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महराजगंज: क्वारंटीन सेंटर में नेपाली नागरिक की मौत, अलीगढ़ से आया था पैदल
Sat, 23 May 2020 03:18 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 23 May 2020 03:18 PM IST
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MaharajGanj news
- फोटो : अमर उजाला।
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महराजगंज के राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय नौतनवां क्वारंटीन सेंटर में शनिवार की भोर में नेपाली मजदूर की मौत हो गई। उसे किडनी से संबंधित बीमारी थी। उसके इलाज की समुचित व्यवस्था प्रशासन की ओर से की गई थी। मौत होने के बाद पुलिस ने शव का पंचनामा बनवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय नौतनवां क्वारंटीन सेंटर में 139 नेपाली नगारिक हैं। इसमें देव बहादुर थापा 34 निवासी हरिनास गांव पालिका वार्ड नंबर दो थाना चिसापानी, जिला स्यांजा नेपाल की तबीयत खराब थी। देव बहादुर अलीगढ़ में मजदूरी करता था।
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लॉकडाउन के बाद काम धंधा बंद होने पर घर के लिए चल पड़ा। किसी तरह वह नौतनवां तक पहुंचा। यहां से नेपाल जाने की अनुमति नहीं मिलने पर उसे क्वारंटीन में रख दिया गया। शुक्रवार उसकी तबीयत खराब हुई थी। उसे जिला अस्पताल ले जाकर इलाज कराया गया था।
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डॉक्टरों के मुताबिक देवा बहादुर को गुर्दे की खराबी से शरीर में सूजन हो गया था। जिला अस्पताल से इलाज के बाद शुक्रवार की शाम लगभग 7 बजे क्वारंटीन सेंटर नौतनवां एंबुलेंस से वापस लौटा।
पांच माह पहले गया था मजूदरी करने
मौत की सूचना पाकर पहुंचे एसडीएम जसधीर सिंह तथा सीओ राजू कुमार साव ने नेपाल के अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलने पर शनिवार को लगभग 12 बजे नेपाल के भैरहवा के नेपाल पुलिस के डीएसपी खड़ग बहादुर खत्री तथा भैरहवा के पुलिस इंस्पेक्टर केआर ग्यावली टीम के साथ पहुंचे।
शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। इस मौके पर तहसीलदार अशोक कुमार गुप्ता, प्रभारी निरीक्षक परमा शंकर यादव, कस्बा चौकी इंचार्ज संजय दूबे, नेपाल पुलिस के रमेश कुमार, संतोष रुंचाल, टाप बहादुर आदि मौजूद रहे।
एसडीएम नौतनवां जसधीर सिंह ने बताया कि क्वारंटीन में बेहतर व्यवस्था सभी के लिए है। नेपाली नागरिक की तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल भेजकर इलाज कराया गया था। बीमारी के वजह से उसकी मौत हो गई है। नेपाल के अधिकारियों की मौजूदगी में शव को पंचनाम कर पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया गया।
प्रभारी चिकित्सधिकारी डॉ. अमित कुमार गौतम ने बताया कि गुर्दे की खराबी से शरीर में सूजन था। एक माह पहले से दवा खाता था। क्वारंटीन होने पर वह बताया नहीं था कि दवा चलती है। शुक्रवार को दोपहर में उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया था। वहां से शाम को आया और शनिवार की सुबह उसकी मौत हो गई।
मृतक देव बहादुर थापा अलीगढ़ में रहकर मजदूरी करता था। मृतक के जीजा शिव बहादुर राना ने बताया कि मृतक की पत्नी का नाम सुमित्रा है। उसके दो बेटी एक बेटा है। पांच माह पूर्व वह अलीगढ़ में मजदूरी करने के लिए गया था। उसकी कमाई से घर गृहस्थी चलती थी।
घर 90 किमी दूरी पर आई मौत
देव बहादुर का घर सरहद से करीब 90 किमी की दूरी पर है। लॉकडाउन में काम धंधा बंद हुआ तो घर जाने के लिए नौतनवां कस्बे तक पहुंचा। लेकिन उसे क्या पता था कि घर के करीब आकर ही उसकी मौत हो जाएगी।
18 मई को पहुंचा था नौतनवां
अलीगढ़ से कुछ दूर पैदल तो कुछ दूर वाहन से देव बहादुर किसी तरह नौतनवां तक पहुंचा। लेकिन बार्डर सील होने के वजह से उसे जाने की अनुमति नहीं मिली।
शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। इस मौके पर तहसीलदार अशोक कुमार गुप्ता, प्रभारी निरीक्षक परमा शंकर यादव, कस्बा चौकी इंचार्ज संजय दूबे, नेपाल पुलिस के रमेश कुमार, संतोष रुंचाल, टाप बहादुर आदि मौजूद रहे।
एसडीएम नौतनवां जसधीर सिंह ने बताया कि क्वारंटीन में बेहतर व्यवस्था सभी के लिए है। नेपाली नागरिक की तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल भेजकर इलाज कराया गया था। बीमारी के वजह से उसकी मौत हो गई है। नेपाल के अधिकारियों की मौजूदगी में शव को पंचनाम कर पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया गया।
प्रभारी चिकित्सधिकारी डॉ. अमित कुमार गौतम ने बताया कि गुर्दे की खराबी से शरीर में सूजन था। एक माह पहले से दवा खाता था। क्वारंटीन होने पर वह बताया नहीं था कि दवा चलती है। शुक्रवार को दोपहर में उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया था। वहां से शाम को आया और शनिवार की सुबह उसकी मौत हो गई।
मृतक देव बहादुर थापा अलीगढ़ में रहकर मजदूरी करता था। मृतक के जीजा शिव बहादुर राना ने बताया कि मृतक की पत्नी का नाम सुमित्रा है। उसके दो बेटी एक बेटा है। पांच माह पूर्व वह अलीगढ़ में मजदूरी करने के लिए गया था। उसकी कमाई से घर गृहस्थी चलती थी।
घर 90 किमी दूरी पर आई मौत
देव बहादुर का घर सरहद से करीब 90 किमी की दूरी पर है। लॉकडाउन में काम धंधा बंद हुआ तो घर जाने के लिए नौतनवां कस्बे तक पहुंचा। लेकिन उसे क्या पता था कि घर के करीब आकर ही उसकी मौत हो जाएगी।
18 मई को पहुंचा था नौतनवां
अलीगढ़ से कुछ दूर पैदल तो कुछ दूर वाहन से देव बहादुर किसी तरह नौतनवां तक पहुंचा। लेकिन बार्डर सील होने के वजह से उसे जाने की अनुमति नहीं मिली।