{"_id":"65027da67c4e51d5df0f311c","slug":"pranab-who-got-railway-officer-caught-is-also-tainted-went-to-jail-for-extorting-money-from-doctor-2023-09-14","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: रेलवे अफसर को पकड़वाने वाला प्रणव भी दागी... डॉक्टर के करीब जाकर किया ये गलत काम, दरोगा ने दिया था साथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: रेलवे अफसर को पकड़वाने वाला प्रणव भी दागी... डॉक्टर के करीब जाकर किया ये गलत काम, दरोगा ने दिया था साथ
Thu, 14 Sep 2023 09:50 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 14 Sep 2023 09:50 AM IST
सार
पूर्वोंत्तर रेलवे, गोरखपुर में तैनात प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक (प्रिंसिपल चीफ मैटीरियल मैनेजर) केसी जोशी को सीबीआई ने मंगलवार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ जेम पोर्टल के जरिए रेलवे का टेंडर हासिल करने वाली फर्म के मालिक ने सात लाख रुपये रिश्वत मांगने की शिकायत की थी।
विज्ञापन
पूर्वोत्तर रेलवे के उप मुख्य सामग्री प्रबंधक सामान्य भंडार में छानबीन करती सीबीआई।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक केसी जोशी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाने वाले प्रणव त्रिपाठी के दामन में भी दाग लगे हैं। शहर के अलहदादपुर मोहल्ले का प्रणव शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रामशरण श्रीवास्तव से आठ लाख रुपये की रंगदारी वसूलने की साजिश में जेल जा चुका है।
तब भी वह चर्चा में था, अब एक भ्रष्टाचारी अफसर को पकड़वाने के बाद सुर्खियों में है। दोनों ही मामलों में एक समानता भी है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक जिसका वह करीबी रहा है, उसी से नहीं पटी। प्रणव, डॉक्टर का करीबी होकर गलत काम में पड़ा था और जेल गया था।
इस बार भी चर्चा यही है कि ठेके को लेकर वह लंबे समय से प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक केसी जोशी के संपर्क में था। यही वजह थी कि उसके पास सटीक जानकारी थी कि रुपये कहां से बरामद हो सकते हैं। फिर रिश्तों में खटास आने के बाद शिकायत की। लेकिन इस बार उसके इस कदम से एक भ्रष्टाचारी अफसर पकड़ा गया।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक, अलहदादपुर में रहने वाले राजेंद्र त्रिपाठी का बेटा प्रणव त्रिपाठी खुद को एक लोकल न्यूज चैनल का पत्रकार बताता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 21 मई 2019 को प्रणव और उसके करीबी मित्र रहे तत्काल चौकी इंचार्ज ट्रांसपोर्टनगर शिव प्रकाश सिंह ने मिलकर रंगदारी वसूलने की साजिश रची थी।
विज्ञापन
तब भी वह चर्चा में था, अब एक भ्रष्टाचारी अफसर को पकड़वाने के बाद सुर्खियों में है। दोनों ही मामलों में एक समानता भी है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक जिसका वह करीबी रहा है, उसी से नहीं पटी। प्रणव, डॉक्टर का करीबी होकर गलत काम में पड़ा था और जेल गया था।
विज्ञापन
इस बार भी चर्चा यही है कि ठेके को लेकर वह लंबे समय से प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक केसी जोशी के संपर्क में था। यही वजह थी कि उसके पास सटीक जानकारी थी कि रुपये कहां से बरामद हो सकते हैं। फिर रिश्तों में खटास आने के बाद शिकायत की। लेकिन इस बार उसके इस कदम से एक भ्रष्टाचारी अफसर पकड़ा गया।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक, अलहदादपुर में रहने वाले राजेंद्र त्रिपाठी का बेटा प्रणव त्रिपाठी खुद को एक लोकल न्यूज चैनल का पत्रकार बताता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 21 मई 2019 को प्रणव और उसके करीबी मित्र रहे तत्काल चौकी इंचार्ज ट्रांसपोर्टनगर शिव प्रकाश सिंह ने मिलकर रंगदारी वसूलने की साजिश रची थी।
इसके लिए दोनों ने एक मनगढ़ंत नाम ज्योति सिंह का इस्तेमाल किया और टारगेट पर शहर के मशहूर डॉक्टर रामशरण श्रीवास्तव को लिया। दरअसल, प्रणव एक बार अवसाद में आ गया था और इलाज के सिलसिले में उसकी डॉक्टर से जान पहचान हुई थी।
वह जानता था कि डॉक्टर उस पर शक नहीं करेंगे, शुरुआत में हुआ भी यही। चौकी इंचार्ज रहे शिव प्रकाश सिंह ने डॉक्टर को फोन किया। बताया कि, ज्योति सिंह नाम की एक लड़की ने उनके खिलाफ दुष्कर्म का आरोप लगाया है।
मामला गंभीर है, तत्काल आइए। सम्मानित डॉक्टर होने की वजह से उन्होंने पहले तो सफाई दी, लेकिन फिर पुलिस की घुड़की सुनकर चले आए। फिर कूटरचित प्रार्थना पत्र को दिखाया गया और धमकाकर आठ लाख रुपये वसूल लिए गए। डॉक्टर ने रकम तो दे दी, लेकिन घर जाने पर यह सोचने लगे कि उनके क्लीनिक पर सीसीटीवी कैमरा लगा है और वह गलत नहीं हैं तो फिर क्यों डरें।
पूरे घटनाक्रम की जानकारी उन्होंने आईएमए को दी और फिर एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गोरखपुर में आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जाकर सीधे मिले। डॉक्टर को मुख्यमंत्री भी जानते थे। तत्काल जांच का आदेश दिया गया और ट्रेनी आईपीएस रहे रोहन प्रमोद बोत्रे ने जांच कर रिपोर्ट दी।
फिर राजघाट थाने में आरोपी चौकी इंचार्ज शिव प्रकाश सिंह, कथित पत्रकार प्रणव त्रिपाठी और ज्योति सिंह के खिलाफ रंगदारी वसूलने, जालसाजी करने, धमकी देने सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया।
पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजा। जांच में पता चला कि ज्योति सिंह नाम की कोई युवती है ही नहीं, सब मनगढ़ंत कहानी थी। तब जांच के आधार पर 10 अक्तूबर 2019 को पुलिस ने आरोपी बनाते हुए चार्जशीट दाखिल कर दी।
मामला न्यायालय में प्रचलित है। इसके बाद एक बार फिर प्रणव त्रिपाठी सुर्खियों में आया है। अब वह ठेकेदार बनकर सामने आया है। उसने सीबीआई के एंटी करप्शन ब्यूरो में भ्रष्टाचारी अधिकारी के खिलाफ शिकायत की, जिसके आधार पर बड़ा खुलासा हुआ है।