Eid Ul-Fitr 2023: नमाजियों ने मांगी भाईचारे व तरक्की की दुआ, मस्जिदों में उमड़े नमाजी
पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दरूदो सलाम का नजराना पेश किया। अलविदा जुमा या जुमातुल विदा के मौके पर ईद जैसा माहौल नजर आया। जुमा की नमाज से पहले अलविदा का खुतबा पढ़ा गया। उसमें रमजान के फजाइल बयान किए गए।
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माह-ए-रमजान के अलविदा जुमा की नमाज शहर की सभी मस्जिदों में दोपहर साढ़े बारह बजे से लेकर ढाई बजे तक अदा की गई। खुसूसी रूप से अमनो-अमान, भाईचारे, मुल्क की तरक्की की दुआ मांगी गई। मुसलमानों के चेहरे पर माह-ए-रमजान के जाने का गम साफ नजर आया।
इससे पहले मुस्लिम घरों में लोग सुबह उठकर अलविदा की तैयारी में जुट गए। मस्जिदों व घरों में साफ-सफाई शुरू होने लगी। लोगों ने जुमा का गुस्ल किया। नहा धोकर नए कपड़े पहन सिर पर टोपी लगाई और मस्जिद पहुंच गए। बच्चे, बुजुर्ग, नौजवान सभी का मकसद पहली कतार में जगह पाना रहा। जिसको जहां जगह मिली वहीं पर बैठकर अल्लाह की इबादत शुरू की। अजान होने से पहले ही मस्जिदें भरनी शुरू हो गईं।
सभी मस्जिदों में खचाखच भीड़ रही। जब मस्जिदें भर गईं तो लोगों ने मस्जिद की छतों पर जगह ली। मस्जिद कमेटी ने नमाजियों की बड़ी तादाद के मद्देनजर चटाई, दरी, टोपी, वजू के लिए पानी आदि का इंतजाम किया था। रोजेदारों ने अलविदा के दिन सलातुल तस्बीह की नमाज पढ़ी, कुरआन-ए-पाक की तिलावत की।
पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दरूदो सलाम का नजराना पेश किया। अलविदा जुमा या जुमातुल विदा के मौके पर ईद जैसा माहौल नजर आया। जुमा की नमाज से पहले अलविदा का खुतबा पढ़ा गया। उसमें रमजान के फजाइल बयान किए गए। जुमा की दो रकात फर्ज नमाज इमाम ने पढ़ाई। इमाम ने खुसूसी दुआ मांगी। फिर सुन्नत व नफ्ल नमाज का दौर शुरू हुआ।
अंत में सभी ने पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में सलातो-सलाम पेश किया। अलविदा के मौके पर घरों में महिलाओं ने नमाज, तिलावत-ए-कुरआन व तस्बीह कर अल्लाह से दुआ मांगी। शाम में रोजेदार इफ्तारी की तैयारी में जुट गए। इफ्तार का समय होने पर सभी ने मिलकर रोजा इफ्तार किया। अल्लाह से अपने लिए खैर की दुआ मांगी। पूरा अलविदा अल्लाह की इबादत व दुआ मांगने में बीता। इसी के साथ 29वां रोजा मुकम्मल हो गया।
इमामों ने पढ़ाई अलविदा जुमा की नमाज
मुकीम शाह जामा मस्जिद बुलाकीपुर में मौलाना फिरोज अहमद निजामी, मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी, दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल में मुफ्ती मुनव्वर रजा, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में हाफिज रहमत अली निजामी, मस्जिद खादिम हुसैन तिवारीपुर में कारी अफजल बरकाती, नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में मौलाना मो. असलम रजवी, सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में मौलाना अली अहमद, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी, गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर में मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी आदि ने रमजानुल मुबारक के अंतिम जुमा की नमाज पढ़ाईं।
अलविदा की तकरीर में उलमा किराम ने दी नसीहत
रमजानुल मुबारक के अंतिम जुमा (अलविदा) में उलमा किराम ने अवाम की खूब नसीहत की। मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने कहा कि आपसी भाईचारा को कायम रखें। फित्रा व जकात की रकम जल्द निकाल हकदारों को दें। गुनाहों से तौबा करें।
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मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह में मौलाना जहांगीर अहमद ने कहा कि ईद की रात को गफलत में न गुजारें बल्कि इबादत करें, बुराई से दूर रहे हैं। नाम के मुसलमान न बनें बल्कि कुरआन व हदीस के मुताबिक मुसलमान बनें। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि ईद कोई मजहबी त्योहार ही नहीं है बल्कि यह इंसानियत का भी त्योहार है।
चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में नायब काजी मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि रोजा रखना सिर्फ भूखे रहना ही नहीं है, बल्कि उन हजारों-लाखों गरीबों की भूख का एहसास करना है जो भूखे रहने को मजबूर हैं। मुकीम शाह जामा मस्जिद बुलाकीपुर में मौलाना फिरोज अहमद निजामी ने कहा कि ईद की खुशियों में सबको शामिल कीजिए।