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गोरखपुर: अब लालफीताशाही में उलझा नूर मोहम्मद की जमीन का मामला, प्रशासन से मांगा न्याय
Tue, 05 Oct 2021 10:47 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 05 Oct 2021 10:47 AM IST
सार
तहसील से भेजी गई मामले की जांच रिपोर्ट एसडीएम कार्यालय में ही तोड़ रही दम, एसडीएम सहजनवां सुरेश राय ने मामला चकबंदी विभाग का बताकर पल्ला झाड़ा।
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नूर मोहम्मद
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर में भूमाफिया की हेराफेरी का शिकार हो पैतृक जमीन-आवास गंवाने वाले नूर मोहम्मद अब लालफीताशाही के चक्कर में फंस गए हैं। तहसील स्तर की कमेटी की जांच रिपोर्ट एसडीएम कार्यालय में अटकी हुई है। एसडीएम सहजनवां इसे चकबंदी कार्यालय का मामला बताकर जांच रिपोर्ट की जानकारी से ही इनकार कर रहे हैं। ऐसे में पीड़ित ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अपर पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है।
सहजनवां तहसील क्षेत्र के जयपुर गौसपुर निवासी नूर मोहम्मद की जमीन कुछ लोगों ने उन्हें मृत दर्शा कर हड़प ली थी। तीस वर्ष बाद दिल्ली से लौटे नूर मोहम्मद को इसकी जानकारी हुई तो डीएम सहित आला अधिकारियों से शिकायत की थी। तहसीलदार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। 27 सितंबर को टीम ने पीड़ित, विपक्षी और गांव वालों के बयान दर्ज किए थे।
आरोपी पक्ष के लोग जांच टीम को जमीन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके थे। जांच में नूर मोहम्मद का मृत्यु प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से बना हुआ पाया गया था। टीम ने इसकी रिपोर्ट दो दिन बाद ही तहसीलदार को सौंप दी थी। तहसीलदार सहजनवां बृज मोहन शुक्ला ने बताया कि उन्होंने जांच रिपोर्ट तीन दिन पहले ही एसडीएम सहजनवां को भेज दी है। अब आगे की कार्रवाई एसडीएम और आला अधिकारियों के स्तर पर की जानी है।
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वहीं, इस मामले से एसडीएम सहजनवां सुरेश कुमार राय ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मामला चकबंदी कार्यालय से जुड़ा है। तहसील से भेजी गई जांच रिपोर्ट के बारे में उन्होंने कहा कि इसकी कोई जानकारी नहीं है। उन्हें इसमें कोई निर्णय नहीं लेना है। न्याय नहीं मिलने पर अब पीड़ित ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अपर पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है।
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सहजनवां तहसील क्षेत्र के जयपुर गौसपुर निवासी नूर मोहम्मद की जमीन कुछ लोगों ने उन्हें मृत दर्शा कर हड़प ली थी। तीस वर्ष बाद दिल्ली से लौटे नूर मोहम्मद को इसकी जानकारी हुई तो डीएम सहित आला अधिकारियों से शिकायत की थी। तहसीलदार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। 27 सितंबर को टीम ने पीड़ित, विपक्षी और गांव वालों के बयान दर्ज किए थे।
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आरोपी पक्ष के लोग जांच टीम को जमीन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके थे। जांच में नूर मोहम्मद का मृत्यु प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से बना हुआ पाया गया था। टीम ने इसकी रिपोर्ट दो दिन बाद ही तहसीलदार को सौंप दी थी। तहसीलदार सहजनवां बृज मोहन शुक्ला ने बताया कि उन्होंने जांच रिपोर्ट तीन दिन पहले ही एसडीएम सहजनवां को भेज दी है। अब आगे की कार्रवाई एसडीएम और आला अधिकारियों के स्तर पर की जानी है।
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वहीं, इस मामले से एसडीएम सहजनवां सुरेश कुमार राय ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मामला चकबंदी कार्यालय से जुड़ा है। तहसील से भेजी गई जांच रिपोर्ट के बारे में उन्होंने कहा कि इसकी कोई जानकारी नहीं है। उन्हें इसमें कोई निर्णय नहीं लेना है। न्याय नहीं मिलने पर अब पीड़ित ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अपर पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है।