{"_id":"6514898338ce241c190e8845","slug":"pms-spirit-of-panch-pran-took-the-country-forward-in-the-direction-of-development-cm-yogi-gorakhpur-news-c-7-1-gkp1006-320026-2023-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएम के पंच प्रण के भाव ने देश को विकास की धारा में आगे बढ़ाया : सीएम योगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएम के पंच प्रण के भाव ने देश को विकास की धारा में आगे बढ़ाया : सीएम योगी
विज्ञापन
गोरखपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंच प्रण के संकल्प ने देश में एक भाव को पैदा किया है, जिससे हम सभी का दायित्व राष्ट्र प्रथम का हो गया है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व महंत अवेद्यनाथ ने अपना पूरा जीवन भारत और भारतीयता के लिए समर्पित कर दिया था। हम सभी प्रधानमंत्री के पंच प्रण को अपने दायित्व से जोड़कर एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को सिद्ध करेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बुधवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 54वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 9वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतर्गत संगोष्ठी के पहले दिन की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना के साथ प्रधानमंत्री ने देश को एक संकल्प दिया। उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम तक एक भावना से सभी को संबल प्रदान किया। देश के लगभग 120 जनपद नक्सल प्रभावित थे, पूर्वोत्तर अराजकता से भरा था, लेकिन पीएम मोदी ने अपने नेतृत्व में भेदभाव की भावना को समाप्त कर विकास की योजनाओं से जोड़कर विकास की धारा में ला दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने तीर्थ, अपने धर्म ग्रंथ और संस्कृति पर गर्व करना चाहिए। हमें सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। साथ ही अपने कर्तव्यों के प्रति सभी को जागरूक रहना होगा। मुख्य वक्ता भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उपाध्यक्ष प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें गोरक्षपीठ में आकर अनुभव हो रहा है कि यहां एक भारत श्रेष्ठ भारत ही नहीं, बल्कि एक भारत सर्वश्रेष्ठ-भारत का भाव है। प्रधानमंत्री ने हमारे देश में जय जवान, जय किसान के उद्घोष में जय विज्ञान जोड़ा है, आने वाले समय में उसमें जय ज्ञान जोड़ा जाएगा। तब यह देश पूरे विश्व को अपने ज्ञान से आलोकित करेगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा-मैंने नौ राज्यों में कार्य किया है। मैंने सभी राज्यों में एक भारत श्रेष्ठ भारत का भाव देखा है। चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत की श्रेष्ठता मानने को पूरे विश्व को विवश कर दिया है। जी-20 में पूरा विश्व भारत की सांस्कृतिक विरासत और क्षमता का दर्शन किया है।
अशर्फी भवन अयोध्या से पधारे जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य ने कहा कि भारत केवल भूमि नहीं है, अपितु भारत माता है, जो हमारी दैवीय शक्ति है। यहां रहने वाले विविधता में भी एकता की भावना रखते हैं। हमें भारत के गौरव के लिए व भारत की एकता के लिए सदैव मिलकर काम करना चाहिए। बड़ोदरा से पधारे महंत गंगादास ने कहा की आजाद भारत में हमारे राजनेता समाज को जातियों और संप्रदायों में बांटकर देश को कमजोर करते रहे। पिछले कुछ वर्षों में देश के प्रधानमंत्री के प्रयास से देश में एकता की भावना लाकर देश को श्रेष्ठता प्रदान किया जा रहा है।
विशिष्ट वक्ता उच्च शिक्षा आयोग प्रयागराज के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि यह सभागार चेतना का सभागार है, यहां जो धूनी जलती है वह निरंतर राष्ट्रीय चेतना को जागृत करती है। यह भारत भूमि ऐसी भूमि है, जहां देवता भी आने के लिए लालायित रहते हैं। ब्रह्मलीन पूज्य मंहत दिग्विजयनाथ अपने पूरे जीवन में भारत को श्रेष्ठ बनाने की संकल्पना के साथ संघर्ष करते रहे। एमपी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो उदय प्रताप सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।
संगोष्ठी में योगवाणी के संपादक डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त की पुस्तक भोजपुरी सतसइ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर महंत सुरेश दास, ब्रह्मचारी दास लाल, महंत शिवनाथ, महंत राम मिलन दास, महंत धर्मदास, महंत संतोष दास, महंत मिथलेशनाथ, महंत रवींद्रदास, योगी रामनाथ, सांसद डॉ. रमापति राम त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बुधवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 54वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 9वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतर्गत संगोष्ठी के पहले दिन की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना के साथ प्रधानमंत्री ने देश को एक संकल्प दिया। उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम तक एक भावना से सभी को संबल प्रदान किया। देश के लगभग 120 जनपद नक्सल प्रभावित थे, पूर्वोत्तर अराजकता से भरा था, लेकिन पीएम मोदी ने अपने नेतृत्व में भेदभाव की भावना को समाप्त कर विकास की योजनाओं से जोड़कर विकास की धारा में ला दिया।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने तीर्थ, अपने धर्म ग्रंथ और संस्कृति पर गर्व करना चाहिए। हमें सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। साथ ही अपने कर्तव्यों के प्रति सभी को जागरूक रहना होगा। मुख्य वक्ता भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उपाध्यक्ष प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें गोरक्षपीठ में आकर अनुभव हो रहा है कि यहां एक भारत श्रेष्ठ भारत ही नहीं, बल्कि एक भारत सर्वश्रेष्ठ-भारत का भाव है। प्रधानमंत्री ने हमारे देश में जय जवान, जय किसान के उद्घोष में जय विज्ञान जोड़ा है, आने वाले समय में उसमें जय ज्ञान जोड़ा जाएगा। तब यह देश पूरे विश्व को अपने ज्ञान से आलोकित करेगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा-मैंने नौ राज्यों में कार्य किया है। मैंने सभी राज्यों में एक भारत श्रेष्ठ भारत का भाव देखा है। चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत की श्रेष्ठता मानने को पूरे विश्व को विवश कर दिया है। जी-20 में पूरा विश्व भारत की सांस्कृतिक विरासत और क्षमता का दर्शन किया है।
अशर्फी भवन अयोध्या से पधारे जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य ने कहा कि भारत केवल भूमि नहीं है, अपितु भारत माता है, जो हमारी दैवीय शक्ति है। यहां रहने वाले विविधता में भी एकता की भावना रखते हैं। हमें भारत के गौरव के लिए व भारत की एकता के लिए सदैव मिलकर काम करना चाहिए। बड़ोदरा से पधारे महंत गंगादास ने कहा की आजाद भारत में हमारे राजनेता समाज को जातियों और संप्रदायों में बांटकर देश को कमजोर करते रहे। पिछले कुछ वर्षों में देश के प्रधानमंत्री के प्रयास से देश में एकता की भावना लाकर देश को श्रेष्ठता प्रदान किया जा रहा है।
विशिष्ट वक्ता उच्च शिक्षा आयोग प्रयागराज के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि यह सभागार चेतना का सभागार है, यहां जो धूनी जलती है वह निरंतर राष्ट्रीय चेतना को जागृत करती है। यह भारत भूमि ऐसी भूमि है, जहां देवता भी आने के लिए लालायित रहते हैं। ब्रह्मलीन पूज्य मंहत दिग्विजयनाथ अपने पूरे जीवन में भारत को श्रेष्ठ बनाने की संकल्पना के साथ संघर्ष करते रहे। एमपी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो उदय प्रताप सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।
संगोष्ठी में योगवाणी के संपादक डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त की पुस्तक भोजपुरी सतसइ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर महंत सुरेश दास, ब्रह्मचारी दास लाल, महंत शिवनाथ, महंत राम मिलन दास, महंत धर्मदास, महंत संतोष दास, महंत मिथलेशनाथ, महंत रवींद्रदास, योगी रामनाथ, सांसद डॉ. रमापति राम त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।