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Exclusive: प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर दवाओं का टोटा, ग्राहकों को मजबूरी में लेनी पड़ रही ब्रांडेड दवाएं

Thu, 26 Nov 2020 11:54 AM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 26 Nov 2020 11:54 AM IST
सार

  • 1200 से अधिक जेनरिक दवाएं होनी चाहिए, मगर 200 किस्म की दवाएं भी बमुश्किल उपलब्ध
  • सरकार दें ध्यान तो आम आदमी को सस्ती दवाओं के लिए नहीं होना होगा परेशान

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Patients facing problems due to generic medicines not available in Pradhan Mantri Jan Aushadhi Kendra
जन औषधि केंद्र (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में आम आदमी तक सस्ती दवाएं पहुंचाने के लिए खोले गए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों में नाम मात्र की दवाएं हैं, लिहाजा जरूरतमंद महंगी ब्रांडेड दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। इन केंद्रों पर 1200 से अधिक जेनेरिक दवाएं होनी चाहिए, मगर 200 किस्म की दवाएं भी बमुश्किल उपलब्ध हैं।
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बता दें कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की शुरूआत लोगों को सस्ती दर पर दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के दामों में जमीन आसमान का अंतर होता है। कई लोगों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वह ब्रांडेड दवाएं खरीद सकें, ऐसे लोगों को जेनेरिक दवाएं काफी राहत देती हैं। मगर दवाओं के कारोबार से जुड़ा एक कॉकस अपना खेल करता रहता है। कभी केंद्रों पर दवाएं नहीं तो बड़ी संख्या में डॉक्टर मरीजों को जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं। उनका जोर ब्रांडेड दवाएं लिखने पर रहता है।
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चार माह से नहीं मिल रहीं दवाएं
जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र का संचालन करने वाले वसीउल्लाह खान ने बताया कि चार माह पहले दवाओं के आर्डर किए गए हैं, लेकिन अब तक दवाएं नहीं मिल सकी हैं। दवा न होने की वजह से स्टॉक खाली है। थोड़ी बहुत एंटीबॉयोटिक दवाएं हैं। इसके अलावा शुगर, बीपी, कैल्शियम, विटामिन की दवाएं खत्म हैं। ऐसे में ग्राहक लौटाएं जा रहे हैं।
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शहर में तीन जगह खुले हैं जन औषधि केंद्र

शहर की बात करें तो अब तक केवल तीन जगहों पर जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। इनमें जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, कूड़घाट शामिल हैं। इसके अलावा एम्स, बीआरडी मेडिकल कॉलेज सहित तीन सीएचसी और पीएचसी पर खोले जाने हैं। इन केंद्रों के खुल जाने से लोगों को काफी हद तक राहत मिल सकती है।

दवाएं मिल नहीं पा रही
जन औषधि केंद्र के निदेशक दिवाकर सिंह ने बताया कि औषधि केंद्र में 1200 से ज्यादा दवाओं के स्टॉक हैं, लेकिन महज 200 दवाओं का ही स्टॉक मिल पा रहा है। बीपीपीआई संस्था दवाओं की आपूर्ति नहीं कर रही है। बुखार, बीपी, शुगर, दर्द जैसी दवाओं की आपूर्ति संस्था नहीं कर पा रही है। ऐसी स्थिति में खर्च निकलना मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर, डॉक्टर मरीजों को जेनेरिक दवाओं के नाम पर गुमराह कर देते हैं। इसकी वजह से मरीज और तीमारदार भी औषधि केंद्र की दवाएं नहीं लेना चाहते हैं।

मजबूरी में लेनी पड़ी ब्रांडेड दवाएं
जिला अस्पताल में इलाज के लिए आए सोनू यादव को औषधि केंद्र से निराश लौटना पड़ा। उन्हें दाद की क्रीम और दवा चाहिए थी, लेकिन दोनों दवाएं न मिलने से मजबूरी में ब्रांडेंड दवाएं लेनी पड़ीं। कुछ ऐसा ही हाल प्रिया का था। जिला अस्पताल के औषधि केंद्र पर खांसी की सीरप लेने आई थीं, लेकिन दवा न होने की वजह से वह भी निराश होकर चली गईं। ऐसे सैकड़ों मरीज जिला अस्पताल से लौटकर ब्रांडेड दवाएं मजबूरी में खरीद रहे हैं।

ऐसे समझें ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं में कीमतों का अंतर

केस-1
दर्द और बुखार में दी जाने वाली एंटीबॉयोटिक दवा एसिक्लोफेनाक (पैरासिटामॉल) की 10 गोली वाली स्ट्रिप की कीमत जन औषधि केंद्र में नौ रुपये है, जबकि ब्रांडेड की कीमत 45 रुपये है। एंटीबॉयोटिक के रूप में अमोक्सिसिल्लिन-625 की कीमत औषधि केंद्र में छह गोली की स्ट्रिप 51 रुपये में मिलती है, जबकि ब्रांडेड की कीमत 110 रुपये है।

केस-2
शुगर में दी जाने वाली दवा ग्लिमेप्राइड एक एमजी की 10 गोली की कीमत औषधि केंद्र में 16 रुपये है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 65 रुपये प्रति स्ट्रिप है। यही दवा दो एमजी में 15 गोली वाली स्ट्रिप की कीमत औषधि केंद्र में 24 रुपये है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 150 रुपये हो जाती है।
 
केस-3
गैस में दी जाने वाली दवा पैंटोप्राजोल की 10 गोली वाली स्ट्रिप की कीमत औषधि केंद्र में 20 रुपये है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 190 रुपये है। इसकी दूसरी दवा ओमीप्राजोल की कीमत औषधि केंद्र पर नौ रुपये है। जबकि बाजार में इसकी कीमत 40 रुपये हो जाती है।

केस-4
बीपी में दी जाने वाली दवा टेल्मीसार्टन-40 एमजी की 10 गोली वाली स्ट्रिप की कीमत औषधि केंद्र में 10 रुपये है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 60 रुपये है। बीपी में ही टेल्मीसार्टन एच 40 एमजी की कीमत केंद्र में 14 रुपये है और बाजार में इसकी कीमत 120 रुपये है।

इन दवाओं के रेट में भी जमीन आसमान का अंतर

प्रोटेस्ट (पेशाब रुक-रुक कर आना) की दवा टैमसुलोसिन 0.4 औषधि केंद्र पर 18 रुपये में 10 गोली मिलती है। यही दवा बाजार में 150 रुपये में मिलती है। टैमसुलोसिन 0.4 डस्टाराइड की 15 गोली की स्ट्रिप औषधि केंद्र पर 24 रुपये में मिलती है। बाजार में यही दवा 400 रुपये में मिल रही है। दाद की क्रीम और दवा में भी काफी अंतर है।

इट्राकोनाजोल चार गोली की स्ट्रिप 22 रुपये है। बाजार में यह 80 रुपये में मिलती है। लुलीकोनाजोल 10 ग्राम की कीमत जेनेरिक में 22 रुपये है। जबकि ब्रांडेड में यह 150-170 रुपये में मिल रही है। महिलाओं के लिए कैल्शियम की 10 गोली जेनेरिक में 12 रुपये और एसिड की कीमत 21 रुपये है, जबकि यही दोनों दवाएं बाजार (ब्रांडेड) में 60 और 160 रुपये में मिलती हैं।
 
कारगार है जेनरिक दवाएं
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जेनरिक दवाएं कारगार होती है। ब्रांडेड दवाओं की तरह वह भी काम करती है। फर्क इतना है कि ब्रांडेड दवाओं की मार्केटिंग ज्यादा होती है। इसलिए लोगों को लगता है कि वह दवा ज्यादा कारगार है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। जेनरिक दवाएं भी उसी तरह काम करती है, जैसे ब्रांडेड दवाएं।
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