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Gorakhpur News: शब-ए-मेराज में हुई इबादत, मांगी मगफिरत की दुआ
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- इसी रात अर्श पर गए थे पैगंबर मुहम्मद साहब, तोहफे में मिली थी पांच वक्त की नमाज
- जुमा की तकरीर में बताई गई रात की अहमियत
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शब-ए-मेराज शुक्रवार को जिले में अदब और एहतराम के साथ मनाई गई। मस्जिद के साथ घरों में सारी रात इबादत में लोग मशगूल रहे। कुरआन-ए-पाक की तिलावत की गई। कजा नमाज, सलातुल तस्बीह व अन्य नफ्ल नमाजें पढ़ी गईं। मस्जिद व घरों में अल्लाह व पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जिक्र होता रहा। दुरूद ओ सलाम का नजराना पेश किया गया।
वहीं, दोपहर में जुमा की नमाज से पहले तकरीर में उलमा किराम ने रात की अहमियत बयान की। कहा कि यह वही मुबारक रात है जब पैगंबरे इस्लाम सात आसमानों के पार अर्श-ए-आजम से आगे ला मकां में अल्लाह के दीदार व मुलाकात से सरफराज हुए और तोहफे में पांच वक्त की नमाज मिली। मदीना मस्जिद रेती चौक के इमाम मुफ्ती मेराज अहमद कादरी व शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि शब-ए-मेराज का वाकया पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब का अजीम मोजजा है। मेराज शरीफ में पैगंबरे इस्लाम बैतुल मकदिस में पहुंचे। बुराक से नीचे उतरे और अपनी सवारी को उसी स्थान पर बांधा जहां अन्य पैगंबर बांधा करते थे, फिर मस्जिद-ए-अक्सा के अंदर चले गए और सारे पैगंबरों व फरिश्तों को जमात से नमाज पढ़ाई, फिर हजरत जिब्रईल के साथ आसमान-ए-दुनिया की सैर को गए। सिदरतुल मुंतहा के बाद का सफर पैगंबरे इस्लाम ने स्वयं से तय किया। पचास वक्त की नमाज में कमी कराने के लिए कई बार अल्लाह से इल्तेजा की। अल्लाह से अपनी उम्मत के लिए बख्शिश का वादा लिया।
नूरी मस्जिद अहमदनगर चक्शा हुसैन, गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर व जामा मस्जिद रसूलपुर में भी महफिल हुई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत की गई। हम्द, नात व कसीदा पेश किया गया। अल्लाह व रसूल का जिक्र हुआ। अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई।
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- जुमा की तकरीर में बताई गई रात की अहमियत
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शब-ए-मेराज शुक्रवार को जिले में अदब और एहतराम के साथ मनाई गई। मस्जिद के साथ घरों में सारी रात इबादत में लोग मशगूल रहे। कुरआन-ए-पाक की तिलावत की गई। कजा नमाज, सलातुल तस्बीह व अन्य नफ्ल नमाजें पढ़ी गईं। मस्जिद व घरों में अल्लाह व पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जिक्र होता रहा। दुरूद ओ सलाम का नजराना पेश किया गया।
वहीं, दोपहर में जुमा की नमाज से पहले तकरीर में उलमा किराम ने रात की अहमियत बयान की। कहा कि यह वही मुबारक रात है जब पैगंबरे इस्लाम सात आसमानों के पार अर्श-ए-आजम से आगे ला मकां में अल्लाह के दीदार व मुलाकात से सरफराज हुए और तोहफे में पांच वक्त की नमाज मिली। मदीना मस्जिद रेती चौक के इमाम मुफ्ती मेराज अहमद कादरी व शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि शब-ए-मेराज का वाकया पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब का अजीम मोजजा है। मेराज शरीफ में पैगंबरे इस्लाम बैतुल मकदिस में पहुंचे। बुराक से नीचे उतरे और अपनी सवारी को उसी स्थान पर बांधा जहां अन्य पैगंबर बांधा करते थे, फिर मस्जिद-ए-अक्सा के अंदर चले गए और सारे पैगंबरों व फरिश्तों को जमात से नमाज पढ़ाई, फिर हजरत जिब्रईल के साथ आसमान-ए-दुनिया की सैर को गए। सिदरतुल मुंतहा के बाद का सफर पैगंबरे इस्लाम ने स्वयं से तय किया। पचास वक्त की नमाज में कमी कराने के लिए कई बार अल्लाह से इल्तेजा की। अल्लाह से अपनी उम्मत के लिए बख्शिश का वादा लिया।
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नूरी मस्जिद अहमदनगर चक्शा हुसैन, गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर व जामा मस्जिद रसूलपुर में भी महफिल हुई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत की गई। हम्द, नात व कसीदा पेश किया गया। अल्लाह व रसूल का जिक्र हुआ। अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई।
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