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Gorakhpur News: रामगढ़ताल में बोट नहीं चल पाने पर संचालक ने लिखा पत्र
Sun, 02 Jun 2024 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 02 Jun 2024 03:00 AM IST
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प्लेटफार्म नंबर एक, तीन या चार आवंटित करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। रामगढ़ताल में पर्यटन मोटर बोट छह जनवरी से प्लेटफार्म नंबर सात से चलाई जा रही है। बोट जेटी से दूर होने के कारण कम पर्यटक इस डबल डेकर मोटर बोट का आनंद उठाने पहुंच पा रहे हैं। बोट के संचालक मेसर्स निशा ट्रेडर्स के धर्मेंद्र नाथ शुक्ला ने प्राधिकरण उपाध्यक्ष को पत्र लिखकर प्लेटफार्म नंबर एक, तीन या चार का आवंटन करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्लेटफार्म नंबर सात से वह प्राधिकरण को 266435 रुपये का मासिक किराया भरने में असमर्थ हैं।
संचालक का कहना है कि दो साल से वे रामगढ़ताल नया सवेरा में प्लेटफार्म नबर दो से अपने पर्यटन मोटर बोट का संचालन कर रहे थे। वहां से इतनी आय हो जाती थी कि नियमित रूप से 266435 रुपये मासिक किराया जमा कर दे रहे थे। इस बार तीन जनवरी को जैसे ही किराया जमा किया, छह जनवरी को प्लेटफार्म नंबर सात पर शिफ्ट कर उसे आवंटित कर दिया। अब आलम यह है कि वहां बोट चलाने वाले कर्मचारियों का वेतन जुटाना भी मुश्किल है। उनका कहना है कि अब तक उनके पत्र पर प्राधिकरण कोई निर्णय नहीं ले सका है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। रामगढ़ताल में पर्यटन मोटर बोट छह जनवरी से प्लेटफार्म नंबर सात से चलाई जा रही है। बोट जेटी से दूर होने के कारण कम पर्यटक इस डबल डेकर मोटर बोट का आनंद उठाने पहुंच पा रहे हैं। बोट के संचालक मेसर्स निशा ट्रेडर्स के धर्मेंद्र नाथ शुक्ला ने प्राधिकरण उपाध्यक्ष को पत्र लिखकर प्लेटफार्म नंबर एक, तीन या चार का आवंटन करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्लेटफार्म नंबर सात से वह प्राधिकरण को 266435 रुपये का मासिक किराया भरने में असमर्थ हैं।
संचालक का कहना है कि दो साल से वे रामगढ़ताल नया सवेरा में प्लेटफार्म नबर दो से अपने पर्यटन मोटर बोट का संचालन कर रहे थे। वहां से इतनी आय हो जाती थी कि नियमित रूप से 266435 रुपये मासिक किराया जमा कर दे रहे थे। इस बार तीन जनवरी को जैसे ही किराया जमा किया, छह जनवरी को प्लेटफार्म नंबर सात पर शिफ्ट कर उसे आवंटित कर दिया। अब आलम यह है कि वहां बोट चलाने वाले कर्मचारियों का वेतन जुटाना भी मुश्किल है। उनका कहना है कि अब तक उनके पत्र पर प्राधिकरण कोई निर्णय नहीं ले सका है।
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