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आज मनाया जाएगा प्रकाशपर्व, इस खास वजह से टूट जाएगी 95 वर्षों से चली आ रही परंपरा
Mon, 30 Nov 2020 09:34 AM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 30 Nov 2020 09:34 AM IST
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प्रकाशपर्व की पूर्व संध्या जटाशंकर गुरुद्वारा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल लोग।
- फोटो : अमर उजाला।
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सिख संगत सोमवार को जटाशंकर गुरुद्वारे में श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व श्रद्धा पूर्वक मनाएगी। वहीं कोरोना महामारी के चलते इस बार नगर कीर्तन नहीं निकाला जाएगा। इस तरह पिछले 95 वर्षों से चली आ रही परंपरा का इस बार निर्वहन नहीं हो पाएगा। इसी तरह पंगत में बैठकर संगत लंगर का भी आनंद नहीं ले सकेगी।
गुरुद्वारा परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग के बीच शबद कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। जटाशंकर गुरुद्वारा प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओें की संख्या के मद्देनजर परिसर का सैनिटाइजेशन कराया है। थर्मल स्कैनिंग के बाद ही किसी श्रद्धालु को परिसर में प्रवेश मिलेगा। मास्क लगाना अनिवार्य होगा।
ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाने के लिए गुरुद्वारों में एक साथ पंगत में बैठकर लंगर छका जाता है। हजारों वर्षों की यह परंपरा भी कोरोना संकट की वजह से टूट जाएगी। जटाशंकर प्रबंधक समिति ने मानवता के कल्याणार्थ इस वर्ष पैक्ड लंगर बांटने का फैसला किया है।
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गुरुद्वारा परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग के बीच शबद कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। जटाशंकर गुरुद्वारा प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओें की संख्या के मद्देनजर परिसर का सैनिटाइजेशन कराया है। थर्मल स्कैनिंग के बाद ही किसी श्रद्धालु को परिसर में प्रवेश मिलेगा। मास्क लगाना अनिवार्य होगा।
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ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाने के लिए गुरुद्वारों में एक साथ पंगत में बैठकर लंगर छका जाता है। हजारों वर्षों की यह परंपरा भी कोरोना संकट की वजह से टूट जाएगी। जटाशंकर प्रबंधक समिति ने मानवता के कल्याणार्थ इस वर्ष पैक्ड लंगर बांटने का फैसला किया है।
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मानवता का संदेश देती है गुरु नानक जी की सीख
सोनी साहनी ने बताया कि मानवता से प्यार करने वाले हर शख्स को गुरु नानक देव जी के संदेशों से प्रेरणा मिलती है। मेरी गहरी आस्था है। जटाशंकर गुरुद्वारा में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती हूं।
पूरे साल रहता है इंतजार
परमजीत कौर ने बताया कि पूरे साल बाबा जी के प्रकाशपर्व का इंतजार रहता है। मांगी हुई मुरादें पूरी होती हैं। बाबा जी के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता है।
दिवाली से कम नहीं है प्रकाश पर्व का उल्लास
बैंक कॉलोनी की चरनप्रीत सिंह ने बताया कि गुरुनानक देव जी ने अपना पूरा जीवन हिंदू और इस्लाम धर्म की उन अच्छी बातों के प्रचार में लगाया जो समस्त मानव समाज के लिए कल्याणकारी हैं। प्रकाश पर्व का उल्लास दिवाली से कम नहीं है।
पूरे साल रहता है इंतजार
परमजीत कौर ने बताया कि पूरे साल बाबा जी के प्रकाशपर्व का इंतजार रहता है। मांगी हुई मुरादें पूरी होती हैं। बाबा जी के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता है।
दिवाली से कम नहीं है प्रकाश पर्व का उल्लास
बैंक कॉलोनी की चरनप्रीत सिंह ने बताया कि गुरुनानक देव जी ने अपना पूरा जीवन हिंदू और इस्लाम धर्म की उन अच्छी बातों के प्रचार में लगाया जो समस्त मानव समाज के लिए कल्याणकारी हैं। प्रकाश पर्व का उल्लास दिवाली से कम नहीं है।
सेवा और शांति के प्रतीक हैं गुरुनानक देव
साहबगंज के अरशद जमाल सामानी ने बताया कि गुरु नानक देव जी को शांति और सेवा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। एक कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान आस्था जगी थी। अब गुरुद्वारा में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में खिंचा चला आता हूं।
गुरु नानक देव ने हर भेदभाव को मिटाया
एमजी इंटर कॉलेज के प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गुरुनानक देव जी ने समाज से ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाया। वह हमेशा वंचितों के साथ खड़े रहे। अछूत समझे जाने वाले लोगों के यहां ठहरते रहे। उनके हाथों से भोजन किया।
मन को मिलती है शांति
मोहद्दीपुर के अरविंदर सिंह ने बताया कि गुरु नानक देव जी सिखों के पहले आदि गुरु हैं। वे अंधविश्वास और आडंबरों के विरोधी थे। उनके चरणों में सिर झुकाने पर मन को शांति मिलती है।
गुरु नानक देव ने हर भेदभाव को मिटाया
एमजी इंटर कॉलेज के प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गुरुनानक देव जी ने समाज से ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाया। वह हमेशा वंचितों के साथ खड़े रहे। अछूत समझे जाने वाले लोगों के यहां ठहरते रहे। उनके हाथों से भोजन किया।
मन को मिलती है शांति
मोहद्दीपुर के अरविंदर सिंह ने बताया कि गुरु नानक देव जी सिखों के पहले आदि गुरु हैं। वे अंधविश्वास और आडंबरों के विरोधी थे। उनके चरणों में सिर झुकाने पर मन को शांति मिलती है।