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Gorakhpur: अब मशीनें करेंगी रामगढ़ताल की सफाई, लगाए जाएंगे फ्लोटिंग बैरियर्स
Sun, 20 Nov 2022 12:30 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 20 Nov 2022 12:30 PM IST
सार
रामगढ़ताल में शहर के करीब छह नालों का पानी गिरता है। इसे रोकने के लिए फ्लोटिंग बैरियर्स लगाए जाएंगे ताकि नालों से होकर आने वाली गंदगी, फ्लोटिंग बैरियर्स के जाल में फंस जाए और ताल में सिर्फ पानी गिरे।
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रामगढ़ताल।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
रामगढ़ताल में जलकुंभी आदि की सफाई अब पूरी तरह मशीनों से होगी। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने इच्छुक फर्म से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) आमंत्रित किया है। पांच दिसंबर आवेदन का आखिरी मौका है।
अभी तक प्राधिकरण अपने संसाधनों से ताल की सफाई कराता है। 15-20 की संख्या में मजदूर लगाकर नाव आदि की मदद से जलकुंभी साफ कराई जाती है। इससे समय और धन दोनों ज्यादा खर्च हो रहे थे। करीब 1700 एकड़ में ताल के फैले होने की वजह से ठीक से सफाई भी नहीं हो पाती है।
रामगढ़ताल में शहर के करीब छह नालों का पानी गिरता है। इसे रोकने के लिए फ्लोटिंग बैरियर्स लगाए जाएंगे ताकि नालों से होकर आने वाली गंदगी, फ्लोटिंग बैरियर्स के जाल में फंस जाए और ताल में सिर्फ पानी गिरे।
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इसी तरह ताल में फ्लोटिंग वेटलैंड भी तैयार करने की योजना है। स्टील की प्लेट के आकार के पानी में तैरते इस वेटलैंड पर बिना मिट्टी के खेती यानी हाइड्रोपॉनिक्स फार्मिंग की जाएगी। पर्यावरण के अनुकूल हाइड्रोपॉनिक्स के इस्तेमाल से इन वेटलैंड पर खुशबूदार फूल वाले पौधे लगाए जाएंगे।
ताल के पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए नियमित अंतराल पर इसके पानी का नमूना भी जांच के लिए भेजा जाएगा। गुणवत्ता खराब मिलने पर उसे सही करने के उपाय किए जाएंगे। प्राधिकरण के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन के मुताबिक रामगढ़ताल के साथ ही उसके सामने 48 एकड़ में फैली वाटर बॉडी की वैज्ञानिक तरीके से मशीनों से ही सफाई होगी।
जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि रामगढ़ताल पर्यावरण संरक्षण एवं इको टूरिज्म के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। ऐसे में रामगढ़ताल एवं उसकी वॉटर बाड़ी की सफाई मशीनों से कराने का निर्णय किया गया है। इसके लिए ईओआई आमंत्रित की गई है।
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अभी तक प्राधिकरण अपने संसाधनों से ताल की सफाई कराता है। 15-20 की संख्या में मजदूर लगाकर नाव आदि की मदद से जलकुंभी साफ कराई जाती है। इससे समय और धन दोनों ज्यादा खर्च हो रहे थे। करीब 1700 एकड़ में ताल के फैले होने की वजह से ठीक से सफाई भी नहीं हो पाती है।
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रामगढ़ताल में शहर के करीब छह नालों का पानी गिरता है। इसे रोकने के लिए फ्लोटिंग बैरियर्स लगाए जाएंगे ताकि नालों से होकर आने वाली गंदगी, फ्लोटिंग बैरियर्स के जाल में फंस जाए और ताल में सिर्फ पानी गिरे।
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इसी तरह ताल में फ्लोटिंग वेटलैंड भी तैयार करने की योजना है। स्टील की प्लेट के आकार के पानी में तैरते इस वेटलैंड पर बिना मिट्टी के खेती यानी हाइड्रोपॉनिक्स फार्मिंग की जाएगी। पर्यावरण के अनुकूल हाइड्रोपॉनिक्स के इस्तेमाल से इन वेटलैंड पर खुशबूदार फूल वाले पौधे लगाए जाएंगे।
ताल के पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए नियमित अंतराल पर इसके पानी का नमूना भी जांच के लिए भेजा जाएगा। गुणवत्ता खराब मिलने पर उसे सही करने के उपाय किए जाएंगे। प्राधिकरण के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन के मुताबिक रामगढ़ताल के साथ ही उसके सामने 48 एकड़ में फैली वाटर बॉडी की वैज्ञानिक तरीके से मशीनों से ही सफाई होगी।
जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि रामगढ़ताल पर्यावरण संरक्षण एवं इको टूरिज्म के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। ऐसे में रामगढ़ताल एवं उसकी वॉटर बाड़ी की सफाई मशीनों से कराने का निर्णय किया गया है। इसके लिए ईओआई आमंत्रित की गई है।