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Gorakhpur: पांच दिवसीय नेशनल थियेटर का आयोजन, बिदेसिया के जरिए जीवंत हुआ अपनों से दूर रहने के दर्द
Fri, 03 Nov 2023 02:22 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 03 Nov 2023 02:22 PM IST
सार
नाटक बिदेसिया में गांव से शहरों में होते पलायन और इससे उपजी पीड़ा को बड़े ही रोचक अंदाज में दिखाया गया है। संजय उपाध्याय निर्देशित नाटक बिदेसिया में प्रमुख भूमिका में शारदा सिंह ने प्यारी सुंदरी और बिदेसिया की भूमिका में राजू मिश्र ने नाटक को अंत तक दर्शकों को बांधे रखा।
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रंग महोत्सव के दूसरे दिन योगीराज बाबा गंभीर नाथ प्रेक्षागृह में विदेशिया नाटक का मंचन करते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
अभियान थिएटर ग्रुप की तरफ से आयोजित पांच दिवसीय नेशनल थियेटर फेस्टिवल गोरखपुर रंग महोत्सव के तीसरे दिन भी रंगमंच पर मंचन किया गया। दूसरे दिन भिखारी ठाकुर की चर्चित रचना बिदेसिया का मंचन हुआ। निर्माण कला मंच, पटना की ओर से चर्चित रंग निर्देशक संजय उपाध्याय द्वारा निर्देशित इस नाटक के 800 वें शो में भिखारी ठाकुर के समय में समाज में व्याप्त पलायन की पीड़ा को दिखाया गया।
बिदेसिया में बिछोह और मिलन की अभिलाषा के गीत हैं, जिनमें लोकनायक नायिका के मन की आतुरता का सहज चित्रण होता है। नाटक के माध्यम से अपनों से दूर रहने के दर्द को नाटक के रूप में कहने की कोशिश की गई है।
लोकनाट्य शैली में हुए इस नाटक बिदेसिया में एक ऐसे युवक की कहानी दिखाई गई जो शादी के कुछ दिनों बाद ही घूमने और रोजगार की खातिर कोलकाता चला जाता है। कोलकाता महानगर उसे खूब भाता है और वही वह एक अन्य महिला के साथ अपना घर बसा लेता है। इधर पति के चले जाने से पत्नी विरह वेदना झेलने को विवश रहती है। उसकी पीड़ा को देखकर गांव के बटोही बाबा कोलकाता जाते हैं और युवक को वापस लाते हैं। युवक के गांव आने के बाद कोलकाता वाली महिला भी पहुंच आती है और दोनों ही औरते अब साथ रहने के लिए राजी हो जाती हैं।
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नाटक बिदेसिया में गांव से शहरों में होते पलायन और इससे उपजी पीड़ा को बड़े ही रोचक अंदाज में दिखाया गया है। संजय उपाध्याय निर्देशित नाटक बिदेसिया में प्रमुख भूमिका में शारदा सिंह ने प्यारी सुंदरी और बिदेसिया की भूमिका में राजू मिश्र ने नाटक को अंत तक दर्शकों को बांधे रखा। विनीता सिंह ने दूसरी स्त्री एवं पप्पू ठाकुर बटोही की भूमिका में, धीरज दास जोकर की भूमिका में, स्पर्श मिश्र देवर की भूमिका में अपने अभिनय से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रकाश परिकल्पना विनय चौहान और रूप सजा मुकेश और राहुल की थी। भिखारी ठाकुर रचित बिदेसिया के गीतों को संजय उपाध्याय ने रंग-संगीत के प्रयोग के जरिए उम्दा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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बिदेसिया में बिछोह और मिलन की अभिलाषा के गीत हैं, जिनमें लोकनायक नायिका के मन की आतुरता का सहज चित्रण होता है। नाटक के माध्यम से अपनों से दूर रहने के दर्द को नाटक के रूप में कहने की कोशिश की गई है।
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लोकनाट्य शैली में हुए इस नाटक बिदेसिया में एक ऐसे युवक की कहानी दिखाई गई जो शादी के कुछ दिनों बाद ही घूमने और रोजगार की खातिर कोलकाता चला जाता है। कोलकाता महानगर उसे खूब भाता है और वही वह एक अन्य महिला के साथ अपना घर बसा लेता है। इधर पति के चले जाने से पत्नी विरह वेदना झेलने को विवश रहती है। उसकी पीड़ा को देखकर गांव के बटोही बाबा कोलकाता जाते हैं और युवक को वापस लाते हैं। युवक के गांव आने के बाद कोलकाता वाली महिला भी पहुंच आती है और दोनों ही औरते अब साथ रहने के लिए राजी हो जाती हैं।
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नाटक बिदेसिया में गांव से शहरों में होते पलायन और इससे उपजी पीड़ा को बड़े ही रोचक अंदाज में दिखाया गया है। संजय उपाध्याय निर्देशित नाटक बिदेसिया में प्रमुख भूमिका में शारदा सिंह ने प्यारी सुंदरी और बिदेसिया की भूमिका में राजू मिश्र ने नाटक को अंत तक दर्शकों को बांधे रखा। विनीता सिंह ने दूसरी स्त्री एवं पप्पू ठाकुर बटोही की भूमिका में, धीरज दास जोकर की भूमिका में, स्पर्श मिश्र देवर की भूमिका में अपने अभिनय से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रकाश परिकल्पना विनय चौहान और रूप सजा मुकेश और राहुल की थी। भिखारी ठाकुर रचित बिदेसिया के गीतों को संजय उपाध्याय ने रंग-संगीत के प्रयोग के जरिए उम्दा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।