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गोरखपुर में अब इस विधि से होगा कोरोना मरीजों का इलाज, दो डॉक्टरों ने की पहल

Sun, 06 Sep 2020 12:07 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 06 Sep 2020 12:07 AM IST
सार

  • फातिमा हॉस्पिटल के सहयोग से शुरू हुई थेरेपी
  • शहर के कई डॉक्टरों ने दिल्ली में प्लाज्मा थेरेपी से कराया है इलाज 

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Plasma therapy started in BRD for Corona patient
कोरोना वायरस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी शुरू हो गई है। बीआरडी और एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने प्लाज्मा दान कर इसकी शुरुआत की है। फिलहाल अब तक किसी संक्रमित मरीज को प्लाज्मा नहीं चढ़ाया गया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जरूरत के अनुसार मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया जाएगा।

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जानकारी के मुताबिक कोरोना संक्रमितों के इलाज में अब तक प्लाज्मा थेरेपी काफी कारगर साबित हुई है। देश भर में कई गंभीर मरीजों को इसी थेरेपी से जान भी बचाई गई है। शहर के कई डॉक्टरों ने दिल्ली में इस थेरेपी का उपयोग भी किया है।
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लखनऊ के केजीएमयू और पीजीआई में प्लाज्मा थेरेपी से गंभीर संक्रमितों को बचाया भी जा रहा है। इसे देखते हुए शासन ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज को भी प्लाज्मा थेरेपी शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके बाद से लगातार कॉलेज प्रशासन प्लाज्मा थेरेपी शुरू करने के लिए प्रयासरत था।
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कोरोना से जंग जीत चुके लोग दान दे सकते हैं प्लाज्मा

कोरोना से जंग जीत चुके लोग प्लाज्मा थेरेपी दान कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए एफ्रेसिस मशीन की जरूरत होती है, जो अब तक बीआरडी को नहीं मिली है। यही वजह है कि बीआरडी ने फातिमा हॉस्पिटल का सहयोग लिया है। यहां के ब्लड बैंक के पास एफ्रोसिस मशीन है।

यहीं पर बीआरडी के दो डॉक्टरों ने प्लाज्मा दान किया है। इन डॉक्टरों में बीआरडी के मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. तपस आईच व दूसरे निजी चिकित्सक डॉ. नीरज श्रीवास्तव हैं। दोनों डॉक्टर दो महीने पहले संक्रमित हुए थे। अब संक्रमण से उबर चुके हैं। प्रत्येक से 400 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया गया है। इसे प्रिजर्व कर बीआरडी में रखा गया है।

निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद 28 दिन बाद दे सकेंगे प्लाज्मा
बीआरडी के मेडिसिन विभाग के डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमित हो चुके मरीज के निगेटिव होने के बाद 28 दिन तक इंतजार किया जाता है। 28 दिन बाद ही ठीक हुआ मरीज अपने ब्लड से प्लाज्मा दे सकते हैं। इस बीच उसकी बॉडी में विकसित हुए एंटीबॉडी प्लाज्मा के सहारे कोरोना से संक्रमित मरीज के शरीर में पहुंच जाते हैं।  

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि बीआरडी में प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत हो चुकी है। दो यूनिट प्लाज्मा मिला है। अभी किसी मरीज को यह चढ़ाया नहीं गया है। इसके लिए मरीज की पहचान की जा रही है। जल्द ही इस पद्धति से इलाज शुरू किया जाएगा।

 
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