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World Rabies Day: इंसान ही नहीं जानवरों में भी होता है रेबीज, एनआरसीई हिसार में होती है इसकी जांच

Thu, 28 Sep 2023 03:39 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 28 Sep 2023 03:39 PM IST
सार

 विशेषज्ञों का कहना है कि इस वायरस के प्रभाव के चलते मरीज को हाइड्रोफोबिया (पानी का डर) हो जाता है। पानी पीने या निगलने में गले या स्वरतंत्र की मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन होती है। वायरस कई गुना बढ़ कर लार ग्रंथियों में जमा हो जाते हैं।

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Rabies occurs not only in humans but also in animals
Rabies - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कुत्तों के काटने से होने वाली बीमारी रेबीज इंसानों ही नहीं जानवरों में भी होती है। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार में अब तक 20 संक्रमित जानवरों की जांच भी हो चुकी है। इस बीमारी के चलते मस्तिष्क में सूजन होता है। इसे जुनोटिक डिजीज (जानवरों से इंसानों में होने वाली बीमारी) में शामिल किया गया है। इसलिए कुत्ते, बंदर समेत किसी भी जानवर के काटने पर डॉक्टर को बताएं और जरूरत के अनुसार एंटी रेबीज का इंजेक्शन जरूर लगवाएं।
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बृहस्पतिवार को विश्व रेबीज दिवस है। दुनिया भर में हर 20 मिनट में एक व्यक्ति की मौत इस बीमारी से होती है। मरने वालों में 10 में से 4 बच्चे होते हैं। इसे देखते हुए सरकार ने इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जागरुकता कार्यक्रम शुरू किया है। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार में इस बीमारी की जांच करने वाले वैज्ञानिक डॉ. रियेश बताते हैं कि अभी जल्द ही जांच शुरू की गई है। यहां अब तक 20 जांच हो चुकी है। बीमारी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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लार ग्रंथियों में जमा होते हैं वायरस

इस बीमारी पर शोध कर रहे विशेषज्ञों का कहना है कि इस वायरस के प्रभाव के चलते मरीज को हाइड्रोफोबिया (पानी का डर) हो जाता है। पानी पीने या निगलने में गले या स्वरतंत्र की मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन होती है। वायरस कई गुना बढ़ कर लार ग्रंथियों में जमा हो जाते हैं। लार का संचय कभी-कभी मुंह में झाग पैदा कर सकता है।

तीन से चार दिन में दिखता है असर
कुत्तों और अन्य जानवरों में रेबीज के तीन चरण होते हैं। पहला चरण एक से तीन दिन में दिखता है। संक्रमित जानवर के व्यवहार में परिवर्तन आता है। दूसरा चरण उत्तेजनात्मक है, जो आमतौर पर तीन से चार दिनों तक रहता है। प्रभावित जानवर पास की किसी भी चीज को काटने का प्रयास करता है। इसके बाद संक्रमित जानवर के पिछले अंगों में पक्षाघात हो जाता है। वायरस गले और गालों में सबसे अधिक केंद्रित होता है, जिस वजह से प्रभावित जानवर के लार से उसका फैलाव अधिक होता है। अंत में श्वास रुकने के कारण मौत हो जाती है।

अगर कुत्ता काटे तो ये उपाय जरूर करें
गोरखपुर में जिले में इस महीने करीब तीन हजार लोगों को एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगा है। जुलाई और अगस्त में भी लगभग इतने ही लोगों को टीके लगाए गए थे। इसमें अधिकांश को गली के कुत्तों ने काटा था। रेबीज से बचाव के लिए काटने वाले स्थान की सफाई और फिर एंटी रेबीज का इंजेक्शन ही एकमात्र विकल्प है। अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के डॉ. रियेश ने कुछ जरूरी उपाय बताए।

  • जिस स्थान पर कुत्ते या किसी अन्य जानवर ने काटा है, उस स्थान को बहते पानी से धाेएं।
  • कटे स्थान की सफाई के लिए कपड़े धोने वाले साबुन का प्रयोग बेहतर होता है।
  • जितना जल्दी संभव हो, नजदीकी अस्पताल जाकर एंटी रेबीज का इंजेक्शन जरूर लगवाएं।
  • यह बीमारी जानवरों में भी होती है, लिहाजा गली में घूमने वाले कुत्तों, बंदरों व अन्य जानवरों से भी सावधान रहें।


 

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