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गोरखपुर: योजनाओं में आपदा से बचाव के कार्यों को प्राथमिकता, प्रशिक्षण कार्यक्रम में लिया गया फैसला
Tue, 08 Nov 2022 02:23 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 08 Nov 2022 02:23 PM IST
सार
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षित नायब तहसीलदार एवं उनके साथ एक युवा मास्टर प्रशिक्षक को जोड़ते हुए टीम गठित की गई। योजना निर्माण के लिए अति संवेदनशील ग्रामों का चयन किया गया। चयनित ग्राम में निर्धारित टीम द्वारा बैठक आयोजित कर योजना निर्माण की कार्रवाई की जाएगी।
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rapti river
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, मंडलीय राजस्व प्रशिक्षण विद्यालय और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को एनेक्सी भवन सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान ग्राम सभाओं को गांव की विकास योजनाओं में आपदा से बचाव कार्यों को भी प्राथमिकता देने के लिए जागरूक एवं प्रोत्साहित किया गया।
ग्राम आपदा प्रबंधन एवं जलवायु संरक्षण योजना निर्माण विषयक इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में नव चयनित 68 नायब तहसीलदार एवं 134 आपदा मित्र व सखी के साथ ही गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा अध्ययन विभाग के तहत संचालित आपदा प्रबंधन पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया। साथ ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बेसिक शिक्षा विभाग, सूचना विभाग, पंचायती राज, बाढ़ खंड, बाढ़ खंड 2, ड्रेनेज खंड, विकास, अग्निशमन विभाग, विद्युत आदि विभागों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षित नायब तहसीलदार एवं उनके साथ एक युवा मास्टर प्रशिक्षक को जोड़ते हुए टीम गठित की गई। योजना निर्माण के लिए अति संवेदनशील ग्रामों का चयन किया गया। चयनित ग्राम में निर्धारित टीम द्वारा बैठक आयोजित कर योजना निर्माण की कार्रवाई की जाएगी। ग्राम स्तरीय बैठक में संबंधित गांव के प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी, लेखपाल, अध्यापक, एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी, चौकीदार, आपदा मित्र एवं अन्य ग्राम स्तरीय कर्मचारी अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करेंगे।
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इसके लिए जिला प्रशासन की तरफ से अलग से भी सभी विभागों को दिशा निर्देश जारी किया जा रहा है। इस दौरान आपदा प्रभारी व एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह और जिला आपदा विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने आपदा का प्रभाव कम करने के लिए तैयार की जाने वाली योजनाओं से जुड़ी कई जरूरी जानकारियां दीं।
इन सूचनाओं को एकत्रित कर योजना में किया जाएगा शामिल
योजना निर्माण में मुख्य रूप से ग्राम का विवरण ग्राम की संरचना, नाजुकता व क्षमता का आकलन, ग्राम में उपलब्ध संसाधन (भौतिक एवं मानवीय), ग्राम स्तर पर संचालित किए जा रहे विकास कार्य, प्रस्तावित विकास कार्य तथा जलवायु संरक्षण के दृष्टिगत तैयार कराए जा रहे अमृत सरोवर, जल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास, पर्यावरण संरक्षण के लिए वर्तमान में तथा भविष्य में किए जाने वाले सुरक्षित पौधरोपण, फसल बीमा योजना, मुख्यमंत्री खेत खलियान दुर्घटना बीमा योजना आदि विभिन्न विषयों पर सूचना एकत्रित कर उसे ग्राम सभा की विकास योजना में शामिल किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक ग्राम के स्तर पर ग्राम आपदा प्रबंधन समिति तथा 4 सहायक समितियों का गठन भी किया जाएगा।
संपर्क मार्ग पर पानी आने से बंद करने पड़े थे तीन विद्युत स्टेशन
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड ने बताया कि बाढ़ के दौरान अप्रोच रोड पर पानी आ जाने की वजह से तीन विद्युत स्टेशन को बंद करना पड़ा था। यदि अप्रोच रोड को ऊंचा कर दिया जाए तो विद्युत आपूर्ति बाधित नहीं होगी। इसपर आपदा प्रभारी व एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि योजना बनाकर आपदा कार्यालय को योजना उपलब्ध कराएं ताकि शासन स्तर पर धन आवंटन का प्रयास किया जा सके।
23 नवंबर तक योजना बनाने का निर्देश
योजना निर्माण में ग्राम स्तर पर तैराक नाविक एवं गोताखोर चिह्नित किए जाएंगे। उन्हें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। योजना निर्माण की कार्रवाई प्रत्येक दशा में 22 से 23 नवंबर के मध्य पूरी कर लेने का निर्देश दिया गया है। इसका मूल्यांकन एवं पर्यवेक्षण एडीएम फाइनेंस खुद करेंगे।
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ग्राम आपदा प्रबंधन एवं जलवायु संरक्षण योजना निर्माण विषयक इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में नव चयनित 68 नायब तहसीलदार एवं 134 आपदा मित्र व सखी के साथ ही गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा अध्ययन विभाग के तहत संचालित आपदा प्रबंधन पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया। साथ ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बेसिक शिक्षा विभाग, सूचना विभाग, पंचायती राज, बाढ़ खंड, बाढ़ खंड 2, ड्रेनेज खंड, विकास, अग्निशमन विभाग, विद्युत आदि विभागों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षित नायब तहसीलदार एवं उनके साथ एक युवा मास्टर प्रशिक्षक को जोड़ते हुए टीम गठित की गई। योजना निर्माण के लिए अति संवेदनशील ग्रामों का चयन किया गया। चयनित ग्राम में निर्धारित टीम द्वारा बैठक आयोजित कर योजना निर्माण की कार्रवाई की जाएगी। ग्राम स्तरीय बैठक में संबंधित गांव के प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी, लेखपाल, अध्यापक, एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी, चौकीदार, आपदा मित्र एवं अन्य ग्राम स्तरीय कर्मचारी अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करेंगे।
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इसके लिए जिला प्रशासन की तरफ से अलग से भी सभी विभागों को दिशा निर्देश जारी किया जा रहा है। इस दौरान आपदा प्रभारी व एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह और जिला आपदा विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने आपदा का प्रभाव कम करने के लिए तैयार की जाने वाली योजनाओं से जुड़ी कई जरूरी जानकारियां दीं।
इन सूचनाओं को एकत्रित कर योजना में किया जाएगा शामिल
योजना निर्माण में मुख्य रूप से ग्राम का विवरण ग्राम की संरचना, नाजुकता व क्षमता का आकलन, ग्राम में उपलब्ध संसाधन (भौतिक एवं मानवीय), ग्राम स्तर पर संचालित किए जा रहे विकास कार्य, प्रस्तावित विकास कार्य तथा जलवायु संरक्षण के दृष्टिगत तैयार कराए जा रहे अमृत सरोवर, जल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास, पर्यावरण संरक्षण के लिए वर्तमान में तथा भविष्य में किए जाने वाले सुरक्षित पौधरोपण, फसल बीमा योजना, मुख्यमंत्री खेत खलियान दुर्घटना बीमा योजना आदि विभिन्न विषयों पर सूचना एकत्रित कर उसे ग्राम सभा की विकास योजना में शामिल किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक ग्राम के स्तर पर ग्राम आपदा प्रबंधन समिति तथा 4 सहायक समितियों का गठन भी किया जाएगा।
संपर्क मार्ग पर पानी आने से बंद करने पड़े थे तीन विद्युत स्टेशन
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड ने बताया कि बाढ़ के दौरान अप्रोच रोड पर पानी आ जाने की वजह से तीन विद्युत स्टेशन को बंद करना पड़ा था। यदि अप्रोच रोड को ऊंचा कर दिया जाए तो विद्युत आपूर्ति बाधित नहीं होगी। इसपर आपदा प्रभारी व एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि योजना बनाकर आपदा कार्यालय को योजना उपलब्ध कराएं ताकि शासन स्तर पर धन आवंटन का प्रयास किया जा सके।
23 नवंबर तक योजना बनाने का निर्देश
योजना निर्माण में ग्राम स्तर पर तैराक नाविक एवं गोताखोर चिह्नित किए जाएंगे। उन्हें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। योजना निर्माण की कार्रवाई प्रत्येक दशा में 22 से 23 नवंबर के मध्य पूरी कर लेने का निर्देश दिया गया है। इसका मूल्यांकन एवं पर्यवेक्षण एडीएम फाइनेंस खुद करेंगे।