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Gorakhpur News: सात वर्ष तक जवाबी हलफनामा नहीं...दस हजार जुर्माना, गोरखपुर बीएसए तलब

Fri, 26 Apr 2024 05:20 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Apr 2024 05:20 AM IST
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No counter affidavit for seven years...10 thousand fine, Gorakhpur BSA summoned
क्रासर---सहायक अध्यापकों की नियुक्ति रद्द किए जाने का मामला
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सात वर्ष तक जवाबी हलफनामा दाखिल न किए जाने की सफाई में पेश अस्पष्ट अर्जी को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की एकल पीठ ने स्थाई अधिवक्ता की गुजारिश पर अस्पष्ट अर्जी को वापस लेने की इजाजत देते हुए अगली सुनवाई तीस अप्रैल तक दस हजार रुपये का जुर्माना अदा करने सहित बीएसए को कोर्ट ने मौजूद रहने का आदेश भी दिया।
मामला गोरखपुर के जनता पूर्व माध्यमिक विद्यालय, हरिहरपुर का है। वर्ष 2016 में प्रबंधन ने सहायक अध्यापक के चार पदों की भर्ती का विज्ञापन प्रकाशित किया था, जिसके तहत याची मीरा देवी के साथ ही तीन अन्य सर्वेश, उदय और अजय की नियुक्ति की गई। सभी ने योगदान देना शुरू कर दिया।इसी दौरान पूर्व की प्रबंध समिति ने उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए बीएसए से शिकायत की, जिस पर जांच के बाद बीएसए में नियुक्तियों को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया। इसके खिलाफ वर्ष 2017 में सभी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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याची के अधिवक्ता ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि याची के साथ चयनित सहायक अध्यापक अजय, सर्वेश और उदय की ओर से दाखिल याचिका पर कोर्ट में बीएसए के आदेश पर रोक लगाते हुए जवाब तलब किया था। इसके बाद उनकी सेवाएं अंतरिम तौर पर बहाल हो गईं।
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वहीं याची सहायक अध्यापक मीरा की ओर से दाखिल याचिका पर सात वर्ष बाद भी जवाबी हलफनामा दाखिल नही किया गया और न ही उनकी सेवाएं बहाल की गईं। इस पर कोर्ट ने बीएसए को तलब कर सात वर्ष बाद भी हलफनामा दाखिल न करने का कारण पूछा।

अदालत में पेश बीएसए में याचिका पर जवाब दाखिल करने का दावा किया, लेकिन उस याचिका का विवरण और दाखिले की तारीख का उल्लेख नहीं किया, जिसका हवाला देकर जवाबी हलफनामा दाखिल न करने की छूट मांगी गई थी।
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