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सिपाही का दर्द: गर्भवती पत्नी के इलाज के लिए मांगी थी छुट्टी, गीडा थाना प्रभारी ने नहीं दिया अवकाश

Tue, 28 Dec 2021 11:30 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 28 Dec 2021 11:30 AM IST
सार

सिपाही ने सोशल मीडिया पर दर्द वायरल करते हुए कहा कि गर्भवती पत्नी की हालत खराब थी लेकिन थाना प्रभारी ने छुट्टी नहीं दी। जिससे पत्नी का इलाज समय से नहीं हो सका और बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो गई।

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painful story of constable accused Gida station in-charge he not given leave for treatment of his pregnant wife
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

गोरखपुर जिले के गीडा थाना अंतर्गत नौसड़ चौकी पर तैनात एक सिपाही ने थानेदार विनय सरोज पर गंभीर आरोप लगाया है। कांस्टेबल का आरोप है कि पत्नी की तबीयत खराब थी, मगर कई बार मांगने पर भी थाना प्रभारी ने छुट्टी नहीं दी। छुट्टी के अभाव में समय से इलाज न करवा पाने के कारण बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई। मौत की सूचना एसएसपी को देने पर सात दिन का अवकाश मिला। सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद एसएसपी ने सीओ ऑफिस को जांच सौंप दी है।

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जानकारी के मुताबिक, नौसड़ चौकी पर 15 नवंबर से तैनात सिपाही कुमार रवि ने 20 दिसंबर को गीडा थाना प्रभारी विनय कुमार सरोज से आठ माह की गर्भवती पत्नी के इलाज के लिए छुट्टी मांगी थी। उसने बताया था कि अगर पत्नी को समय से इलाज नहीं मिला तो कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है।
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सिपाही कुमार रवि ने बताया कि 20 दिसंबर को छुट्टी के आवेदन को थाना प्रभारी ने दरकिनार कर दिया था। 23 दिसंबर को दोबारा छुट्टी के लिए आवेदन दिया। इस बार भी थाना प्रभारी ने छुट्टी नहीं दी। मूलत: गाजीपुर जिले के रहने वाले कुमार रवि ने बताया कि उसके परिवार में सिर्फ घर पर मां और 15 साल का एक छोटा भाई है। पत्नी की गर्भावस्था में स्थिति ठीक न होने पर उसे तत्काल उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा की जरूरत थी। उसके अभाव में नवजात की मौत हो गई। उधर, थानेदार विनय सरोज का कहना है कि आवेदन मिलते ही छुट्टी दे दी गई। सिपाही इस समय छुट्टी पर ही है। एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि प्रकरण की जांच सीओ कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सिपाही के खिलाफ भी हो कार्रवाई

पुलिस विभाग जैसे अनुशासित महकमे में सिपाही के विभागीय मामले को सोशल मीडिया पर उछालने को लेकर पुलिस अधिकारियों में प्रतिक्रिया हुई है। उनका कहना है कि उन्हें सिपाही से हमदर्दी है, लेकिन सोशल मीडिया शिकायत करने का उचित माध्यम नहीं है। विभाग में हर स्तर पर सुनवाई की एक निर्धारित प्रक्रिया है। नौकरी का एक कोड ऑफ कंडक्ट है। हर एक को इसका पालन करना चाहिए। इस तरह से पुलिसकर्मी अपनी बात सोशल मीडिया के माध्यम से कहने लगे तो विभाग में अनुशासन रहेगा ही नहीं। यदि थाना प्रभारी ने सब कुछ जानते समझते छुट्टी नहीं दी तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही कांस्टेबल के खिलाफ भी अनुशासन भंग करने के लिए कार्रवाई होनी चाहिए, वरना इसके नतीजे अच्छे नहीं होंगे।

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