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गोरखपुर: दस्तक के दौरान ढूंढे जाएंगे कालाजार के भी मरीज, जानिए कब से चलेगा अभियान
Tue, 29 Jun 2021 07:48 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 29 Jun 2021 07:48 PM IST
सार
- विश्व स्वास्थ्य संगठन और पाथ के सहयोग से हुई राज्य स्तरीय वर्चुअल प्रशिक्षण कार्यशाला
- 12 से 25 जुलाई तक दस्तक अभियान के दौरान आशा ढूढेंगी बुखार के रोगी
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दिमागी बुखार। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोरखपुर जिले में प्रस्तावित दस्तक अभियान के दौरान कालाजार के रोगी भी चिन्हित किए जाएंगे। मलेरिया एवं वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी व अपर निदेशक डॉ बिंदु प्रकाश सिंह के दिशा-निर्देश पर इसे लेकर मंगलवार को राज्य स्तरीय वर्चुअल प्रशिक्षण दिया गया।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन और पाथ संस्था के तकनीकी सहयोग से हुई कार्यशाला में बताया गया कि दो हफ्ते से ज्यादा बुखार वाले कालाजार के संभावित मरीजों की जांच अवश्य कराई जाए। जिले में 12 से 25 जुलाई तक प्रस्तावित दस्तक अभियान चलाया जाएगा।
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विषय विशेषज्ञ तनुज शर्मा ने आशा कार्यकर्ताओं के लिए तकनीकी फार्मेट्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एके पांडेय ने बताया दस्तक अभियान के दौरान सिर्फ कोविड, जेई-एईएस, टीबी रोगियों और कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने का दिशा-निर्देश था। अब तय हुआ है कि कालाजार के रोगी ढूंढ़े जाएं।
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बताया कालाजार का पहला मामला वर्ष 2016 में सरदारनगर क्षेत्र में मिला था। वह मरीज भी बिहार के सिवान जिले से आया था। इसके अलावा पिपरौली ब्लॉक के भौवापार गांव में वर्ष 2019 में कालाजार का प्रवासी मरीज सामने आया था। भौवापार का मरीज कुशीनगर जिले से आया प्रवासी था। इस गांव में दो वर्ष के भीतर तीन चक्र का छिड़काव कराया जा चुका है।
कालाजार को जानिए
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। यह तीन से छह फीट ऊंचाई तक ही उड़ पाती है। इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है। उसे बुखार होता है जो रुक-रुक कर चढ़ता-उतरता है। लक्षण दिखने पर मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है, भूख कम लगती है और शरीर पर काला चकत्ता पड़ जाता है।