बाहर से आए लोगों को 'क्वारंटीन' करना बनी चुनौती, जांच के बाद ही भाग जा रहे हैं लोग
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गोरखपुर में बाहर से आए लोगों के क्वारंटीन करना जिला प्रशासन के लिए चुनौती साबित हो रहा है। रात में और सुबह बसों से पहुंच रहे लोग सीधे घर चले जा रहे और फिर समझाने पर भी 14 दिन के लिए क्वारंटीन सेंटर में रहने को तैयार नही हो रहे।
उधर कई में प्रशासन ने क्वारंटीन सेंटर में ठहराया भी तो वे रात में या सुबह के वक्त निगरानी में लगाए गए प्रधान व पंचायत सचिव से झगड़ा कर घर भाग गए। प्रशासन के मुताबिक शनिवार को करीब 702 लोग बाहर से जिले में आए। इनमें भटहट ब्लाक में सबसे ज्यादा 87 लोग शामिल है। सभी 1352 ग्राम पंचायतों के प्राथमिक स्कूल और सामुदायिक भवनों में क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है।
बड़हलगंज ब्लका के बैरियाडीह के प्राथमिक विद्यालय में क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है। यह स्कूल पास के ही गांव शनीचरा से सटा है। रविवार को एक युवक दिल्ली से आया तो प्रशासन ने उसे अलग रहने के लिए स्कूल भेजा लेगा लेकिन शनीचरा गांव के लोगों ने उसे वहां से भगा दिया जिसके बाद वह घर चला गया।
नहीं मान रहे हैं किसी की सलाह
इसी तरह ब्लाक के ही लखनऊरा में एक दिल्ली तो नौ लोग मथुरा से आए हैं। सभी गांव में ही घूम रहे। स्वास्थ्य विभाग ने जांच कर उन्हें घर में ही रहने की सलाह दी थी लेकिन वह मान नहीं रहे। ददरी में दो और कल्याण गांव में तीन लोग बाहर से आए।
वे भी क्वारंटीन प्रोटोकाल का पालन नहीं कर रहे। इसी तरह पाली ब्लाक के मलउर और नेवास में तो लोगों प्राथमिक विद्यालयों में बने क्वारंटीन सेंटर में हैं लेकिन इटार, रिठुआखोर, बगोहिया, सेमरी, टड़वा, बनकटिया, अलगटपुर और धर्मदास में बाहर से आए 15 से अधिक लोग अपने घर पहुंच गए।
सीडीओ हर्षिता माथुर ने कहा कि जिले के सभी 1352 पंचायतों के प्राथमिक विद्यालयों या सामुदायिक भवनों में क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है। बाहर से आ रहे लोगों को वहीं पर 14 दिन के लिए रखा जा रहा। उनके सेहत की जांच कराई जा रही।
उनके खाने-पीने का इंतजाम किया जा रहा। सूचना मिली है कि रविवार की रात और सोमवार की सुबह जिले में पहुंचे कुछ लोग सीधे घर चले गए हैं। स्वास्थ्य टीम भेजकर उनकी जांच कराने के साथ ही उन्हें क्वारंटीन सेंटर लाया जा रहा है।