{"_id":"6059c0458ebc3ec8be55610d","slug":"people-save-20-lakh-liters-of-water-every-year-with-little-effort-in-sant-kabir-nagar","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पानी बचाओ: छोटी सी कोशिश से हर साल 20 लाख लीटर पानी बचाते हैं ये लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानी बचाओ: छोटी सी कोशिश से हर साल 20 लाख लीटर पानी बचाते हैं ये लोग
Tue, 23 Mar 2021 03:47 PM IST
vivek shukla
शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर।
शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 23 Mar 2021 03:47 PM IST
सार
- आनंद हाईवे रिजॉर्ट के मालिक चौधरी भूपेंद्र सिंह ने कैंपस में बनवाया है वाटर रिचार्ज सिस्टम
- इंजीनियर बेटे अभिषेक की प्रेरणा से उठाया कदम, आरो के निष्प्रयोज्य पानी का बर्तन धोने में करते हैं उपयोग
विज्ञापन
sant kabir nagar news
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
‘जल ही जीवन है’ के सूत्र को अपने जीवन में उतार कर इसके संरक्षण के प्रति सचेत चौधरी भूपेंद्र सिंह लोगों के लिए नजीर हैं। अपने प्रतिष्ठान आनंद हाईवे रिजॉर्ट के परिसर में वाटर रिचार्ज सिस्टम की यूनिट लगाकर हर वर्ष बीस लाख लीटर पानी बचाते हैं।
विज्ञापन
बकौल भूपेंद्र, वह होटल व्यवसाय के साथ-साथ गवर्नमेंट कांटेक्टर का भी काम करते हैं। सरकारी भवनों को बनवाते वक्त अमूमन हर बड़ी बिल्डिंग में वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण करवाना होता था। यह काम तो वह कई वर्षों से करवाते आ रहे हैं लेकिन कभी अपने होटल में इसे बनवाने का ख्याल नहीं आया। उनका बड़ा बेटा अभिषेक दिल्ली में इंजीनियरिंग की पढ़ाई किया है। छुट्टियों में वह होटल पर आया था।
विज्ञापन
उसी ने प्रेरित किया और समझाया कि 2600 वर्गमीटर के बड़े परिसर में 20 लाख लीटर पानी बचाया जा सकता है। उसी की प्रेरणा से वह परिसर में ही वाटर रिचार्ज सिस्टम लगवा कर पानी को बचाने की शुरूआत किए। इसके अलावा किचन में लगे आरो सिस्टम से रोजाना सैकड़ों लीटर व्यर्थ हो रहे पानी को भी बचाने की ठानी। उन्होंने बताया कि आरो से निकलने वाले पानी को एक टंकी में एकत्र करते हैं। इसी पानी से किचन में बर्तनों की सफाई की जाती है।
विज्ञापन
आधा गिलास पानी परोसने पर न हों नाराज
यदि आपको आनंद हाईवे रिजॉर्ट में वेटर आधा गिलास पानी परोसे तो आप नाराज न हों। जरूरत पड़ने पर आप और पानी ले सकते हैं। दरअसल, अक्सर देखा जाता है कि लोग होटल या रेस्टोरेंट में पूरा गिलास पानी लेते हैं लेकिन एक-दो घूंट पानी पीकर ही छोड़ देते हैं। ऐसे में आधा गिलास पानी के संकल्प के जरिए पानी के बेजा इस्तेमाल पर रोक लग सकती है। सोमवार को आनंद हाईवे रिजॉर्ट के सभी कर्मचारियों ने जल संरक्षण की शपथ ली।
विश्व जल दिवस 2021 की थीम
हर साल विश्व जल दिवस की एक थीम के साथ मनाया जाता है। इस साल की थीम ‘वेल्यूइंग वाटर’ है, जिसका लक्ष्य लोगों को पानी का महत्व समझाना है। दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां लोगों को पीने तक का पानी नहीं मिल पाता और फिर लोग गंदा पानी पीकर कई सारी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं।
‘विश्व जल दिवस’ मनाने की शुरूआत
दुनिया को पानी की जरूरत से अवगत कराने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र ने ‘विश्व जल दिवस मनाने की शुरुआत की थी। 1992 में रियो डि जेनेरियो में आयोजित पर्यावरण तथा विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में विश्व जल दिवस को मनाने की शुरूआत की गई थी। जिसका आयोजन पहली बार 1993 में 22 मार्च को हुआ था।
एक नजर
पूरे विश्व में साफ पानी का धनी देश ब्राजील को माना जाता है।
सबसे कम पानी कुवैत में है।
विश्व में पानी की उपलब्धता में भारत का आठवां स्थान है।
पानी की कमी से जूझते पूरे विश्व के 20 शहरों में 5 शहर भारत के हैं।
नंबर एक पर टोक्यो है, तो नंबर दो पर दिल्ली है।
भारत करीब 230 घन किलो मीटर भू-जल का दोहन प्रति वर्ष करता है।
सिंचाई का लगभग 60% और घरेलू उपयोग का लगभग 80% भूजल ही होता है।
‘विश्व जल दिवस’ मनाने की शुरूआत
दुनिया को पानी की जरूरत से अवगत कराने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र ने ‘विश्व जल दिवस मनाने की शुरुआत की थी। 1992 में रियो डि जेनेरियो में आयोजित पर्यावरण तथा विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में विश्व जल दिवस को मनाने की शुरूआत की गई थी। जिसका आयोजन पहली बार 1993 में 22 मार्च को हुआ था।
एक नजर
पूरे विश्व में साफ पानी का धनी देश ब्राजील को माना जाता है।
सबसे कम पानी कुवैत में है।
विश्व में पानी की उपलब्धता में भारत का आठवां स्थान है।
पानी की कमी से जूझते पूरे विश्व के 20 शहरों में 5 शहर भारत के हैं।
नंबर एक पर टोक्यो है, तो नंबर दो पर दिल्ली है।
भारत करीब 230 घन किलो मीटर भू-जल का दोहन प्रति वर्ष करता है।
सिंचाई का लगभग 60% और घरेलू उपयोग का लगभग 80% भूजल ही होता है।