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यहां 28 साल पहले दरोगा को जलाकर मारने की हुई थी कोशिश, लोगों ने लगाया था ये आरोप
Fri, 03 Jul 2020 06:14 PM IST
vivek shukla
इंद्रेश यादव, धनघटा (संतकबीरनगर)।
इंद्रेश यादव, धनघटा (संतकबीरनगर)।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 03 Jul 2020 06:14 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
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कानपुर में आठ पुलिस कर्मियों की हुई हत्या की घटना ने पूर्व में संतकबीरनगर जिले के धनघटा क्षेत्र में हुए पुलिस पर हमलों की याद ताजा कर दी। वर्ष 1992 में जहां एक एसआई को गांव वालों ने जलाकर मार डालने की कोशिश की थी। वहीं वर्ष 2017 में तत्कालीन एसओ पर भीड़ ने जानलेवा हमला करके गंभीर रुप से घायल कर दिया था।
मार्च 1992 में धनघटा क्षेत्र के कर्मा गांव में जमीन संबंधी विवाद का निस्तारण कराने तत्कालीन एसआई श्याम बिहारी गुप्ता अपने सहयोगी सिपाही के साथ गए थे। जमीन विवाद का निस्तारण एक पक्षीय करने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन ग्राम प्रधान सज्जाक खान समेत अन्य ने दारोगा का विरोध कर दिया।
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उसके बाद बात आगे बढ़ी तो गांव के लोगों ने दारोगा को पकड़कर पिटाई के बाद सर्विस रिवाल्वर छीन लिया और उनका हाथ पैर बांधकर उनके ऊपर मिट्टी का तेल गिराकर जलाने की कोशिश की। दारोगा के साथ गया सिपाही भाग निकला और थाने पर पहुंच कर सूचना दी।
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मार्च 1992 में धनघटा क्षेत्र के कर्मा गांव में जमीन संबंधी विवाद का निस्तारण कराने तत्कालीन एसआई श्याम बिहारी गुप्ता अपने सहयोगी सिपाही के साथ गए थे। जमीन विवाद का निस्तारण एक पक्षीय करने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन ग्राम प्रधान सज्जाक खान समेत अन्य ने दारोगा का विरोध कर दिया।
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फोर्स ने बचाई थी दरोगा की जान
मौके पर जब काफी संख्या में पहुंची तो दारोगा को बंधन मुक्त कराकर थाने लाई। इस मामले में प्रधान समेत कई के विरुद्व केस दर्ज हुआ था। दूसरी घटना वर्ष 2017 में क्षेत्र के छपरा मगर्बी गांव में घटी थी। जहां बालू खनन के रास्ते को लेकर हो रहे विवाद का निस्तारण कराने पूर्व एसओ शहाबुद्दीन समेत अन्य अफसर पहुंचे थे।
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वहां भी जनता और पुलिस से विवाद हुआ। जिसमें पूर्व एसओ पर भीड़ ने जानलेवा हमला कर दिया। हमले में पूर्व एसओ गंभीर रुप से घायल हो गए थे। इस मामले में एसआई रामनयन यादव की तहरीर पर 52 लोगों के विरुद्व जानलेवा हमला समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। यह प्रकरण अभी अदालत में विचाराधीन है।
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