{"_id":"6142f9a88ebc3e5ad880194e","slug":"old-idols-of-shri-ram-reached-state-buddhist-museum","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर: श्रीराम की 400 साल पुरानी मूर्तियां संग्रहालय पहुंचीं, कीमत के आकलन में जुटा बौद्ध संग्रहालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर: श्रीराम की 400 साल पुरानी मूर्तियां संग्रहालय पहुंचीं, कीमत के आकलन में जुटा बौद्ध संग्रहालय
Thu, 16 Sep 2021 01:30 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 16 Sep 2021 01:30 PM IST
सार
महाराजगंज के घुघली और गोंडा के इटियाथोक थाने से चार कलाकृतियां को भेजा गया।
विज्ञापन
श्रीराम की पुरानी मूर्ति।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोरखपुर के राजकीय बौद्ध संग्रहालय की ओर से पुलिस के मालखाने में जमा गैर विवादित प्राचीन कलाकृतियों के संरक्षण के लिए चलाई जा रही मुहिम अब रंग लाने लगी है। बुधवार को संग्रहालय को गोंडा के इटियाथोक थाने से 400 वर्ष पुरानी दो मूर्तियां प्राप्त हुई हैं। इनमें प्रभु श्रीराम के होने की संभावना है। इसके साथ ही महाराजगंज के घुघली थाने से दो प्राचीन कलाकृतियां मिलीं हैं। इन मूर्तियों की कीमत के आकलन में बौद्ध संग्रहालय अभी जुटा है।
बौद्ध संग्रहालय के उपनिदेशक डॉ. मनोज गौतम ने बताया कि गोंडा के इटियाथोक थाने से मिली दो प्राचीन मूर्तियां संभवत: भगवान रामचंद्र की हैं। चूंकि मूर्तियों पर कोई विशेष प्रतीक नहीं है। ऐसी स्थिति में प्रतिमाशास्त्रीय पहचान स्पष्ट नहीं है। दोनो प्रतिमाएं लगभग 17 वीं शताब्दी की हैं। वहीं महाराजगंज के घुघली थाने से मिली कलाकृतियां में दो किसी मंदिर के द्वार स्तंभ हैं। जो स्लेटी/भूरे रंग की प्रस्तर कलाकृतियां हैं।
इन दोनों द्वार स्तंभों में से एक पर घट लिए मकर वाहिनी गंगा को दिखाया गया है तथा दूसरे स्तंभ पर कुर्म पर सवार घट लिए यमुना को दिखाया गया है। जो संभवत: भगवान बुद्ध की हैं। ये स्तंभ लगभग 13वीं से 14वीं शताब्दी के बीच के हैं। इस प्रतिमा पर कोई विशेष अंकन नहीं है। उपनिदेशक ने कहा कि अपर पुलिस महानिदेशक अखिल कुमार के सहयोग से ही प्राचीन मूर्तियों के संरक्षण का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बौद्ध संग्रहालय के उपनिदेशक डॉ. मनोज गौतम ने बताया कि गोंडा के इटियाथोक थाने से मिली दो प्राचीन मूर्तियां संभवत: भगवान रामचंद्र की हैं। चूंकि मूर्तियों पर कोई विशेष प्रतीक नहीं है। ऐसी स्थिति में प्रतिमाशास्त्रीय पहचान स्पष्ट नहीं है। दोनो प्रतिमाएं लगभग 17 वीं शताब्दी की हैं। वहीं महाराजगंज के घुघली थाने से मिली कलाकृतियां में दो किसी मंदिर के द्वार स्तंभ हैं। जो स्लेटी/भूरे रंग की प्रस्तर कलाकृतियां हैं।
विज्ञापन
इन दोनों द्वार स्तंभों में से एक पर घट लिए मकर वाहिनी गंगा को दिखाया गया है तथा दूसरे स्तंभ पर कुर्म पर सवार घट लिए यमुना को दिखाया गया है। जो संभवत: भगवान बुद्ध की हैं। ये स्तंभ लगभग 13वीं से 14वीं शताब्दी के बीच के हैं। इस प्रतिमा पर कोई विशेष अंकन नहीं है। उपनिदेशक ने कहा कि अपर पुलिस महानिदेशक अखिल कुमार के सहयोग से ही प्राचीन मूर्तियों के संरक्षण का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
विज्ञापन