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Gorakhpur News: किस नए विषय पर करेंगे शोध... विभाग दें पांच साल की कार्ययोजना
Sun, 21 Apr 2024 05:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 21 Apr 2024 05:20 AM IST
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डीडीयू के सभी विभाग एक साल, तीन साल और पांच साल की देंगे कार्ययोजना
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षक और विभाग से उनकी पांच साल तक की कार्ययोजना मांगी गई है। वे आगे किस नए विषय पर शोध करेंगे या उनके अनुसार संबंधित पाठ्यक्रम में और क्या बदलाव हो सकता है, की जानकारी मांगी गई। इसकी रिपोर्ट बनाकर विभागों को 10 मई तक जमा करनी है। उसके बाद आगे की कार्ययोजना तय की जाएगी।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय में शोध को बढ़ावा देने, पाठ्यक्रम में सुधार और नई शिक्षा नीति के तहत जरूरी बदलाव को लेकर विभागों से शॉर्ट टर्म (एक साल), मिड टर्म (तीन साल) और लॉन्ग टर्म (पांच साल) की कार्ययोजना मांगी है। इसके पीछे का मकसद है कि विश्वविद्यालय में शोध का स्तर बढ़े और नए आइडिया आएं।
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पीएम उषा से मिलेगी मदद
विश्वविद्यालय को पीएम उषा के तहत 100 करोड़ रुपये की ग्रांट को मंजूरी मिली है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य शोध कार्यों को बढ़ावा देना है। विभागों से नए आइडिया और सुझाव के बाद शोध के लिए जरूरी उपकरणों को खरीदा जाएगा। साथ ही अच्छे विषय पर शोध के लिए उन्हें इस ग्रांट से फंडिंग भी दी जाएगी। सबसे पहले नए आइडिया और सुझाव विभाग शिक्षकों से लेगा। इसके बाद वे उनकी रिपोर्ट बनाकर विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपेंगे। वहां पर इनका अध्ययन कर उन्हें मदद दी जाएगी।
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विभागों में बनेगा गुणवत्ता आश्वासन सेल
विश्वविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन सेल (आईक्यूएसी) का कार्य गुणवत्ता आश्वासन और गुणवत्ता संवर्धन गतिविधियों की योजना बनाना, मार्गदर्शन करना और निगरानी करना है। अब इसके लिए विभाग स्तर पर भी सेल बनाया जाएगा। इससे विश्वविद्यालय को तमाम रैंकिंग के लिए डाटा सहेजने में परेशानी नहीं होगी। सभी विभाग अपने स्तर से आईक्यूएसी को डाटा भेजेंगे।
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कोट...
विभागों से शॉर्ट टर्म, मिर्ड टर्म और लॉन्ग टर्म प्लान मांगे गए हैं। इसमें नए विषय पर शोध, पाठ्यक्रम में सुधार आदि पर सुझाव मांगा गया है। इसे उन्हें 10 मई तक देना है। साथ ही अब विभागों में भी गुणवत्ता आश्वासन सेल का गठन किया जाएगा।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षक और विभाग से उनकी पांच साल तक की कार्ययोजना मांगी गई है। वे आगे किस नए विषय पर शोध करेंगे या उनके अनुसार संबंधित पाठ्यक्रम में और क्या बदलाव हो सकता है, की जानकारी मांगी गई। इसकी रिपोर्ट बनाकर विभागों को 10 मई तक जमा करनी है। उसके बाद आगे की कार्ययोजना तय की जाएगी।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय में शोध को बढ़ावा देने, पाठ्यक्रम में सुधार और नई शिक्षा नीति के तहत जरूरी बदलाव को लेकर विभागों से शॉर्ट टर्म (एक साल), मिड टर्म (तीन साल) और लॉन्ग टर्म (पांच साल) की कार्ययोजना मांगी है। इसके पीछे का मकसद है कि विश्वविद्यालय में शोध का स्तर बढ़े और नए आइडिया आएं।
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पीएम उषा से मिलेगी मदद
विश्वविद्यालय को पीएम उषा के तहत 100 करोड़ रुपये की ग्रांट को मंजूरी मिली है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य शोध कार्यों को बढ़ावा देना है। विभागों से नए आइडिया और सुझाव के बाद शोध के लिए जरूरी उपकरणों को खरीदा जाएगा। साथ ही अच्छे विषय पर शोध के लिए उन्हें इस ग्रांट से फंडिंग भी दी जाएगी। सबसे पहले नए आइडिया और सुझाव विभाग शिक्षकों से लेगा। इसके बाद वे उनकी रिपोर्ट बनाकर विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपेंगे। वहां पर इनका अध्ययन कर उन्हें मदद दी जाएगी।
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विभागों में बनेगा गुणवत्ता आश्वासन सेल
विश्वविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन सेल (आईक्यूएसी) का कार्य गुणवत्ता आश्वासन और गुणवत्ता संवर्धन गतिविधियों की योजना बनाना, मार्गदर्शन करना और निगरानी करना है। अब इसके लिए विभाग स्तर पर भी सेल बनाया जाएगा। इससे विश्वविद्यालय को तमाम रैंकिंग के लिए डाटा सहेजने में परेशानी नहीं होगी। सभी विभाग अपने स्तर से आईक्यूएसी को डाटा भेजेंगे।
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कोट...
विभागों से शॉर्ट टर्म, मिर्ड टर्म और लॉन्ग टर्म प्लान मांगे गए हैं। इसमें नए विषय पर शोध, पाठ्यक्रम में सुधार आदि पर सुझाव मांगा गया है। इसे उन्हें 10 मई तक देना है। साथ ही अब विभागों में भी गुणवत्ता आश्वासन सेल का गठन किया जाएगा।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति