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Gorakhpur News: सोशल मीडिया को पुलिस बनाएगी सहारा, 'लावारिस' शवों को उनके 'वारिस' तक पहुंचाने में बनाएगी सीढ़ी
Mon, 01 Jul 2024 11:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jul 2024 11:12 AM IST
सार
जिले में मिले लावारिस शवों की पहचान कराने के लिए पुलिस अभियान चलाएगी। इसके लिए सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों की मदद ली जाएगी। शासन की ओर से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि पहले चरण में जून 2023 से जून 2024 के बीच मिले अज्ञात शवों के संबंध में समीक्षा करते हुए कार्रवाई की जाएगी।
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- फोटो : istock
विस्तार
जिले में मिले लावारिस शवों की पहचान कराने के लिए पुलिस अभियान चलाएगी। इसके लिए सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों की मदद ली जाएगी। शासन की ओर से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि पहले चरण में जून 2023 से जून 2024 के बीच मिले अज्ञात शवों के संबंध में समीक्षा करते हुए कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में हर साल औसतन 10 से 12 लावारिस शव मिलते हैं। इनमें मानसिक रोगियों सहित अन्य के शव शामिल रहते हैं। ऐसे शव मिलने पर 72 घंटे बाद पुलिस धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार कराती है।
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इनकी पहचान के लिए उसकी फोटो और विवरण डीसीआरबी के जरिए आसपास के जनपदों के थानों से लेकर अन्य जिलों में भेजा जाता है। सार्वजनिक स्थानों रेलवे स्टेशन, कचहरी, थाना परिसर सहित अन्य जगहों पर पोस्टर चस्पा कराया जाता है।
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मृतक के मानसिक रोगी होने की दशा में पुलिस ज्यादा परेशान नहीं होती है, लेकिन हत्या करके फेंके गए शवों के मामले में हत्या का केस दर्ज होता है। इसकी विवेचना लंबे समय तक लंबित रहती है। ऐसे मामलों के निस्तारण, शवों की पहचान कराकर कातिलों तक पहुंचने के लिए जिले में अभियान चलाने की तैयारी एसएसपी ने की है।
एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि पूर्व में मिले लावारिस शवों की पहचान कराने के लिए अभियान चलाया जाएगा। पहले चरण में जून 2023 से लेकर जून 2024 तक मिले शवों के संबंध में अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा करके दोबारा गश्ती जारी की जाएगी।