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अब एप से होगी पुलिस की रात्रि गश्त की निगरानी
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अब एप से होगी पुलिस की रात्रि गश्त की निगरानी
गोरखपुर। अब पुलिस वालों की रात्रि गश्त की निगरानी एप से की जाएगी। इसके लिए एडीजी जोन अखिल कुमार ने पुलिसकर्मियों को मैप माई वर्क एप डाउनलोड करने का निर्देश दिया है। इससे रात में पुलिसकर्मी किन रास्तों पर गए, कब, कहां मौजूद थे, सब ब्योरा दर्ज हो जाएगा।
पुलिसकर्मियों को सुबह इस रूट का चार्ट अपने अफसर को भेजना होगा, उसे देखकर यह पता चल जाएगा कि वे तय लोकेशन पर थे कि नहीं। ड्यूटी पर थे, तो गश्त कितनी और कहां किया यह भी मालूम हो जाएगा। जानकारी के मुताबिक, वायरलेस से अफसर लोकेशन लेते हैं। इसमें कई बार पुलिसकर्मी गलत लोकेशन बता देते थे। ऐसे में घटना होने या किसी संयोग के बाद ही उनके झूठ पकड़ में आते थे। एडीजी अखिल ने बताया कि पहले की अपेक्षा तकनीकी काफी बढ़ी है।
रात 12 से सुबह पांच बजे तक होती है ड्यूटी
गोरखपुर में वायरलेस लोकेशन के साथ रात 12 बजे से सुबह पांच बजे तक रात्रि गश्त चलती है। अलग-अलग अधिकारियों व थानेदारों का अलग-अलग दिन शेड्यूल भी बना है, ताकि वह पुलिसकर्मियों की लोकेशन चेक करें साथ ही, व्हाटसएप लाइव लोकेशन भेेजने की भी व्यवस्था कराई गई है। अब इसे एप के जरिए जोड़ने का भी प्लान तैयार कराया जा रहा है।
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एप की मदद से पता चल जाएगा कि रात्रि गश्त पर कौन, कहां था और किन रास्तों का इस्तेमाल कर उसने गश्त किया। इससे उनकी गश्त की लोकेशन जाननी आसान होगी।
- अखिल कुमार, एडीजी
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गोरखपुर। अब पुलिस वालों की रात्रि गश्त की निगरानी एप से की जाएगी। इसके लिए एडीजी जोन अखिल कुमार ने पुलिसकर्मियों को मैप माई वर्क एप डाउनलोड करने का निर्देश दिया है। इससे रात में पुलिसकर्मी किन रास्तों पर गए, कब, कहां मौजूद थे, सब ब्योरा दर्ज हो जाएगा।
पुलिसकर्मियों को सुबह इस रूट का चार्ट अपने अफसर को भेजना होगा, उसे देखकर यह पता चल जाएगा कि वे तय लोकेशन पर थे कि नहीं। ड्यूटी पर थे, तो गश्त कितनी और कहां किया यह भी मालूम हो जाएगा। जानकारी के मुताबिक, वायरलेस से अफसर लोकेशन लेते हैं। इसमें कई बार पुलिसकर्मी गलत लोकेशन बता देते थे। ऐसे में घटना होने या किसी संयोग के बाद ही उनके झूठ पकड़ में आते थे। एडीजी अखिल ने बताया कि पहले की अपेक्षा तकनीकी काफी बढ़ी है।
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रात 12 से सुबह पांच बजे तक होती है ड्यूटी
गोरखपुर में वायरलेस लोकेशन के साथ रात 12 बजे से सुबह पांच बजे तक रात्रि गश्त चलती है। अलग-अलग अधिकारियों व थानेदारों का अलग-अलग दिन शेड्यूल भी बना है, ताकि वह पुलिसकर्मियों की लोकेशन चेक करें साथ ही, व्हाटसएप लाइव लोकेशन भेेजने की भी व्यवस्था कराई गई है। अब इसे एप के जरिए जोड़ने का भी प्लान तैयार कराया जा रहा है।
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एप की मदद से पता चल जाएगा कि रात्रि गश्त पर कौन, कहां था और किन रास्तों का इस्तेमाल कर उसने गश्त किया। इससे उनकी गश्त की लोकेशन जाननी आसान होगी।
- अखिल कुमार, एडीजी