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यूपी: यहां पुलिसिया कहानी को झुठला रहे हैं ये साक्ष्य, पढ़ें पूरी जानकारी

Fri, 04 Sep 2020 12:18 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 04 Sep 2020 12:18 PM IST
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Police fake story defying evidence in case of gang molested girl after abducting
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के श्यामदेउरवा से अगवा कर मानसिक रूप से कमजोर युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म को झुठलाने वाली पुलिस एडीजी दावा शेरपा के हस्तक्षेप के बाद गुरुवार को बैकफुट पर आ गई। दरोगा की तहरीर पर ही अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म की धारा में केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई है।

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युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ है या नहीं यह तो मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही तय हो पाएगा, मगर कई ऐसे साक्ष्य ऐसे हैं, जो युवती के साथ घटी घटना के संकेत कर रहे हैं। साक्ष्य अमर उजाला संवाददाता के पास मौजूद हैं। इससे साबित हो सकता है कि  युवती के साथ कोई न कोई घटना जरूर हुई है। निष्पक्ष जांच हुई तो सब कुछ सामने आ जाएगा। जिस घटना को पुलिस झुठला रही थी, उसे ये साक्ष्य आइना दिखा सकते हैं।
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पहला साक्ष्य: लड़की का बयान
घटना के बाद पुलिस के पहुंचने पर युवती ने पुलिस को दिए बयान में साफ कहा कि दो बड़े लंबे कद-काठी के लोग उसको बाइक पर जबरन बैठाकर एक मकान में ले गए जहां चार पांच लोगों ने उसके साथ गलत काम किया। वह आरोपियों का नाम तो नहीं बता पा रही थी, लेकिन अपने घर का पता बता आसानी से बता दिया था। इसके वीडियो फुटेज पुलिस और मीडिया के पास मौजूद हैं।

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दूसरा साक्ष्य: पुलिस को सूचना देने वाला युवक

पुलिस को सूचना देने वाले युवक का नाम संतोष जायसवाल है। अमर उजाला संवाददाता से संतोष ने बात भी की और कहा कि युवती अर्द्धनग्न हाल में पड़ी थी। शरीर पर चोट के काफी निशान थे। कोई पुलिस को सूचना नहीं दे रहा था। मानवता की वजह से मैं रुका और घटना की सूचना पुलिस को दी। युवती ने पुलिस को बयान भी दिया था। साफ कहा था कि वह खिड़की से बाहर देखी तो एक बड़ा मकान और पोखरा दिखाई दे रहा था। लोग उसका अपहरण कर लेकर गए थे और उसके साथ चार से पांच लोगों ने गलत काम किया था।

तीसरा साक्ष्य: स्वास्थ्य केंद्र से रेफर, मेडिकल कॉलेज में इलाज
अगर युवती के साथ कुछ हुआ ही नहीं था तो उसे भटहट स्वास्थ्य केंद्र पर प्राथमिक उपचार के लिए क्यों ले जाया गया? स्वास्थ्य केंद्र से मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड तक ले जाने की नौबत कैसे आ गई? मेडिकल कॉलेज में ओपीडी पर्ची कटवाने के बाद उसे स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भेजा गया था। साधारण चोट का इलाज इमरजेंसी में संभव है। साफ है युवती को गंभीर चोटें आई थीं। अंदरूनी चोट की वजह से ही उसे स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भेजा गया था।
 
चौथा साक्ष्य: एंबुलेंस से गई थी युवती, पुलिस ने दिया था कपड़ा
युवती को एंबुलेंस की मदद से पहले स्वास्थ्य केंद्र, फिर मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। मेडिकल कॉलेज में करीब दो घंटे वह स्त्री एवं प्रसूति विभाग में मौजूद थी। युवती के पास पहुंची भटहट पुलिस ने ही उसे कपड़ा मुहैया कराया था। यानी युवती के शरीर पर कपड़े नहीं थे।

जब महाराजगंज की श्यामदेउरवा पुलिस मेडिकल कॉलेज आई तो सब कुछ बदल गया। मामला दबाया जाने लगा। युवती को जिस एंबुलेंस से ले जाया गया था, उसमें मौजूद रवि ने बताया कि सूचना पर वह मौके पर गए थे। युवती को पहले स्वास्थ्य केंद्र, फिर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया था। युवती को चोट लगी थी।

मोबाइल नंबर से पकड़े जा सकते हैं आरोपी

पुलिस को सूचना देने वाले चश्मदीद संतोष की माने तो युवती ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि आरोपी उसके साथ दुष्कर्म करने के साथ ही शराब पी रहे थे। इसी दौरान एक आरोपी का मोबाइल उसके हाथ लग गया था। इसी मोबाइल के जरिए ही उसने अपने परिचित को फोन करके जानकारी दी थी। पुलिस अगर उस नंबर की जांच करे तो आरोपी तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।

आरोपी प्रभावशाली तो नहीं?
युवती का परिवार अब भी दबाव में है। वह खुलकर पुलिस से अपनी बात नहीं कह रहा है। इसके पीछे की वजह पुलिस को तलाशनी होगी। देखना होगा कि आरोपी कहीं प्रभावशाली तो नहीं हैं, जिसके दबाव में पीड़ित युवती का परिवार पुलिस तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

गोरखपुर पुलिस ने भी गढ़ी कहानी
महराजगंज पुलिस के खेल का साथ गोरखपुर पुलिस ने भी दिया। जब युवती के परिजन बैकफुट पर आए तो गोरखपुर पुलिस ने भी पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया, जबकि युवती गोरखपुर के भटहट क्षेत्र में फेंकी गई थी।

96 घंटे के भीतर जांच हो तो बेहतर

वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ डॉ सुषमा सिन्हा ने बताया कि रेप की पुष्टि के लिए 96 घंटे के भीतर जांच हो तो बेहतर होता है इसमें आसानी से इसकी पुष्टि हो जाती है। इसके बाद पुष्टि करने के लिए इंजरी देखी जाती है, अन्य कोई आधार नहीं बचता है इसलिए कोशिश यही होना चाहिए कि पुलिस जल्द से जल्द मेडिकल करा ले।

एडीजी जोन दावा शेरपा ने बताया कि दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध होने के बाद पीड़ित या उसके घरवाले यह नहीं तय कर सकते हैं कि कानूनी कार्रवाई चाहिए या नहीं। इस तरह के अपराध में पुलिस को तत्काल केस दर्ज करना ही पड़ेगा। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराएं, साफ हो जाएगा कि घटना हुई या नहीं। विवेचना के बाद केस दर्ज नहीं होता है। पुलिस को केस दर्ज कर कार्रवाई का आदेश दिया गया। इसमें लापरवाही पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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