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गोविवि: शिक्षक संघ चुनाव के लिए अध्यक्ष ने कुलपति को लिखा पत्र, कहा- सप्ताह भर में चुनाव अधिकारी नामित करें, वरना इस्तीफा दूंगा
Thu, 24 Jun 2021 03:58 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 24 Jun 2021 03:58 PM IST
सार
चुनाव अधिकारी नामित न होने पर शिक्षक महासभा चुनाव कराने के लिए स्वतंत्र।
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DDU Gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ के चुनाव के बारे में हलचल तेज हो गई है। खुद अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने पहल करते हुए संगठन के चुनाव के लिए कुलपति को पत्र लिखकर चुनाव अधिकारी नियुक्त करने की मांग की है। सप्ताह भर में चुनाव अधिकारी नियुक्त नहीं करने पर इस्तीफा देने की बात कही है। साथ ही कहा है कि शिक्षक नियमावली के अनुसार शिक्षक महासभा चुनाव अधिकारी नामित कर चुनाव कराने के लिए स्वतंत्र होगी।
दरअसल, शिक्षक संघ का चुनाव साल 2017 में हुआ था। चुनी गई कार्यकारिणी का कार्यकाल एक वर्ष का होता है। इस हिसाब से एक वर्ष बाद शिक्षक संघ का कार्यकाल समाप्त हो गया, लेकिन इसके बाद चुनाव नहीं हो सका। संघ के निवर्तमान महामंत्री प्रो उमेश यादव ने इस मामले को उठाया था। उन्होंने कुलपति से चुनाव कराने की मांग की थी।
अपने पत्र में कहा था कि गठित कार्यकारिणी 31 जुलाई 2018 को भंग हो चुकी है। इससे शिक्षकों का हित प्रभावित हो रहा है। 23 जून 2021 को अध्यक्ष प्रो विनोद सिंह ने कुलपति को पत्र लिखकर पहल की है। प्रो सिंह ने यह भी कहा है कि मैं पूर्व में आपसे मौखिक एवं लिखित रूप में विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी नामित करने का अनुरोध कर चुका हूं।
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दरअसल, शिक्षक संघ का चुनाव साल 2017 में हुआ था। चुनी गई कार्यकारिणी का कार्यकाल एक वर्ष का होता है। इस हिसाब से एक वर्ष बाद शिक्षक संघ का कार्यकाल समाप्त हो गया, लेकिन इसके बाद चुनाव नहीं हो सका। संघ के निवर्तमान महामंत्री प्रो उमेश यादव ने इस मामले को उठाया था। उन्होंने कुलपति से चुनाव कराने की मांग की थी।
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अपने पत्र में कहा था कि गठित कार्यकारिणी 31 जुलाई 2018 को भंग हो चुकी है। इससे शिक्षकों का हित प्रभावित हो रहा है। 23 जून 2021 को अध्यक्ष प्रो विनोद सिंह ने कुलपति को पत्र लिखकर पहल की है। प्रो सिंह ने यह भी कहा है कि मैं पूर्व में आपसे मौखिक एवं लिखित रूप में विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी नामित करने का अनुरोध कर चुका हूं।
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गुआक्टा की मांग पर अनुग्रह राशि देने पर सवाल
पूर्व कुलपति के समय में भी मैंने शिक्षक संघ के चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी की मांग की थी। अब मैं आपसे तत्काल शिक्षक संघ चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी नामित करने का अनुरोध करता हूं। यदि एक सप्ताह के भीतर चुनाव अधिकारी नहीं नामित किया जाता है तो मुझे विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि शिक्षक संघ का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। वह अस्तित्व में ही नहीं है। मुझे अभी कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो विनोद कुमार सिंह ने हाल ही में कोरोना से दिवंगत हुए दो शिक्षकों के परिवार को अनुग्रह राशि देने के लिए आवेदन मांगने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मैंने शिक्षक संघ अध्यक्ष के रूप में दोनों शिक्षकों के परिवारों के लिए शिक्षक कल्याण निधि से पहले से नियत एक-एक लाख रुपये की धनराशि की मांग की थी। इस पर टिप्पणी लिखी गई कि आवेदन दिवंगत शिक्षकों की पत्नियों की ओर से आना चाहिए। जबकि, गुआक्टा पदाधिकारियों के आवेदन पर महाविद्यालयों में दिवंगत दो शिक्षकों के परिवार के लिए नियत धनराशि अवमुक्त कर दिया। यह व्यवहार अत्यंत चौंकाने व दु:ख पहुंचाने वाला है। विश्वविद्यालय के शिक्षक भी इस कृत्य से मर्माहत हैं।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि शिक्षक संघ का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। वह अस्तित्व में ही नहीं है। मुझे अभी कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो विनोद कुमार सिंह ने हाल ही में कोरोना से दिवंगत हुए दो शिक्षकों के परिवार को अनुग्रह राशि देने के लिए आवेदन मांगने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मैंने शिक्षक संघ अध्यक्ष के रूप में दोनों शिक्षकों के परिवारों के लिए शिक्षक कल्याण निधि से पहले से नियत एक-एक लाख रुपये की धनराशि की मांग की थी। इस पर टिप्पणी लिखी गई कि आवेदन दिवंगत शिक्षकों की पत्नियों की ओर से आना चाहिए। जबकि, गुआक्टा पदाधिकारियों के आवेदन पर महाविद्यालयों में दिवंगत दो शिक्षकों के परिवार के लिए नियत धनराशि अवमुक्त कर दिया। यह व्यवहार अत्यंत चौंकाने व दु:ख पहुंचाने वाला है। विश्वविद्यालय के शिक्षक भी इस कृत्य से मर्माहत हैं।