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मेच्योरिटी मनी पर नौ प्रतिशत ब्याज और 12 हजार हर्जाना देने का आदेश
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मेच्योरिटी मनी पर नौ प्रतिशत ब्याज और 12 हजार हर्जाना देने का आदेश
गोरखपुर। बीमा पॉलिसी की धनराशि का भुगतान परिपक्वता तिथि से लगभग दो वर्ष बाद करने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी के खिलाफ निर्णय दिया है। कंपनी को परिपक्वता धनराशि (मेच्योरिटी मनी) पर नौ प्रतिशत ब्याज देना होगा। इसके अलावा मुकदमे के खर्च के तौर पर भी 12 हजार रुपये का भुगतान करना होगा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश अस्थाना एवं सदस्य कृष्णा नंद मिश्र ने यह फैसला दिया है। पार्क रोड स्थित बीमा कंपनी के शाखा प्रबंधक के विरुद्ध निर्णय दिया कि वह परिवादिनी सुमन राव को परिपक्वता धनराशि 69452 रुपया पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज प्रदान करें। इसके अतिरिक्त 12 हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति व वाद व्यय के रूप में प्रदान करें।
दरअसल, आयोग के समक्ष बशारतपुर खरैया पोखरा निवासी परिवादिनी सुमन राव की ओर से अधिवक्ता शांभवी नंदन पांडेय का कहना था कि परिवादिनी ने मकान खरीदने के लिए लोन लिया था। इसके लिए उन्होंने अपना बीमा बांड विपक्षी की शाखा पर बंधक रखा था। इसकी परिपक्वता तिथि 28 अक्तूबर 2015 थी। पॉलिसी बांड के परिपक्व होने पर जब परिवादिनी ने विपक्षी से संपर्क किया तो विपक्षी द्वारा परिवादिनी को बताया गया कि उनकी पॉलिसी बांड की धनराशि उनके ऋण खाते में समायोजित कर दी जाएगी। लेकिन विपक्षी द्वारा न ही पॉलिसी बांड की धनराशि का भुगतान किया गया न ही उस राशि को परिवादिनी के ऋण खाते में समायोजित किया गया। परिवादिनी ने जब विपक्षी को विधिक नोटिस भेजा तो विपक्षी द्वारा परिवादिनी के ऋण खाते में 16 अक्तूबर 2017 को 69452 रुपये का भुगतान किया गया। परिवादिनी ने जब 28 अक्तूबर 2015 से 16 अक्तूबर 2017 तक के ब्याज की मांग की तो विपक्षी टालमटोल करते रहे और ब्याज का भुगतान नहीं किया।
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गोरखपुर। बीमा पॉलिसी की धनराशि का भुगतान परिपक्वता तिथि से लगभग दो वर्ष बाद करने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी के खिलाफ निर्णय दिया है। कंपनी को परिपक्वता धनराशि (मेच्योरिटी मनी) पर नौ प्रतिशत ब्याज देना होगा। इसके अलावा मुकदमे के खर्च के तौर पर भी 12 हजार रुपये का भुगतान करना होगा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश अस्थाना एवं सदस्य कृष्णा नंद मिश्र ने यह फैसला दिया है। पार्क रोड स्थित बीमा कंपनी के शाखा प्रबंधक के विरुद्ध निर्णय दिया कि वह परिवादिनी सुमन राव को परिपक्वता धनराशि 69452 रुपया पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज प्रदान करें। इसके अतिरिक्त 12 हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति व वाद व्यय के रूप में प्रदान करें।
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दरअसल, आयोग के समक्ष बशारतपुर खरैया पोखरा निवासी परिवादिनी सुमन राव की ओर से अधिवक्ता शांभवी नंदन पांडेय का कहना था कि परिवादिनी ने मकान खरीदने के लिए लोन लिया था। इसके लिए उन्होंने अपना बीमा बांड विपक्षी की शाखा पर बंधक रखा था। इसकी परिपक्वता तिथि 28 अक्तूबर 2015 थी। पॉलिसी बांड के परिपक्व होने पर जब परिवादिनी ने विपक्षी से संपर्क किया तो विपक्षी द्वारा परिवादिनी को बताया गया कि उनकी पॉलिसी बांड की धनराशि उनके ऋण खाते में समायोजित कर दी जाएगी। लेकिन विपक्षी द्वारा न ही पॉलिसी बांड की धनराशि का भुगतान किया गया न ही उस राशि को परिवादिनी के ऋण खाते में समायोजित किया गया। परिवादिनी ने जब विपक्षी को विधिक नोटिस भेजा तो विपक्षी द्वारा परिवादिनी के ऋण खाते में 16 अक्तूबर 2017 को 69452 रुपये का भुगतान किया गया। परिवादिनी ने जब 28 अक्तूबर 2015 से 16 अक्तूबर 2017 तक के ब्याज की मांग की तो विपक्षी टालमटोल करते रहे और ब्याज का भुगतान नहीं किया।
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