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गोरखपुर: नवजात को झाड़ी में फेंका, चाइल्ड लाइन को सुपुर्द

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 30 Oct 2021 02:34 PM IST
सार

डुमरी खास में रहकर अखिलेश बृजवासी आर्केस्टा संचालन करते है। शुक्रवार सुबह सात बजे वह दुकान के पीछे टहलने गए थे। तभी झाड़ी के पास से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। पास जाकर देखे तो नवजात पड़ा था।

लावारिस नवजात मिला।
लावारिस नवजात मिला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

गोरखपुर जिले के फुटहवा इनार इलाके के डुमरी खुर्द गांव के पास शुक्रवार सुबह झाड़ी में फेंका गया एक नवजात मिला। नवजात शिशु को आर्केस्टा संचालक ने पाया था और फिर शाम में पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने नवजात को चाइल्ड लाइन को सुपुर्द कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आर्केस्टा संचालक ने बच्चे को रखने की इच्छा जताई है।


जानकारी के मुताबिक, डुमरी खास में रहकर अखिलेश बृजवासी आर्केस्टा संचालन करते है। शुक्रवार सुबह सात बजे वह दुकान के पीछे टहलने गए थे। तभी झाड़ी के पास से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। पास जाकर देखे तो नवजात पड़ा था। नवजात बच्चे को लेकर वह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे जहां पर इलाज कराया। शुक्रवार शाम आसपास के लोगों को जब घटना की जानकारी हुई तो डायल 112 पर सूचना दी। सूचना पर 112 और स्थानीय पुलिस पहुंची और चाइल्ड लाइन को बुलाया गया।  इस संबंध में चौरीचौरा प्रभारी निरीक्षक श्याम बहादुर सिंह का कहना है कि मौके पर पहुंचकर विधिक प्रक्रिया में कार्रवाई की जाएगी।

 
केस दर्ज कर भूल जाती है पुलिस
18 नवंबर 2020 को गोला थाने के मसहा गांव में नवजात मिला था। इसमें पुलिस ने धारा 317 के तहत केस तो दर्ज किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की थी। इसके बाद चौरीचौरा में दो केस दर्ज किया गया। सहजनवां में भी पुलिस ने अप्रैल में केस दर्ज किया था लेकिन अब तक इस मामले में कार्रवाई नहीं की। ऐसे संवेदनशील मामलों में पुलिस की बेपरवाही ही सामने आती है। शायद यही वजह है कि इस तरह की घटनाएं नहीं रुक पा रही हैं।
 
एक बार पुलिस ने की थी जांच तो खुला था बड़ा मामला
फरवरी 2020 में पीपीगंज इलाके में एक नवजात का शव मिला था। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया तो हत्या की पुष्टि हो गई। अमर उजाला ने मामले के तह तक जाने का अभियान चलाया। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि मां ही बच्चे की कातिल थी। वह भी नाबालिग मां थी और उससे दुष्कर्म किया गया था। इस मामले में पुलिस ने विभाष्म सिंह पर हत्या और दुष्कर्म का केस दर्ज किया था। बाद में पुलिस ने उसे जेल भी भेजा था।
 
गंभीर अपराध, होनी चाहिए कार्रवाई सख्त कार्रवाई
धारा-315 आईपीसी : शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के पश्चात मृत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य।
सजा : दस वर्ष तक कारावास और आर्थिक दंड
धारा-317 आईपीसी : माता-पिता या नवजात की देखरेख करने वाले व्यक्ति द्वारा 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना अपराध है।
सजा : सात साल की सजा या फिर जुर्माना, या फिर कैद और जुुर्माना दोनों
धारा-318 आईपीसी : नवजात को गोपनीय तरीके से जीवित अथवा मृत फेंकना अपराध है।
सजा : दो साल की कैद या जुर्माना, या फिर कैद और जुर्माना दोनों।

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