फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Neural tube did not develop in four children due to diabetes

Exclusive: इंसुलिन से मधुमेह काबू में, पांचवीं बार सलामत रही कोख

Wed, 04 Jan 2023 02:50 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 04 Jan 2023 02:50 PM IST
सार

डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि कई बार गर्भवती, शुगर को नजरअंदाज कर देती हैं। जबकि, शुगर की वजह से भ्रूण में न्यूरल ट्यूब विकसित नहीं होने पाता। इस स्थिति में भ्रूण में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का निर्माण करने वाली कोशिकाएं विकसित नहीं हो पाती हैं। इसकी वजह से बच्चे का विकास गर्भ में नहीं होता है।

विज्ञापन
Neural tube did not develop in four children due to diabetes
डायबिटीज। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : istock

विस्तार

मधुमेह (शुगर) कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इससे एक नहीं, चार नवजातों की जान चली गई। मधुमेह के कारण ही हर बार गर्भवती के गर्भ में पल रहे नवजातों का न्यूरल ट्यूब विकसित नहीं हुआ। इसकी वजह से जन्म होते ही नवजातों की जान चली जाती थी।

विज्ञापन


बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने मरीज का पूरे नौ माह तक फालोअप करते हुए इंसुलिन से मधुमेह पर काबू पाया। इसके बाद पांचवीं बार कोख सलामत कर स्वस्थ बच्चे का प्रसव कराया। अब जच्चा-बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ हैं।  
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक, गुलरिहा इलाके की रहने वाली प्रमिला (काल्पनिक नाम) मधुमेह बीमारी से ग्रसित हैं, लेकिन इसे वह नजरअंदाज करती रहीं। शादी के सालभर के बाद वह प्रेग्नेंट हुईं। प्रेग्नेंसी के दौरान वह रुटीन जांच कराती रहीं और निजी अस्पताल में प्रसव कराया। इस दौरान नवजात का जन्म हुआ, लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


करीब आठ माह बाद वह दूसरी बार प्रेग्नेंट हुईं। इसबार भी उन्होंने शहर के एक निजी अस्पताल में जांच कराई, लेकिन इस बार भी उन्होंने शुगर को नजरअंदाज कर दिया। दूसरी बार भी बच्चा हुआ, लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी मौत हुई। इस बार कारण जानने की कोशिश हुई तो पता चला कि बच्चे का न्यूरल ट्यूब विकसित नहीं हुआ था। शादी के छह साल के अंदर वह चार बार प्रेंग्नेंट हुईं और चारों बार बच्चों के जन्म होते ही मौत हो गई।

इसके बाद उन्होंने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जांच कराने का फैसला लिया। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि डेढ़ माह की प्रेग्नेंसी के दौरान वह पहली बार मेडिकल कॉलेज आईं। इसके बाद पूरे केस की हिस्ट्री जानी गई।

 

शुगर नियंत्रण, लेवल-टू और कलर डाप्लर की जांच से मिली मदद

डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि इस बीच मधुमेह की जांच की गई तो पता चला 400 से अधिक है। इस पर पहले शुगर नियंत्रण करने के लिए इंसुलिन का इस्तेमाल किया गया। क्योंकि, शुगर की दवा से बच्चे को नुकसान पहुंच सकता था। इस पर धीरे-धीरे इंसुलिन देना शुरू किया गया। इसके बाद लेवल-टू और कलर डाप्लर की दो-दो बार जांच कराई गई।

कलर डाप्लर जांच में यह पता चला कि शुगर नियंत्रित होने की वजह से भ्रूण बढ़ रहा है और न्यूरल ट्यूब विकसित होता जा रहा है। इस ट्यूब से मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का निर्माण करने वाली कोशिकाएं भी सही मिलीं। जबकि, जिन चार बच्चों की पहले मौत हुई थी, उनमें न्यूरल ट्यूब पूरी तरह से विकसित नहीं हो पा रहा था। इस पर नौवें महीने में सिजेरियन प्रसव कर बच्चे की जान बचाई गई। 10 दिनों तक उसकी देखभाल की गई। इसके बाद बच्चे को मां के सुपुर्द किया गया। अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है।

क्या है न्यूरल ट्यूब
डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि कई बार गर्भवती, शुगर को नजरअंदाज कर देती हैं। जबकि, शुगर की वजह से भ्रूण में न्यूरल ट्यूब विकसित नहीं होने पाता। इस स्थिति में भ्रूण में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का निर्माण करने वाली कोशिकाएं विकसित नहीं हो पाती हैं। इसकी वजह से बच्चे का विकास गर्भ में नहीं होता है। कई बार समय से पहले बच्चे की मौत गर्भ में ही हो जाती है। कई बार जन्म के तत्काल बाद बच्चे की मौत होती है। ऐसे मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed