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Gorakhpur News: अब ट्रेनों में ब्रेक लगाने से भी बनेगी बिजली, 30 फीसदी होगी ऊर्जा की बचत
Fri, 19 Jan 2024 12:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jan 2024 12:38 PM IST
सार
एनईआर सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीकी थ्री फेज लोकोमोटिव के री-जेनेरटीव ब्रेकिंग से एनईआर द्वारा इस वित्त वर्ष में दिसंबर तक 36 मिलियन यूनिट ऊर्जा की बचत की गई, जिससे 26 करोड़ के राजस्व की बचत हुई है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ट्रैक पर 100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ती ट्रेन को रोकने पर घर्षण के चलते काफी ऊर्जा खर्च होती थी। लेकिन, अब रेलवे इस स्थिति में भी करीब 30 प्रतिशत ऊर्जा की बचत करेगा। इससे बिजली की खपत घटेगी, जिससे रेलवे का मुनाफा भी बढ़ेगा।
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दरअसल यह संभव होगा गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने के लिए लगे उपकरण से। वंदे भारत में इसका सफल प्रयोग होने के बाद अब अन्य प्रमुख ट्रेनों में भी इसी इंजन को लगाया जाएगा। अभी 36 नए थ्री फेज लोकोमोटिव ऐसे हैं, जिनमें यह सुविधा शुरू हो गई है।
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पहले इलेक्ट्रिक रेल इंजन टू फेज वाले डीसी करंट (डायरेक्ट करंट जो एक ही दिशा में बहता है) से चलते थे। अब इंजन थ्री फेज के एसी करंट (अल्टरनेटिंग करंट, यह दिशा बदलता रहता है) से चल रहे हैं। थ्री फेज इंजन में री-जेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम है। इसमें ब्रेक लगाते ही ओएचई से सप्लाई बंद हो जाती है और पहियों की गति से बनी यांत्रिक ऊर्जा विपरीत चुंबकीय क्षेत्र पैदा करती है और जेनरेटर की मोटर रिवर्स गति करते हुए अल्टरनेटर का कार्य कर बिजली बनाने लगती है।
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इंजन में एनर्जी मीटर लगा होता है, जिसमें ग्रिड से ली गई बिजली और वापस दी गई बिजली का आंकड़ा दर्ज होता है। कुल खपत में से लौटाई गई बिजली की मात्रा घटकर वास्तविक खपत के रूप में दर्ज हो जाती है।
पूर्वोत्तर रेलवे की प्रमुख ट्रेन वंदे भारत में लगे नई तकनीक के थ्री फेज लोकोमोटिव इंजन से यात्रा में ब्रेक लगाने के दौरान बिजली का उत्पादन होता है। इस तकनीक के 36 इलेक्ट्रिक इंजन हैं, जो सप्तक्रांति, गोरखधाम, अवध एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों में लगाए जा चुके हैं।
एनईआर सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीकी थ्री फेज लोकोमोटिव के री-जेनेरटीव ब्रेकिंग से एनईआर द्वारा इस वित्त वर्ष में दिसंबर तक 36 मिलियन यूनिट ऊर्जा की बचत की गई, जिससे 26 करोड़ के राजस्व की बचत हुई है। इस तकनीक के माध्यम से ब्रेकिंग के दौरान उत्पन्न गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर इसका उपयोग किया जाता है।
पूर्वोत्तर रेलवे की प्रमुख ट्रेन वंदे भारत में लगे नई तकनीक के थ्री फेज लोकोमोटिव इंजन से यात्रा में ब्रेक लगाने के दौरान बिजली का उत्पादन होता है। इस तकनीक के 36 इलेक्ट्रिक इंजन हैं, जो सप्तक्रांति, गोरखधाम, अवध एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों में लगाए जा चुके हैं।
एनईआर सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीकी थ्री फेज लोकोमोटिव के री-जेनेरटीव ब्रेकिंग से एनईआर द्वारा इस वित्त वर्ष में दिसंबर तक 36 मिलियन यूनिट ऊर्जा की बचत की गई, जिससे 26 करोड़ के राजस्व की बचत हुई है। इस तकनीक के माध्यम से ब्रेकिंग के दौरान उत्पन्न गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर इसका उपयोग किया जाता है।