कोरोना वायरसः बिना सलाह के ही लोग कर रहे इस दवा का सेवन, प्रशासन बोला- लेंगे एक-एक गोली का हिसाब
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मलेरिया में खाई जाने वाली दवा हाइड्राक्सीक्लोरीक्वीन दवा की किल्लत ने सरकार के समक्ष परेशानियां खड़ी कर दी हैं। यही वजह है कि शासन ने इसे एच-वन की श्रेणी में शामिल कर लिया है।
शासन के इस फैसले के बाद अब एक-एक गोली का हिसाब दवा दुकानदारों को देना होगा। बताया जाता है कि यह निर्णय इसलिए लिया गया है कि कथित तौर पर कोरोना में इस दवा के असरदार होने की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं।
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से कोरोना वायरस में हाइड्राक्सीक्लोक्वीन दवा के असर की बात वायरल हो रही हैं। वायरल खबर का असर ऐसा रहा है कि शहर की दुकानों से यह दवा गायब हो गईं।
दुकानदारों की मानें तो शुरुआती दिनों में यह दवा खूब बिकी है। इसकी जानकारी होते ही खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने प्रदेश भर के सभी औषधि निरीक्षकों को शुक्रवार को पत्र भेजकर क्रय और विक्रय की जानकारी लेने का निर्देश दिया है।
डीएलए राजेश कुमार ने बताया कि यह दवा एच-वन की श्रेणी में शासन ने शामिल कर लिया है। अब थोक और फुटकर दवा दुकानदारों को इसकी बिक्री का हिसाब देना होगा। बताया कि सोशल मीडिया की अफवाह ने दवा की बिक्री बढ़ाई है।
उन्होंने अपील की है कि बिना डॉक्टरी सलाह के दवा का सेवन न करें। दवा विक्रेता समिति के महामंत्री आलोक चौरसिया ने इस निर्णय की सराहना की है।
लखनऊ और बनारस से आती है दवा
यह दवा लखनऊ और बनासर से आती है। दो कंपनियां इसको बनाती है। इसमें कैडिला और इपको शामिल है। राजेश कुमार ने बताया कि इस बीच कौन कितना ऑर्डर दवा का दिया है। इसकी जानकारी ली जा रही है। दवा की कमी नहीं होने दी जाएगी।
500 फुटकर दुकानों को दिया गया है पास
लॉकडाउन के बीच जनता को दवा के लिए परेशान न होना पड़े। इसके लिए प्रशासन ने फुटकर के 500 दुकानदारों को शुक्रवार को पास जारी किया है। डीएलए राजेश कुुमार ने बताया कि जरूरत पड़ी तो और भी पास जारी किए जाएंगे। कोशिश है कि हर गली और मोहल्ले में स्थित दवा दुकानों को पास जारी कर दिया जाए, जिससे की लोग दवा के लिए इधर उधर न भटके।