फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   people family hungry after job left during lockdown in gorakhpur

कोरोना का असर: कोरोना ने छीन ली नौकरी, दो जून की रोटी पर संकट

Mon, 08 Mar 2021 03:42 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 08 Mar 2021 03:42 PM IST
सार

  • ट्रेनों के एसी कोच में बेडरोल बंद होने से बेरोजगार हो गए कोच अटेंडेंट
  • दो जून की रोटी का जुगाड़ हो गया है मुश्किल

विज्ञापन
people family hungry after job left during lockdown in gorakhpur
Gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कोरोना का प्रकोप कम होने से भले ही सामान्य जनजीवन तेजी से पटरी पर आ रहा है लेकिन ट्रेनों के कोच अटेंडेंट अब भी इस झटके से उबरने की जद्दोजहद कर रहे हैं। ट्रेनों में बेडरोल बंद होने से उनकी नौकरी चली गई। अब दो जून की रोटी का जुगाड़ मुश्किल हो गया है।

विज्ञापन


गोरखपुर जंक्शन के मैकेनाइज्ड लांड्री पर 150 कोच अटेंडेंट और सौ आउटसोर्सिंग के तहत लाए गए कर्मचारी कार्यरत थे। आउटसोर्स कर्मचारी बेडरोल की धुलाई व पैकिंग में लगाए गए थे। तकरीबन एक साल पहले मार्च में जब ट्रेनों का संचालन बंद हुआ तो कोच अटेंडेंट बेरोजगार हो गए।
विज्ञापन


जुलाई 2020 से ट्रेनों का संचलन तो शुरू हुआ लेकिन एसी कोच में बेडरोल (चादर, कंबल, तकिया, तौलिया) की सुविधा बंद कर दी गई। ऐसे में एक साल से जंक्शन पर कार्यरत 250 कर्मचारी बेरोजगार हैं। इस बीच कुछ ने मजदूरी शुरू कर दी तो कई कोच अटेंडेंट दुकानों पर काम करने लगे। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि रेलवे जल्द पुरानी व्यवस्था बहाल करेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


 

साल भर से बेरोजगार हूं
सालभर होने को हैं, कोई काम-धंधा नहीं है। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करूं। बस एक उम्मीद है कि कोच में पुरानी व्यवस्था फिर शुरू होगी तो नौकरी लग जाएगी। - अजय श्रीवास्तव, कोच अटेंडेंट

कोच अटेंडेंट की नौकरी भले ही आउटसोर्सिंग की थी, घर का खर्च चल जाता था। एक वर्ष से पीआरकेएस कार्यालय पर रहता हूं। रेल प्रशासन ट्रेन में बेडरोल शुरू करे। - जीतेंद्र कुमार, कोच अटेंडेंट

परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी हमारे ऊपर है। एक दुकान पर नौकरी की। लेकिन इससे गुजारा कहां हो पाएगा। रेलवे प्रशासन से मांग है कि हमें आउटसोर्सिंग पर कहीं समायोजित करे।-दयानाथ सिंह, कोच अटेंडेंट

मैंने तो कोच अटेंडेंट की नौकरी की उम्मीद ही छोड़ दी। अब  लाई भूनने वाली मशीन लाया हूं। उसे पैकिंग करके बेचूंगा। कम से कम परिवार के लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ तो हो जाएगा।-दयानंद गौतम, कोच अटेंडेंट

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed