{"_id":"600a7c4dfff980594745459d","slug":"notice-of-termination-of-b-ed-m-ed-of-six-colleges-including-gorakhpur-university","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर विश्वविद्यालय समेत छह कॉलेजों की बीएड-एमएड की मान्यता समाप्त करने की नोटिस, वजह जान लें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर विश्वविद्यालय समेत छह कॉलेजों की बीएड-एमएड की मान्यता समाप्त करने की नोटिस, वजह जान लें
Fri, 22 Jan 2021 12:48 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 22 Jan 2021 12:48 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) की उत्तर क्षेत्रीय समिति ने, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के बीएड व एमएड पाठ्यक्रम सहित उससे संबद्ध छह महाविद्यालयों की बीएड की मान्यता समाप्त करने के लिए नोटिस जारी की है।
एनसीटीई ने विश्वविद्यालय और कॉलेजों पर रेग्युलेशन-2014 के नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया है। नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर एनसीटीई विश्वविद्यालय और सभी सात कॉलेजों की मान्यता समाप्त कर सकता है।
बीएड का पाठ्यक्रम दो वर्ष करने के बाद एनसीटीई ने मान्यता देने के नियमों में बदलाव करते हुए रेग्युलेशन-2014 जारी किया। सभी कॉलेजों को इन नियमों को पूरा करने के लिए 31 अक्तूबर 2015 का समय दिया गया था। लेकिन तय वक्त पर कॉलेज मानदंड पूरा नहीं कर सके। इस पर एनसीटीई ने फिर से छह महीने का समय दिया।
विज्ञापन
इसके बाद भी विश्वविद्यालय और कुछ महाविद्यालय एनसीटीई के रेग्युलेशन-2014 का पालन नहीं कर सके। इसपर एनसीटीई ने सेक्शन-17 के तहत नोटिस जारी किया है। सेक्शन-17 के अनुसार यदि एनसीटीई विश्वविद्यालय और कॉलेज के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है तो मान्यता समाप्त कर दी जाएगी।
विज्ञापन
एनसीटीई ने विश्वविद्यालय और कॉलेजों पर रेग्युलेशन-2014 के नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया है। नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर एनसीटीई विश्वविद्यालय और सभी सात कॉलेजों की मान्यता समाप्त कर सकता है।
विज्ञापन
बीएड का पाठ्यक्रम दो वर्ष करने के बाद एनसीटीई ने मान्यता देने के नियमों में बदलाव करते हुए रेग्युलेशन-2014 जारी किया। सभी कॉलेजों को इन नियमों को पूरा करने के लिए 31 अक्तूबर 2015 का समय दिया गया था। लेकिन तय वक्त पर कॉलेज मानदंड पूरा नहीं कर सके। इस पर एनसीटीई ने फिर से छह महीने का समय दिया।
विज्ञापन
इसके बाद भी विश्वविद्यालय और कुछ महाविद्यालय एनसीटीई के रेग्युलेशन-2014 का पालन नहीं कर सके। इसपर एनसीटीई ने सेक्शन-17 के तहत नोटिस जारी किया है। सेक्शन-17 के अनुसार यदि एनसीटीई विश्वविद्यालय और कॉलेज के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है तो मान्यता समाप्त कर दी जाएगी।
एनसीटीई ने इनके खिलाफ जारी किया है नोटिस
- दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर
- सेंट एंड्रयूज कॉलेज, गोरखपुर
- चंद्रकांति देवी रमावती देवी आर्य महिला महाविद्यालय, गोरखपुर
- वीर बहादुर सिंह महाविद्यालय, हरनही, गोरखपुर
- विद्यार्थी स्नातक महाविद्यालय, जगदीशपुर, कुशीनगर
- मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज भाटपार रानी, देवरिया
- सुखदेव प्रसाद त्रिपाठी, महाविद्यालय, कुशीनगर
1469 शिक्षण संस्थाओं को भी नोटिस
एनसीटीई के उत्तर क्षेत्रीय समिति ने 1469 ऐसे महाविद्यालयों को भी नोटिस जारी किया है जिन महाविद्यालयों के कागजात उनके कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं। एनसीटीई ने इसे लेकर जल्द से जल्द महाविद्यालयों को जवाब देने के लिए कहा है। इन महाविद्यालयों में गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध कई महाविद्यालय शामिल हैं। ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट कॉलेज के राष्ट्रीय महासचिव ने इसे लेकर एसोसिएशन की ओर से विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि शिक्षण संस्थानों से धन उगाही के लिए यह नोटिस जारी की गई है। एसोसिएशन इसका विरोध करता है।