बदल रहा है गोरखपुर: उत्पादन की चिंता न खपाने की...कच्चे माल से लेकर बाजार तक सब आसपास
सीईओ गीडा अनुज मलिक ने कहा कि गोरखपुर आने वाले दिनों में औद्योगिक शहर बनेगा, क्योंकि यहां उत्पादन के साथ-साथ बड़ा बाजार भी है। बिहार व नेपाल से नजदीकी भी गीडा को फायदा पहुंचाएगा। स्थापना दिवस पर होने वाले बायर-सेलर मीट के दौरान बड़े खरीदारों से अनुबंध का प्रयास किया जाएगा। इससे यहां लगने वाले उद्योंगो को और अधिक फायदा मिलेगा।
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गोरक्षनगरी में निवेश की बेहतर संभावनाओं की वजह सस्ती जमीन और मजदूरी तो है ही, कच्चे माल से लेकर बड़े बाजार तक सब आसपास ही हैं। नेपाल, बिहार और गोरक्षनगरी के आसपास ही बड़े बाजार मिल जाने से बड़े निवेशक भी गीडा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
बीते छह-सात साल पहले तक इस क्षेत्र में चीनी को छोड़कर अन्य किसी वस्तु का फैक्टरी में उत्पादन नहीं होता था। अभी गीडा की फैक्टरियाें में जो उत्पादन हो रहा है, उसकी खपत गोरखपुर और आसपास के बाजारों में ही हो जा रही है। कपड़ा समेत कुछ उत्पाद अब बिहार के बाजारों में भी पहुंचने लगे हैं। गोरखपुर में तैयार स्कूल ड्रेस को पूरे यूपी से खरीदार मिल रहे हैं। यहां उद्योग लगे तो इन्हें यूपी के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल का बड़ा बाजार मिलेगा।
गोरक्षनगरी गोरखपुर, बस्ती व आजमगढ़ मंडल के करीब सात करोड़ आबादी की केंद्र बिंदु है। इसके अलावा नेपाल का मैदानी इलाका और आधे बिहार का यहां से सीधा संपर्क है। इस तरह करीब 10 करोड़ लोगों की निर्भरता गोरखपुर पर है। यही वजह है कि आर्थिक तौर पर कमजोर माने जाने के बावजूद गोरखपुर शहर में तमाम बड़ी कंपनियों के शोरूम और गोदाम पहले से ही हैं।
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पूर्वोत्तर रेलवे, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, एयरफोर्स और गोरखा रेजिमेंट के अलावा नए बने एम्स में भी अलग-अलग प्रकार के सामान की खरीदारी पूरे साल होती है। इलाके के बड़ी संख्या में लोग विदेश में नौकरी करते हैं, जो अपने परिवारों के लिए जरूरी संसाधन जुटाते हैं।
इससे बाजार में खाद्य सामग्री, कपड़ा, इलेक्ट्राॅनिक्स आइटम से लेकर हार्डवेयर, पेंट, सीमेंट समेत हर प्रकार के वस्तुओं की खूब मांग है। अभी इन सारी चीजों की आपूर्ति दूसरे शहरों से हो रही है। लेकिन जैसे-जैसे गीडा में उद्योग लगेंगे, यहां बने सामानों को स्थानीय बाजार मिलता जाएगा।
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बायर-सेलर मीट से खुलेगी तरक्की की राह
बाजार की नब्ज समझने वालों ने इस बार गीडा के स्थापना दिवस समारोह में बायर-सेलर मीट का आयोजन किया है। गीडा एसडीएम अनुपम मिश्रा बताते हैं कि इसके लिए रेलवे, एम्स, मेडिकल कॉलेज, एयरफोर्स आदि संस्थानों को आमंत्रित किया गया है। उद्यमियों और बड़े खरीदारों के बीच आमने-सामने की वार्ता में कुछ अच्छे नतीजे निकलेंगे।
रेलवे या सेना जैसे खरीदारों के मिलते ही अन्य उद्योगों को भी बल मिलेगा। कपड़े के कारीबारी दीपक कारीवाल और रमाशंकर शुक्ला बताते हैं कि अब गोरखपुर में तैयार माल को पूरे प्रदेश में भेजा जा रहा है। सबसे अधिक स्कूली ड्रेस यहीं बन रहे हैं। अब गोरखपुर में रेडीमेड कपड़े भी बनने लगे हैं।
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हमारी कंपनी पेंट बनाती है। पूरी खपत यहीं के उद्योगों में हो जाती है। जबकि पूर्वांचल, बिहार, बंगाल और नेपाल में पेंट की बड़ी खपत है। सारा माल अभी बाहर से आ रहा है। यही वजह है कि एशियन पेंटस ने यहां अपना गोदाम बनाया है। अब बर्जर पेंटस वाले भी यहां आ रहे हैं। संभव है कि कुछ वर्षों में उनकी कंपनी यहीं लग जाए, क्योंकि पूर्वांचल का बाजार सबसे मजबूत है।-एसके अग्रवाल, उद्यमी।
हमारी कंपनी प्लास्टिक व स्टील के कई प्रोडक्ट बनाती है। बाथरूम फीटिंग्स में हम टाइल्स छोड़कर लगभग सारे सामान बनाते हैं। बड़ी बात यह है कि सारा माल गोरखपुर शहर व आसपास के बाजार में ही खप जाता है। जबकि हमारे पास बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल बार्डर तक के ऑफर पड़े हैं। गाजीपुर से लेकर बहराइच तक गोरखपुर से प्लास्टिक के प्रोडक्ट जा रहे हैं।-संजय अग्रवाल, उद्यमी।
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सीईओ गीडा अनुज मलिक ने कहा कि गोरखपुर आने वाले दिनों में औद्योगिक शहर बनेगा, क्योंकि यहां उत्पादन के साथ-साथ बड़ा बाजार भी है। बिहार व नेपाल से नजदीकी भी गीडा को फायदा पहुंचाएगा। स्थापना दिवस पर होने वाले बायर-सेलर मीट के दौरान बड़े खरीदारों से अनुबंध का प्रयास किया जाएगा। इससे यहां लगने वाले उद्योंगो को और अधिक फायदा मिलेगा।