नए पद सृजन संबंधित रेलवे बोर्ड की पॉलिसी के संबंध में अवगत कराया है।
पत्र में कहा गया है कि फ्रीज किए गए पदों में सिर्फ संरक्षा श्रेणी के ही पद अगले आदेश तक सृजित किए जाएंगे। साथ ही दो वर्षों में सृजित हुए नए पदों पर भर्ती नहीं की जाएगी। हालांकि इसका प्रभाव 15 दिसंबर से होने वाली नई भर्ती प्रक्रिया पर पड़ेगा या नहीं इसका उल्लेख नहीं किया गया है।
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रेलवे बोर्ड के ज्वाइंट डायरेक्टर (मेन पॉवर प्लानिंग) अजय झा ने 24 नवंबर को सभी क्षेत्रीय रेलवे एवं सभी प्रोडेक्शन यूनिट के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर नए पद सृजन संबंधित रेलवे बोर्ड की पॉलिसी के संबंध में अवगत कराया है।
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पत्र में कहा गया है कि फ्रीज किए गए पदों में सिर्फ संरक्षा श्रेणी के ही पद अगले आदेश तक सृजित किए जाएंगे। साथ ही दो वर्षों में सृजित हुए नए पदों पर भर्ती नहीं की जाएगी। हालांकि इसका प्रभाव 15 दिसंबर से होने वाली नई भर्ती प्रक्रिया पर पड़ेगा या नहीं इसका उल्लेख नहीं किया गया है।
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पत्र में यह भी कहा गया है कि रेलवे यूनियन से समय-समय पर विचार विमर्श कर सुझाव लिया जाए। स्थायी वार्ता तंत्र की बैठक में भी रेलवे बोर्ड के निर्णय से अवगत कराया जाए।
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री विनोद कुमार राय ने बताया कि रेल हित में यह निर्णय अच्छा नहीं है। ट्रेनें बढ़ी हैं, दफ्तर बढ़ रहे हैं और रेलकर्मी नहीं रहेंगे तो काम कौन करेगा। पद सरेंडर होने से रेलकर्मियों को पदोन्नति नहीं मिलेगी। संघ इसका पुरजोर विरोध करेगा।
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री विनोद कुमार राय ने बताया कि रेल हित में यह निर्णय अच्छा नहीं है। ट्रेनें बढ़ी हैं, दफ्तर बढ़ रहे हैं और रेलकर्मी नहीं रहेंगे तो काम कौन करेगा। पद सरेंडर होने से रेलकर्मियों को पदोन्नति नहीं मिलेगी। संघ इसका पुरजोर विरोध करेगा।