फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Police released nephews of Mafia Vinod raided houses of relatives

माफियाओं का खेल होगा खत्म: बैंक खाते खंगालकर पुलिस खोलेगी पूरा वसूली तंत्र, रिश्तेदारों के घर दबिश जारी

Fri, 02 Jun 2023 12:44 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: vivek shukla Updated Fri, 02 Jun 2023 12:44 PM IST
सार

एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि माफिया के खिलाफ वारंट जारी है, सभी माफियाओं के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उनके अवैध कारोबार के बारे में जानकारी कर तथ्य के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सभी माफिया के बैंक खातों की भी पुलिस डिटेल जुटा रही है।

विज्ञापन
Police released nephews of Mafia Vinod raided houses of relatives
बाएं से गोरखपुर के माफिया अजीत शाही, राकेश यादव, सुधीर सिंह और विनोद उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

यूपी के बदमाशों की टॉप सूची में शामिल माफिया विनोद उपाध्याय को पकड़ने में पुलिस को नाकामी हाथ लगी है। पुलिस ने विनोद के भतीजों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया है। रिश्तेदारों के घर दबिश दी, लेकिन माफिया और उसके भाई संजय का कोई सुराग नहीं मिला है।

विज्ञापन


उधर, सिंचाई विभाग के दो इंजीनियरों से पूछताछ के बाद अब सभी माफिया के खातों का रिकॉर्ड पुलिस जुटा रही है। ताकि यह पता चल सके कि ठेके के खेल में अंडरग्राउंड होकर कौन-कौन से माफिया सक्रिय हैं और सरकारी विभागों के अधिकारी उन्हें क्या लाभ पहुंचा रहे हैं। पूरे वसूली तंत्र का खुलासा करने की तैयारी जोरों पर है।
विज्ञापन


माफिया विनोद उपाध्याय और उसका भाई संजय उपाध्याय रंगदारी के मामले में फरार हैं। दोनों पर एसएसपी ने 25 हजार का इनाम भी घोषित किया है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने विनोद उपाध्याय के शाहपुर स्थित आवास पर दबिश दी थी और उसके दो भतीजे को हिरासत में लेकर देवरिया स्थित उसके ससुराल भी गई थी। भतीजों से पूछताछ के बाद पुलिस ने कई रिश्तेदारों का नाम पता हासिल किया है, जिसके बाद घर पर पुलिस ने दबिश दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पुलिस ने इस बीच दो इंजीनियर और एक प्रॉपर्टी डीलर से भी पूछताछ की है, जिसमें कई अहम जानकारियां हासिल हुई हैं। पुलिस माफिया विनोद उपाध्याय, राकेश यादव, सुधीर सिंह और अजीत शाही के बैंक खातों की जांच कराएगी। बैंक के जरिए पुलिस इस बात का सबूत जुटाएगी की किस-किस से लेनदेन हुआ है और किस-किस मद में कहां-कहां से खातों में रुपये आए हैं।

इसे भी पढ़ें: माफिया पर कार्रवाई के लिए एसपी स्तर के अफसर बनाए गए नोडल, जेल भेजने से लेकर सजा तक की तय की गई जिम्मेदारी
 

माफिया विनोद की तलाश में देवरिया और लखनऊ पहुंची पुलिस

माफिया विनोद उपाध्याय और उसके भाई संजय की तलाश में क्राइम ब्रांच और गुलरिहा थाना पुलिस देवरिया के साथ ही लखनऊ में भी छापा मार रही है। गिरोह के कई सदस्य के साथ ही परिवार के लोग पुलिस की हिरासत में हैं। संभावित ठिकानों पर छापा तेज होने के बाद माफिया के रिश्तेदारों ने भी घर छोड़ दिए हैं। बताया जा रहा है कि क्राइम ब्रांच की टीम दो दिन से लखनऊ में विनोद के संभावित ठिकानों पर पहुंची है।

स्थानीय पुलिस की मदद से कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि सर्विलांस की मदद से यह जानकारी मिली है कि विनोद अपने परिजनों से इंटरनेट काल के जरिये बात करता था। हिरासत में लिए गए भतीजों से पुलिस ने इस बारे में पूछा तो उन्होंने स्वीकार किया है। इसके अलावा कई रिश्तेदारों ने इस बात की पुष्टि की है।

इसे भी पढ़ें: गोरखपुर में सीलिंग की जमीन का खेल, जरा सा चूके तो आशियाने का सपना हो जाएगा फेल

विश्वविद्यालय के स्टेडियम निर्माण में भी वसूली थी रंगदारी
माफिया विनोद उपाध्याय एक दशक से ठेके और रंगदारी में शामिल है। गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्टेडियम के निर्माण में भी माफिया ने एक ठेकेदार से रंगदारी वसूली थी। सहारनपुर जेल में रहते हुए भी माफिया का नेटवर्क चलता रहा। उसके इशारे पर गुर्गे ठेकेदारों से वसूली करते थे। ठेके में दखल के चलते ही विनोद उपाध्याय और उसके एक करीबी के बीच ठन गई थी और बाद में करीबी ने नाता तोड़कर एक राजनीतिक पार्टी का दामन थाम लिया।

जानकारों की माने तो विनोद ने रंगदारी और ठेके में दखल का नेटवर्क अपने बड़े भाई और कुछ खास करीबियों के बलबूते खड़ा किया है। गोरखपुर में जब पुलिस का दबाव बढ़ा तो उसने लखनऊ में ठिकाना बनाया और बसपा के बड़े नेताओं से संपर्क बना लिया। खबर यह भी है कि उसने सीधे तौर पर ठेका नहीं लिया। अधिकारियों पर दबाव बनाकर पहले ठेका दिलवाया और फिर कमीशन लिया। बीते पांच सालों में विनोद ने विवादित जमीनों को हड़प कर मोटी कमाई की है।

20 साल पहले छात्रसंघ चुनाव से चर्चा में आया था विनोद

करीब 20 वर्ष पहले विनोद उपाध्याय विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव के दौरान चर्चा में आया था। उस दौरान महामंत्री के एक प्रत्याशी के समर्थन में विनोद की टीम उतरी थी और नामांकन के दिन गोलघर में तमंचे से कई फायर कर अपना दबदबा कायम किया था। इसके बाद से ही विनोद का गैंग बढ़ता गया। विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष पर एक होटल में जानलेवा हमले में भी उसका नाम सामने आया।

इसे भी पढ़ें: माफिया राकेश के घर दबिश: बहुत गहरी हैं ठेके के नेटवर्क में माफिया की जड़ें, जितना खोदो सामने आ रहे कारनामे

विनोद के गिरोह में ज्यादातर धर्मशाला, असुरन और राजेंद्र नगर इलाके के मनबढ़ थे। बाद में पीडब्लूडी में ठेके को लेकर लाल बहादुर और गुड्डू से विनोद की अदावत बढ़ी। मामला बढ़ा तो एक बार दोनों तरफ से गोलियां चलीं थीं, जिसमें विनोद का एक करीबी मारा गया था। इसके बाद से विनोद ने अपनी ताकत बढ़ानी शुरू कर दी और ठेके व रंगदारी में सक्रिय हो गया।

एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि माफिया के खिलाफ वारंट जारी है, सभी माफियाओं के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उनके अवैध कारोबार के बारे में जानकारी कर तथ्य के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सभी माफिया के बैंक खातों का भी पुलिस डिटेल जुटा रही है।



 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed