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Gorakhpur News: सेहत से खिलवाड़...फल-सब्जियों की गुणवत्ता को खत्म कर रहा लीफ कर्ल वायरस

Sat, 30 Mar 2024 01:44 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 30 Mar 2024 01:44 AM IST
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Playing with health...Leaf curl virus is destroying the quality of fruits and vegetables
गोरखपुर। फल-सब्जी खा रहे हैं, लेकिन उसका असर सेहत पर नहीं पड़ रहा है तो थोड़ा सतर्क हो जाइए। जो फल-सब्जी आप खा रहे हैं, हो सकता है कि वह लीफ कर्ल वायरस से संक्रमित हो। यह वायरस फल और सब्जियों की गुणवत्ता को खत्म कर दे रहा है। इस वायरस के बारे में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के बायोटेक विभाग में हुए शोध से पता चला है।
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बायोटेक विभाग के अध्यक्ष प्रो. डॉ. राजर्षि गौड़ संग उनकी प्लांट वायरोलॉजिस्ट टीम में डॉ. अविनाश मारवाल, डॉ. राकेश कुमार वर्मा, रिसर्च स्कॉलर विनीता पांडेय और आरपी श्रीवास्तव ने मिलकर पिछले चार साल से ''''चिल्ली पर लगने वाले वायरस पर अध्ययन व उनके निदान'''' पर शोध शुरू की। शोध कार्य के दौरान चार राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के जिलों से कुल 80 सैंपल लिए गए।
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रिसर्च कार्य पूरा होने के बाद अंतरराष्ट्रीय जर्नल में इसका प्रकाशन किया गया है, जो फ्रंटियर इन माइक्रो बायोलॉजी, स्वीटजरलैंड व श्री बायोटेक, आस्ट्रेलिया में प्रकाशित हुआ है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के बायोटेक की शोधार्थी विनीता पांडेय, आरपी श्रीवास्तव, मोदी यूनिवर्सिटी राजस्थान के डॉ. राकेश कुमार वर्मा और मोहनलाल सुखड़िया यूनिवर्सिटी, उदयपुर के डॉ. अविनाश मारवाल इस रिसर्च का हिस्सा रहे।
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शोध में पाया गया कि यह वायरस तेजी से घरों में सब्जी में इस्तेमाल होने वाले गोभी, बैगन, टमाटर और पपीता के पौधों को अपना शिकार बना रहा है। इस वायरस के चपेट में आने से फल देने वाले इन पौधों के विकास व उनकी गुणवत्ता पर गंभीर रूप से नुकसान होता है। इससे आप जो फल-सब्जी खा रहे हैं, उसका पूरा फायदा आपके शरीर को नहीं मिल रहा है।



लीफ कर्ल वायरस न सिर्फ भारत में तेजी के साथ फैल रहा है, बल्कि यह पहले से ही पाकिस्तान, सउदी अरब, ओमान, बांग्लादेश में भी तबाही मचा रहा है। इधर चार-पांच साल में भारत में तेजी के साथ अपने पांव को पसार रहा है। हालांकि, इन वायरस के चपेट में आने वाले इन पौधों पर उगने वाले फल और सब्जी के सेवन से मानव के शरीर पर कोई खास नुकसान नहीं है, लेकिन फल व सब्जी की गुणवत्ता पर असर डालता है, जिससे पौष्टिक तत्व खत्म हो जाते हैं।



गन्ने पर शोध के दौरान वायरस का चला पता



प्रो. राजर्षी गौड़ ने बताया कि गन्ना शोध संस्थान में गन्ना पर लगने वाले वायरस के ऊपर शोध कार्य किया गया था। तभी उन्होंने बाकी सब्जियों और फल देने वाले पौधे पर अटैक करने वाले वायरस पर अध्ययन किया तो लीफ कर्ल वायरस का पता चला। यह भारत में ज्यादा तेजी के साथ फैल रहा है जो गोभी, बैगन, टमाटर और पपीता पर तेजी के साथ उसके 80-100 प्रतिशत तक के प्रोडक्टिविटी को नुकसान पहुंचा रहा है।





इस विधि से विकसित करने पर नहीं पड़ा वायरस का असर



शोध में निकल कर आया कि इस वायरस से इन पौधों को बचाने के लिए प्लांट ट्रांजिट कर माल्यूकुलर टेक्नोलाॅजी की मदद से एक नए पौधों को विकसित करना है। बायोटेक विधि से इसके वैक्सीन को विकसित किया जाता है, ताकि इन पौधों की इम्यूनिटी बढ़ जाए। इसके लिए लीफ कर्ल वायरस के जीन को डालकर उसके वैक्सीन को बनाया गया। नए पौधे में शुरुआती दौर में इस वैक्सीन को मिला दिया गया तो इन वायरस की चपेट में ये पौधे नहीं आए।




गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षण के साथ अनुसंधान पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका असर भी दिखने लगा है। विश्वविद्यालय के बायोटेक विभाग ने दूसरे विश्वविद्यालयों की प्लॉट वायरोलाजिस्ट टीम के साथ मिलकर लीफ कर्ल वायरस पर शोध किया है, जो सराहनीय है।



- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
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