बागीचे में मिली नवजात बच्ची देख गांव वाले हुए हैरान, एक ने कहा- मुझे गोद लेना है
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गोरखपुर के बड़हलगंल इलाके के सखराखोर गांव के बागीचे में सोमवार की दोपहर नवजात बच्ची मिली। सूचना पर पहुंची पुलिस नवजात का हेल्थ चेकअप कराकर चाइल्डलाइन को सौंपने की तैयारी में जुट गई है।
हालांकि इस प्रकरण में पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि किसी ने तहरीर नहीं दी है। उधर, गांव के रामानंद दुबे ने बच्ची को गोद लेने की इच्छा जाहिर की है। पुलिस ने उन्हें नियम के तहत प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी है।
जानकारी के मुताबिक, दोपहर एक बजे गांव के रामानंद दुबे के बागीचे में एक नवजात बच्ची को चरवाहों ने देखा। बच्ची एक कपड़े में लपेटकर फेंकी गई थी। लोगों ने रामानंद दुबे को सूचना दी। उनके पुत्र राम दुबे मौके पर पहुंचे और नवजात को घर लाए। इसके बाद बड़हलगंज पुलिस को सूचना दी गई। समाचार लिखे जाने तक बच्ची रामानंद दुबे के घर पर ही है।
बड़हलगंज के इंस्पेक्टर रामज्ञा सिंह ने कहा कि बच्ची के बारे में चाइल्डलाइन को सूचना दी गई है। उसका हेल्थ चेकअप कराकर वहीं पर रखा जाएगा। फिर आगे की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। केस दर्ज कराने के लिए किसी ने कोई तहरीर नहीं दी है।
ये हैं कानूनी प्रावधान
- धारा 317: माता-पिता या नवजात की देखरेख करने वाले व्यक्ति द्वारा 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना अपराध है।
- सजा : सात साल की सजा या फिर जुर्माना या कैद, जुर्माना दोनों
- धारा 318 : पैदाइश छुपाने के लिए नवजात को गोपनीय तरीके से जीवित या मृत फेंकना अपराध है।
- सजा : दो साल की कैद या जुर्माना या फिर दोनों
डीजीपी का आदेश फिर भी करते हैं आनाकानी
कहीं पर भी नवजात मिलने पर एफआईआर दर्ज करने का डीजीपी का आदेश भी थानेदार दरकिनार कर देते हैं। यह हाल तब है जब जिले के चौरीचौरा थाने में दो, गोला थाने में एक एफआईआर पहले दर्ज हो चुकी है। इन मामलों में पुलिस खुद वादी बनी थी। अब एक बार फिर नवजात मिलने पर पुलिस तहरीर ना आने का बहाना बनाकर केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही है।