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यूपी: यहां कैसे हो खेती किसानी, जब नहरों में ही नहीं है पानी
Tue, 15 Dec 2020 03:47 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 15 Dec 2020 03:47 PM IST
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महराजगंज में सूखी नहर।
- फोटो : अमर उजाला।
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महराजगंज जिले में इन दिनों में नहरो में पानी नहीं है। जिससे किसान परेशान हैं। उन्हें पंपिंगसेट से खेत की सिंचाई करनी पड़ रही है। गंडक नहर प्रणाली की नहरों के भरोसे सिंचाई का दारोमदार है। लेकिन आज यही नहरें किसानों के लिए समस्या बन गईं हैं।
नहरों में सिल्ट जमा होने के कारण सिंचाई क्षमता कम हो गई है। साथ ही कुलावे भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नहरों के भरोसे खेतों की सिंचाई की आस में जुटे किसान इन दिनों मायूस हैं।
जानकारी के अनुसार मुख्य पश्चिमी नहर से निकली नहर परतावल क्षेत्र से होकर कुशीनगर, देवरिया एवं गोरखपुर जनपद में खेतों की सिंचाई करती हैं। इन दिनों नहर में पानी रहने से किसान परेशान हैं। किसान सोच नहीं पा रहे हैं कि वह खेत की सिंचाई कैसे करें?
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आलम यह है कि तरकुलवा माइनर, डेरवा, माइनर, रजवाहा, देवरिया शाखा, छपिया नहर सूखी है। नहरों के किनारे खेतों की सिंचाई के लिए किसान पंपिग सेट का सहारा ले रहे हैं। किसानों का कहना है कि नहरों में पानी नहीं पहुंचा है, कब जाएगा कोई ठिकाना नहीं है।
वीरेंद्र यादव ने कहा कि नहरों की सफाई ठीक ढंग से नहीं हुई है। अगर पानी भी आ गया तो खेतों तक पहुंचना मुश्किल है। इसके अलावा नहरों को जगह-जगह काट दिया गया, जिससे सिंचाई में समस्या होगी। नहर में पानी छोड़ने में देरी हो रही है। सिंचाई के वक्त जब नहर में पानी नहीं रहेगी तो बाद में आने से क्या फायदा होगा।
रामनिवास तिवारी ने बताया कि किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए दावे तो बहुत किए जाते हैं। लेकिन हकीकत में समस्याएं दूर नहीं हो पाती है। पंपिंग सेट से सिंचाई करने में जेब ढ़ीली हो जा रही है।
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नहरों में सिल्ट जमा होने के कारण सिंचाई क्षमता कम हो गई है। साथ ही कुलावे भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नहरों के भरोसे खेतों की सिंचाई की आस में जुटे किसान इन दिनों मायूस हैं।
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जानकारी के अनुसार मुख्य पश्चिमी नहर से निकली नहर परतावल क्षेत्र से होकर कुशीनगर, देवरिया एवं गोरखपुर जनपद में खेतों की सिंचाई करती हैं। इन दिनों नहर में पानी रहने से किसान परेशान हैं। किसान सोच नहीं पा रहे हैं कि वह खेत की सिंचाई कैसे करें?
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आलम यह है कि तरकुलवा माइनर, डेरवा, माइनर, रजवाहा, देवरिया शाखा, छपिया नहर सूखी है। नहरों के किनारे खेतों की सिंचाई के लिए किसान पंपिग सेट का सहारा ले रहे हैं। किसानों का कहना है कि नहरों में पानी नहीं पहुंचा है, कब जाएगा कोई ठिकाना नहीं है।
वीरेंद्र यादव ने कहा कि नहरों की सफाई ठीक ढंग से नहीं हुई है। अगर पानी भी आ गया तो खेतों तक पहुंचना मुश्किल है। इसके अलावा नहरों को जगह-जगह काट दिया गया, जिससे सिंचाई में समस्या होगी। नहर में पानी छोड़ने में देरी हो रही है। सिंचाई के वक्त जब नहर में पानी नहीं रहेगी तो बाद में आने से क्या फायदा होगा।
रामनिवास तिवारी ने बताया कि किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए दावे तो बहुत किए जाते हैं। लेकिन हकीकत में समस्याएं दूर नहीं हो पाती है। पंपिंग सेट से सिंचाई करने में जेब ढ़ीली हो जा रही है।