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कुरआन-ए-पाक से 26 आयातें हटाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर उलेमाओं में आक्रोश
Fri, 12 Mar 2021 04:32 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 12 Mar 2021 04:32 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला।
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अल्लाह की अजीम मुकद्दस किताब कुरआन-ए-पाक से 26 आयतें हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने वाले वसीम रिजवी के खिलाफ मुस्लिम समुदाय में जबरदस्त गुस्सा है। शहर के उलेमाओं ने वह वसीम रिजवी पर कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
वसीम रिजवी कुरआन-ए-पाक व सहाबा-ए-किराम का सबसे बड़ा दुश्मन है। उसकी सोच व कृत्य मानसिक दिवालिएपन को दर्शाती है। ऐसा शख्स अमन शांति के लिए खतरा है। गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा देकर सलाखों के पीछे डाला जाए। अल्लाह ने पैगंबर-ए-आजम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पर कुरआन-ए-पाक नाजिल फरमाया। कुरआन-ए-पाक में हर चीज का इल्म है। कुरआन-ए-पाक तब से आज तक वैसा ही है जैसा नाजिल हुआ था और हमेशा वैसा ही रहेगा। -मुफ्ती खुर्शीद अहमद मिस्बाही, (काजी-ए-शहर)
वसीम रिजवी का दिमागी संतुलन बिगड़ चुका है। उसकी असली जगह जेल है। सरकार दीन व समाज के दुश्मन पर तत्काल एक्शन लेते हुए उसे गिरफ्तार करे। कुरआन-ए-पाक का एक नुक्ता, एक हर्फ भी बदलना असंभव है। कुरआन-ए-पाक में सभी लोगों के लिए रौशनी, हिदायत, हिकमत और शिफा है। यह किताब जिंदगी गुजारने का तरीक बताती है। कुरआन-ए-पाक व सहाबा-ए-किराम की तौहीन किसी भी सूरत में कोई भी गैरतमंद मुसलमान बर्दाश्त नहीं करेगा।-मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी (मुफ्ती-ए-शहर)
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मौजूदा कुरआन-ए-पाक के सभी हुरुफ और आयात हक और अल्लाह की तरफ से नाजिल की हुई हैं। किसी भी खलीफा ने घटाया बढ़ाया नहीं, कुरआन-ए-पाक इसकी खुद गवाही देता है। किसी भी खलीफा के ऊपर घटाने, बढ़ाने का इल्जाम कुरआन-ए-पाक, खलीफा और दीन-ए-इस्लाम की तौहीन है, जिसे कोई भी मुसलमान बर्दाश्त नहीं कर सकता। वसीम रिजवी जैसे समाज दुश्मन को फौरन गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए ताकी ऐसा फिर कोई और न करे। -मुफ्ती खुश मोहम्मद मिस्बाही, इमाम मोती मस्जिद अमरुतानीबाग रसूलपुर
वसीम रिजवी विकृत मानसकिता वाला शख्स है। जो सस्ती लोकप्रियता के लिए मजहब व देश के कानून के साथ खिलवाड़ करता रहता है। ऐसे शख्स की तत्काल गिरफ्तारी की जाए। कड़ी सजा दी जाए। रिजवी देश व समाज पर कलंक है। कुरआन-ए-पाक में बदलाव करना तो दूर सोचना भी पाप है। -मुफ्ती मो. अजहर शम्सी, (नायब काजी)
कुरआन-ए-पाक, पैगंबर-ए-आजम, सहाबा-ए-किराम व अहले बैत की अजमत पर मुसलमान दिलो जान से कुर्बान हैं। बेहुर्मती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वसीम रिजवी का मानसिक संतुलन बहुत दिनों से बिगड़ा हुआ है। उसे इलाज की जरूरत है। वसीम रिजवी जैसे बहुत से दुश्मनाने इस्लाम आए और जहन्नम पहुंच गए मगर कुरआन-ए-पाक से 26 आयत तो दूर की बात एक नुक्ता न मिटा सके। सुप्रीम कोर्ट याचिका खारिज कर वसीम की गिरफ्तारी का आदेश दे। मौलाना जहांगीर अजीजी, इमाम सुब्हानिया जामा मस्जिद तकिया कवलदह
सस्ती लोकप्रियता के लिए वसीम रिजवी किसी भी हद तक जा सकता है। ऐसे शख्स पर लगाम लगनी ही चाहिए। रिजवी की तुरंत दिमागी जांच होनी चाहिए। भारत सरकार व उप्र सरकार को ऐसे शख्स पर लगाम लगानी चाहिए। कुरआन-ए-पाक की हिफाजत का जिम्मा अल्लाह ने लिया है। वसीम रिजवी समाज में जहर घोलना चाहता है। उसकी सही जगह जेल है। न मुसलमान कुरआन-ए-पाक की तौहीन बर्दाश्त करेगा और न ही सहाबा-ए-किराम की। कारी जमील मिस्बाही, सदर मस्जिद जामेनूर बहरामपुर
हम न कुरआन-ए-पाक की तौहीन बर्दाश्त करेंगे न ही चारों खलीफा व सहाबा की। समाज, इंसानियत, देश की अखंडता, एकता व भाईचारे के दुश्मन वसीम रिज़वी को गिरफ्तार कर फांसी की सजा दी जाए। वसीम रिजवी ने कारून, फिरऔन, नमरुद, यजीद को भी पीछे छोड़ दिया है। मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी, इमाम गौसिजा जामा मस्जिद छोटे काजीपुर
वसीम रिजवी फसादी है। उसकी तत्काल गिरफ्तारी की जाए। कौम व देश के दुश्मन को फांसी की सजा दी जाए। अल्लाह की किताब कुरआन-ए-पाक में न पहले बदलाव हुआ, न आज बदलाव होगा और न ही कयामत तक बदलाव मुमकिन है। कुरआन-ए-पाक व सहाबा-ए-किराम का दुश्मन दीन-ए-इस्लाम व पूरी इंसानियत का दुश्मन है।- मौलाना मो. असलम रजवी, इमाम नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर
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वसीम रिजवी कुरआन-ए-पाक व सहाबा-ए-किराम का सबसे बड़ा दुश्मन है। उसकी सोच व कृत्य मानसिक दिवालिएपन को दर्शाती है। ऐसा शख्स अमन शांति के लिए खतरा है। गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा देकर सलाखों के पीछे डाला जाए। अल्लाह ने पैगंबर-ए-आजम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पर कुरआन-ए-पाक नाजिल फरमाया। कुरआन-ए-पाक में हर चीज का इल्म है। कुरआन-ए-पाक तब से आज तक वैसा ही है जैसा नाजिल हुआ था और हमेशा वैसा ही रहेगा। -मुफ्ती खुर्शीद अहमद मिस्बाही, (काजी-ए-शहर)
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वसीम रिजवी का दिमागी संतुलन बिगड़ चुका है। उसकी असली जगह जेल है। सरकार दीन व समाज के दुश्मन पर तत्काल एक्शन लेते हुए उसे गिरफ्तार करे। कुरआन-ए-पाक का एक नुक्ता, एक हर्फ भी बदलना असंभव है। कुरआन-ए-पाक में सभी लोगों के लिए रौशनी, हिदायत, हिकमत और शिफा है। यह किताब जिंदगी गुजारने का तरीक बताती है। कुरआन-ए-पाक व सहाबा-ए-किराम की तौहीन किसी भी सूरत में कोई भी गैरतमंद मुसलमान बर्दाश्त नहीं करेगा।-मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी (मुफ्ती-ए-शहर)
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मौजूदा कुरआन-ए-पाक के सभी हुरुफ और आयात हक और अल्लाह की तरफ से नाजिल की हुई हैं। किसी भी खलीफा ने घटाया बढ़ाया नहीं, कुरआन-ए-पाक इसकी खुद गवाही देता है। किसी भी खलीफा के ऊपर घटाने, बढ़ाने का इल्जाम कुरआन-ए-पाक, खलीफा और दीन-ए-इस्लाम की तौहीन है, जिसे कोई भी मुसलमान बर्दाश्त नहीं कर सकता। वसीम रिजवी जैसे समाज दुश्मन को फौरन गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए ताकी ऐसा फिर कोई और न करे। -मुफ्ती खुश मोहम्मद मिस्बाही, इमाम मोती मस्जिद अमरुतानीबाग रसूलपुर
वसीम रिजवी विकृत मानसकिता वाला शख्स है। जो सस्ती लोकप्रियता के लिए मजहब व देश के कानून के साथ खिलवाड़ करता रहता है। ऐसे शख्स की तत्काल गिरफ्तारी की जाए। कड़ी सजा दी जाए। रिजवी देश व समाज पर कलंक है। कुरआन-ए-पाक में बदलाव करना तो दूर सोचना भी पाप है। -मुफ्ती मो. अजहर शम्सी, (नायब काजी)
कुरआन-ए-पाक, पैगंबर-ए-आजम, सहाबा-ए-किराम व अहले बैत की अजमत पर मुसलमान दिलो जान से कुर्बान हैं। बेहुर्मती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वसीम रिजवी का मानसिक संतुलन बहुत दिनों से बिगड़ा हुआ है। उसे इलाज की जरूरत है। वसीम रिजवी जैसे बहुत से दुश्मनाने इस्लाम आए और जहन्नम पहुंच गए मगर कुरआन-ए-पाक से 26 आयत तो दूर की बात एक नुक्ता न मिटा सके। सुप्रीम कोर्ट याचिका खारिज कर वसीम की गिरफ्तारी का आदेश दे। मौलाना जहांगीर अजीजी, इमाम सुब्हानिया जामा मस्जिद तकिया कवलदह
सस्ती लोकप्रियता के लिए वसीम रिजवी किसी भी हद तक जा सकता है। ऐसे शख्स पर लगाम लगनी ही चाहिए। रिजवी की तुरंत दिमागी जांच होनी चाहिए। भारत सरकार व उप्र सरकार को ऐसे शख्स पर लगाम लगानी चाहिए। कुरआन-ए-पाक की हिफाजत का जिम्मा अल्लाह ने लिया है। वसीम रिजवी समाज में जहर घोलना चाहता है। उसकी सही जगह जेल है। न मुसलमान कुरआन-ए-पाक की तौहीन बर्दाश्त करेगा और न ही सहाबा-ए-किराम की। कारी जमील मिस्बाही, सदर मस्जिद जामेनूर बहरामपुर
हम न कुरआन-ए-पाक की तौहीन बर्दाश्त करेंगे न ही चारों खलीफा व सहाबा की। समाज, इंसानियत, देश की अखंडता, एकता व भाईचारे के दुश्मन वसीम रिज़वी को गिरफ्तार कर फांसी की सजा दी जाए। वसीम रिजवी ने कारून, फिरऔन, नमरुद, यजीद को भी पीछे छोड़ दिया है। मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी, इमाम गौसिजा जामा मस्जिद छोटे काजीपुर
वसीम रिजवी फसादी है। उसकी तत्काल गिरफ्तारी की जाए। कौम व देश के दुश्मन को फांसी की सजा दी जाए। अल्लाह की किताब कुरआन-ए-पाक में न पहले बदलाव हुआ, न आज बदलाव होगा और न ही कयामत तक बदलाव मुमकिन है। कुरआन-ए-पाक व सहाबा-ए-किराम का दुश्मन दीन-ए-इस्लाम व पूरी इंसानियत का दुश्मन है।- मौलाना मो. असलम रजवी, इमाम नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर