चकबंदी का कमाल: चकों को बिखेर रहे और समतल को बना रहे ताल, किसानों का छलका दर्द
बनरहां नरकटहां बांध के पूरब से सड़क गांव में जाती है। दोपहर 1.10 बजे यहां मोड़ पर पीपल के पेड़ के नीचे खड़े राम नरेश और सत्यदेव चकबंदी को लेकर ही बात करते मिले। उनसे जब बात की गई तो बताया कि प्रधान प्रतिनिधि अरविंद कुमार आज पीपीगंज गए हैं। वह होते तो ज्यादा जानकारी दे देते।
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दो फसली का एक फसली दे रहे हैं। समतल जमीनों को ताल में कर दे रहे हैं। किसानों के चकों को बांधने के बजाए बिखेर रहे हैं। चकबंदी में मजाक चल रहा है। ऐसे चकबंदी होती है? यदि इस तरह से चकबंदी हुई तो खेती-किसानी कैसे होगी। किसानों को क्या फायदा मिलेगा। इसका तो हम लोग हमेशा विरोध करेंगे। ऐसा कहते हुए बुढ़ेली गांव के ब्रहमानंद ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि चकबंदी के नाम अधिकारी मनमानी कर रहे हैं।
बुढ़ेली के ही विक्रमा यादव, श्रीकृष्ण, कन्हैया यादव, रामनरेश, सत्यदेव सहित अन्य लोगों ने चकबंदी में चकों को इधर-उधर करने की बात को बेवजह बताई। इसलिए मंगलवार को जब चकबंदी टीम बुढ़ेली गांव पहुंची थी, तब लोगों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। चकबंदी में अधिकांश किसानों को नुकसान हो रहा है, क्योंकि चक के उड़ान (चक की अदला-बदली) में दो फसली जमीन को एक फसली जमीन पर कर दिया जा रहा है।
गांव के पश्चिम तरफ से रोहिन नदी बहती है। बंधा और नदी के बीच में सिर्फ गेहूं की फसल होती है, जबकि गांव और बंधे के बीच में दोनों फसल होती है। ऐसे में जिन किसानों की जमीन नदी की तरफ चली जाएगी। उनको सिर्फ एक फसल का लाभ मिल सकेगा। इसलिए किसान दो फसली लाभ मांग रहे हैं।
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जिस क्षेत्र में जमीन, उसी में बनाया जाए चक
बनरहां नरकटहां बांध के पूरब से सड़क गांव में जाती है। दोपहर 1.10 बजे यहां मोड़ पर पीपल के पेड़ के नीचे खड़े राम नरेश और सत्यदेव चकबंदी को लेकर ही बात करते मिले। उनसे जब बात की गई तो बताया कि प्रधान प्रतिनिधि अरविंद कुमार आज पीपीगंज गए हैं। वह होते तो ज्यादा जानकारी दे देते। गांव के ही रामचंद्र, सुनई, जीवन सहित अन्य लोगों ने कहा कि जो जमीन जिस क्षेत्र में है, उसी क्षेत्र में चक बनाया जाए। इसमें कोई फेर बदल न किया जाए। यदि ऐसा नहीं हो पा रहा है तो चकबंदी को निरस्त करा दिया जाए।
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ग्रामीणों के मुताबिक ताल की जमीन गाटा संख्या 666 व नदी की जमीन गाटा संख्या 131 को भूमिधर जमीन में तब्दील कर वहां चक बैठा दिया गया है। कई बार इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। चकबंदी विभाग के अधिकारी इसे गंभीरता से लेने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जो शिकायतें हो रही हैं। उनकी जांच राजस्व विभाग से कराए जाने के बजाय चकबंदी विभाग से कराई जा रही है। इस वजह से समस्या दूर नहीं हो रही।
ग्राम पंचायत की ओर से भेजा गया था प्रस्ताव
गांव में चकबंदी के लिए ग्राम पंचायत की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था। प्रधान लीलावती के प्रतिनिधि अरविंद कुमार ने बताया कि तीन महीने पहले चकबंदी के लिए प्रस्ताव सहायक चकबंदी अधिकारी को भेजा गया था। इसके बाद ही प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन इसमें काफी अनियमितता बरती जा रही है।
चकबंदी के नाम पर मजाक
अच्छी जमीन को ताल में भेज दिया
कम मालियत के जमीन की बदले अधिक जमीन दी जा रही है। अधिक मालियत की जमीन को कम किया जा रहा है। इससे किसानों को घाटा लग रहा है। अच्छी जमीन को ताल में भेज दिया गया है।:गौतम प्रसाद, ग्रामीण
चकबंदी में कम हो जा रही जमीन
हमारे पास कम जमीन है। चकबंदी में यह चार फीसदी कम हो रही है। इससे हमारा नुकसान हो रहा है। इसलिए हम चकबंदी का विरोध जता रहे हैं। :ब्रह्मानंद यादव, ग्रामीण
लोगों के इशारे पर चक अलग अलग बंट रहे
चकबंदी विभाग के कर्मचारी कुछ लोगों के इशारे पर एक साथ के चक को अलग-अलग टुकड़ों में बांट दे रहे हैं। इससे कुछ यहां तो कुछ वहां जमीन मिल रही। ऐसे में खेती कैसे हो पाएगी। :सत्यनारायण, ग्रामीण