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मानवता को जोड़ने वाला सार्वभौमिक सेतु है योग : प्रो. पूनम टंडन
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि योग भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का अमूल्य अंग है, जो भौगोलिक सीमाओं, भाषाओं और सांस्कृतिक विविधताओं से परे जाकर लोगों को जोड़ने का कार्य करता है। योग केवल स्वास्थ्य साधना नहीं बल्कि मानवता को जोड़ने वाला एक सार्वभौमिक सेतु है।
वह बुधवार को डीडीयू एवं तुर्किये के अंकारा विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला ‘योग बंधन-2026’ के तीसरे दिन वर्चुअल आयाेजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि योग वैश्विक सद्भाव, मानसिक शांति और आत्मानुशासन का संदेश देता है। श्री गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मल्टारी (आजमगढ़) के शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रो. प्रशांत राय ने कहा कि योग, प्राणायाम और ध्यान का नियमित अभ्यास तनावमुक्त, संतुलित एवं स्वस्थ जीवन का आधार है।
कार्यक्रम में भारत और तुर्किये के शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों व योग साधकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अंकारा विश्वविद्यालय से प्रो. इब्राहिम डेमिर, हतीचे सारीयिलदिज़, कार्डेलेन, काजिम मावी, शेफिक तुनाहान चेंगिज और सिमगे तेजेल उपस्थित रहे। इस दौरान देश के विभिन्न संस्थानों से प्रो. मनीष प्रताप सिंह, प्रो. मयराम यादव, प्रो. राजीव रंजन और प्रखर आदि ने हिस्सा लिया। संचालन डीडीयू के अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. रामवंत गुप्ता ने किया।
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वह बुधवार को डीडीयू एवं तुर्किये के अंकारा विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला ‘योग बंधन-2026’ के तीसरे दिन वर्चुअल आयाेजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि योग वैश्विक सद्भाव, मानसिक शांति और आत्मानुशासन का संदेश देता है। श्री गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मल्टारी (आजमगढ़) के शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रो. प्रशांत राय ने कहा कि योग, प्राणायाम और ध्यान का नियमित अभ्यास तनावमुक्त, संतुलित एवं स्वस्थ जीवन का आधार है।
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कार्यक्रम में भारत और तुर्किये के शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों व योग साधकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अंकारा विश्वविद्यालय से प्रो. इब्राहिम डेमिर, हतीचे सारीयिलदिज़, कार्डेलेन, काजिम मावी, शेफिक तुनाहान चेंगिज और सिमगे तेजेल उपस्थित रहे। इस दौरान देश के विभिन्न संस्थानों से प्रो. मनीष प्रताप सिंह, प्रो. मयराम यादव, प्रो. राजीव रंजन और प्रखर आदि ने हिस्सा लिया। संचालन डीडीयू के अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. रामवंत गुप्ता ने किया।
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