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गोरखपुर विश्वविद्यालय के 344 शिक्षक और कर्मियों पर नौ करोड़ का बकाया, बैंक ने भेजा नोटिस

Fri, 08 Jan 2021 09:01 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 08 Jan 2021 09:01 PM IST
सार

  • जिला सहकारी बैंक ने भेजा नोटिस, लोन लेने के बाद किस्त नहीं जमा करने का आरोप लगाया
  • विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी को बैंक ने भेजा पत्र, गोरखपुर विश्वविद्यालय वेतन भोगी समिति का मामला

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Nine crore owed to 344 teachers and personnel of Gorakhpur University
DDU gorakhpur - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर में जिला सहकारी बैंक ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 344 शिक्षक व कर्मचारियों पर नौ करोड़ रुपये नहीं जमा करने का आरोप लगाया है। इसके लिए बैंक ने बकायदा विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी को नोटिस भेजकर रकम जमा कराने की बात कही है। बकाएदारों में एक कुलपति और सात विभागाध्यक्ष भी हैं। बताया जा रहा है कि यह रकम शिक्षकों और कर्मियों ने ऋण में ली थी।  

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जानकारी के मुताबिक गोरखपुर विश्वविद्यालय वेतन भोगी समिति बनाई गई है। समिति में विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी सदस्य हैं। सहकारी बैंक समिति का खाता गोलघर स्थित सहकारी बैंक में है। बैंक का आरोप है कि सदस्यों ने समिति के मार्फत लोन लिया था। लेकिन रकम नहीं चुकाई। इनमें विश्वविद्यालय के 344 शिक्षक और कर्मचारी शामिल हैं। इतना ही नहीं कुछ शिक्षक और कर्मचारी तो सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। साथ ही कुछ का निधन भी हो चुका है। इसके बाद भी लोन की रकम नहीं चुकता की गई है। जबकि इसे लेकर विवि की ओर से बैंक से कोई संवाद भी नहीं किया गया है। लोन लेकर न चुकाने वालों में एक शिक्षक कुलपति भी बन गए हैं, जो मौजूदा समय में कर्नाटक में तैनात हैं। इसके अलावा कुछ शिक्षक और विभागाध्यक्ष भी हैं।
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बैंक को नहीं मिली है किस्त
जिला सहकारी बैंक के डीजीएम वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि समिति ने बैंक से लंबे समय से कोई संवाद ही नहीं किया है। बैंक द्वारा भेजे गए पत्र का समिति ने कोई जवाब नहीं दिया है। समिति के पदाधिकारी बुलाने पर भी नहीं आ रहे हैं। इसकी वजह से वित्त अधिकारी को नोटिस भेजकर 344 शिक्षकों और कर्मचारियों की लिस्ट सौंपी गई है।
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नोटिस देना बिल्कुल गलत, हिसाब में हुई है गड़बड़ी

समिति के सचिव त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि वर्ष 2011 से सचिव हूं। बैंक का नोटिस देना पूरी तरह से गलत है। बैंक के हिसाब में गड़बड़ी हुई है। इस मामले को बैंक के सामने रखा जाएगा। करीब 70 प्रतिशत लोगों ने लोन की रकम जमा कर दी है। ऐसे लोगों के भी नाम सूची में शामिल हैं। इसका हिसाब करके बैंक को दिया जाएगा।

शिक्षकों और कर्मियों में नाराजगी
बैंक की ओर से नोटिस मिलने की जानकारी जब शिक्षकों और कर्मचारियों को हुई तो उन्होंने नाराजगी व्यक्त की है। कुछ कर्मियों ने बताया कि काफी कर्मचारी और शिक्षक लोन की रकम जमा कर चुके हैं। सहकारी समिति की ओर से उन्हें नो-ड्यूज भी दिया जा चुका है। इसके बाद भी ऐसे कर्मियों के नाम सूची में दर्ज हैं। इसकी आपत्ति सचिव को फोन पर कर्मी और शिक्षक दर्ज करा चुके हैं।
 

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